खेत खलिहान

चूहों का ऊधम ऐसे करें कम

ऊचूहे अच्छे तैराक भी होते हैं। वे पानी में खड़ी धान की फसल को भी खूब नुकसान पहुंचाते हैं। ये ऊपर चढ़ने में भी माहिर होते हैं, इसलिए कच्चे मकान से ले कर महानगरों की बहुमंजिला इमारतों में भी देखने को मिल ही जाते हैं। चूहों की कुछ प्रजातियां तो नारियल, कोको, सुपारी वगैरह की रोपण फसलों पर भी ही रहती हैं और उन को 50 से 50 फीसदी तक हानि पहुंचाती है।

सूखे इलाकों में चूहों द्वारा बाजरा और ज्वार को बहुत नुकसान होता है। सिंचाई वाले इलाकों में गेहूं, धान, गन्ना वगैरह सभी फसलों को ये नुकसान पहुंचाते हैं।
तिलहनी व दलहनी फसलों को भी चूहे खूब बरबाद करते हैं। चूहे फसल को बीज बोने से ले कर पकने तक और फिर भंडारण तक हर स्तर पर नुकसान पहुंचाते हैं।

चूहों की प्रजातियां:
चूहों की 5 ऐसी प्रजातियां हैं, जो फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं।

भारतीय जरबिलः
इसे मृग चूहा या टटेरा इंडिका भी कहते हैं। पहाड़ों को छोड़ कर यह सारे भारत में पाया जाता है। यही चूहा ‘प्लेग बेसिल्स’ जैसी महामारी का भंडार हुआ करता था, यह चूहा सभी तरह की फसलों, चारगाहों, पेड़ों वगैरह का नुकसान पहुंचाता है। साल भर बच्चे देने वाली यह नस्ल 1 बार में 1 से 10 बच्चे तक पैदा करती है।

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श्री राम शर्मा

राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तमान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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