अमेरिका में मतदान के दो दिन बाद भी राष्ट्रपति पद की तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। मतगणना के बीच डेमोक्रेट जो बाइडन ने 253 निर्वाचक मंडल मतों के साथ निर्णायक बढ़त बना ली है। वहीं, मौजूदा राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप 214 मतों के साथ व्हाइट हाउस की दौड़ में पिछड़ते दिख रहे हैं। अब कोई चमत्कार हो जाए औैर नतीजे ट्रंप के पक्ष में आ जाएं, तो कह नहीं सकते।

मगर अब तक के रुझान देेखें तो यह तय हो गया है कि अमेरिका में अबकी बार बाइडेन सरकार आ चुकी हैै। हालांकि, ट्रंप कानूनी लड़ाई के फैसले पर आगे बढ़ गए हैं। दूसरी ओर, उनके समर्थक धांधली का आरोप लगाते हुए कई राज्यों में मतगणना केंद्रों के बाहर जुटे हैं। समर्थकों ने कई जगह हंगामा और प्रदर्शन किया।

अमेरिकी मीडिया संगठनों के अनुमान के अनुसार बाइडन को जीत के लिए केवल 6 से 17 निर्वाचक मंडल मत चाहिए। जबकि ट्रंप ने 270 के जादुई आंकड़े से करीब 56 मत दूर हैं। 538 सदस्यीय निर्वाचक मंडल में जीत के लिए 270 मत जरूरी हैं। बड़े मीडिया संस्थानों ने बाइडन को मिशिगन और विस्कॉन्सिन में विजयी बताया है। वहीं, ट्रंप पेन्सिलवेनिया में आगे चल रहे हैं।

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जॉर्जिया, पेन्सेल्वेनिया, नार्थ कैरोलिना और नेवादा में मतगणना जारी है। बाइडन अमेरिकी इतिहास में सर्वाधिक मत पाने वाले प्रत्याशी बन गए हैं। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का रिकॉर्ड तोड़ा है। बाइडन को 7.07 करोड़ मत मिल चुके हैं। यह ओबामा से तीन लाख ज्यादा है। बाइडन लोकप्रिय मतों में ट्रंप से 27 लाख मत आगे हैं। ट्रंप 6.732 करोड़ मत पाकर ओबामा के रिकॉर्ड के करीब है। अमेरिका के 120 साल के इतिहास में इस बार सर्वाधिक 66.6 फीसदी वोटिंग हुई थी।

अब सवाल यह है कि आखिर क्यों डोनाल्ड ट्रंप हार के करीब पहुंचे। जवाब बेहद आसान है। अपने कार्यकाल में ट्रंप ने अमेरिका फस्र्ट की बात तो की, मगर किसी के प्रति भरोसा कायम नहीं रख पाए। रही-सही कसर कोरोना ने पूरी कर दी। अमेरिका में कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कोरोना महामारी को बहुत हल्के में लिया। उन्होंने कोरोना को लेकर कई गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां भी कीं और सार्वजनिक स्थानों पर बिना मास्क के दिखाई दिए। डोनाल्ड ट्रंप खुद कोरोना संक्रमित पाए गए। तब भी लापरवाही का ही उदाहरण पेश किया। इसका फायदा जो बाइडन ने जमकर उठाया। बाइडन ने कोरोना को लेकर उठाए गए हर कदम को नाकामी करार दिया। साथ ही जो मौंते हुईं उनके लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया।

फिर चुनाव के ऐन पहले अमेरिकी अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लायड की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद अमेरिका में जमकर विवाद हुआ, इसके बाद लाखों लोगों ने सड़क पर निकल पर प्रदर्शन किए। प्रदर्शन इतने बढ़ गए कि राष्ट्रपति ट्रंप ने नेशनल गाड्र्स को सड़कों पर उतार दिया। इस फैसले को लेकर ट्रंप की खूब आलोचना हुई और देश के साथ दुनियाभर में इस फैसले का विरोध हुआ। इस विवाद का खासा असर इन राष्ट्रपति चुनावों पर पड़ा है। इस बार अमेरिकी चुनाव में बेरोजगारी का मुद्दा खूब गूंजा है।

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दोनों प्रत्याशियों ने नौकरी देने के लुभावने वादे किए। वहीं अमेरिका में कोरोना के कारण लगभग 10 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई, इसका ठीकरा जो बाइडन ने सीधे-सीधे डोनाल्ड ट्रंप की खराब नीतियों पर फोड़ा। इसे लेकर अमेरिकी युवाओं में डोनाल्ड ट्रंप के प्रति गुस्सा देखने को मिला है। साथ ही बाइडन ने नौकरी देने के वादे को लेकर युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की है। जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति की गद्दी संभाली, वो हमेशा कहते रहे- पहले राष्ट्र। इसके बाद ट्रंप ने दूसरे देशों से अमेरिका में काम करने वाले लोगों के लिए एच1बी वीजा के साथ कई कानून सख्त कर दिए थे।

इसके बाद ट्रंप को काफी विरोध भी झेलना पड़ा था। वहीं जो बाइडन ने अपने प्रचार में इन नियमों में ढिलाई देने की बात कही थी। राष्ट्रपति चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट में नए जज को लेकर लंबी बहस चली। जब सुप्रीम कोर्ट में जज का नाम नामित हुआ तो इसके बाद ट्रंप ने जज पर डेमोक्रेट्स समर्थक होने के आरोप लगाए। साथ ही कुछ ऐसे बयान दिए जिनको बाइडन ने प्रचार में खूब उछाला।

-सिद्धार्थ शंकर

 

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