यूकेलिप्टस है कमाई का लंबा जरिया

eucalyptus cultivation making farmers richer

Eucalyptus cultivation making farmers richer in hindi : खुद किसान को लकड़ी की जरूरत रहती है। इस के लिए उसे बाजार से लकड़ी खरीदनी पड़ती है। अगर किसान अपने खेत में यूकेलिप्टस के पेड़ लगाएं तो वे कई काम एक साथ कर सकते हैं। जंगल कटने और निर्माण उद्योग के तेजी से बढ़ने के कारण इमारती लकड़ी की कमी हो गई है। इस कमी की वजह से लकड़ी के दाम भी आसमान छूने लगे हैं। किसान वक्त की मांग को समझ कर खेतों में इमारती लकड़ी के पेड़ लगा कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। खुलासा डॉट इन में जानिए यूकेलिप्टस की खेती के बारे में विस्तार से।

यूकेलिप्टस मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया का पौधा है। यह तेजी से बढ़ने वाला, सीधे तने व हल्के फैलाव वाला पौधा होता है। इसका इस्तेमाल इमारती लकड़ी, फर्नीचर, पेटियां, लुगदी, ईंधन, पार्टिकल बोर्ड, हार्ड बोर्ड वगैरह बनाने में किया जाता है। कृषि वानिकी के तहत किसान अपने खेतों में यूकेलिप्टस लगा कर ईंधन, लकड़ी हासिल करने के साथ डबल कमाई कर सकते हैं।  यूकेलिप्टस जीरो से ले कर 47 डिगरी सेल्सियस तापमान तक व 20 सेंटीमीटर से 125 सेंटीमीटर तक सालाना बारिश वाले स्थानों में उग सकता है। गहरी परत वाली न व 6.5 से 7.5 पीएच मान वाली मिट्टी यूकेलिप्टस लगाने के लिए अच्छी होती है। हल्के पानी भराव वाले इलाकों में भी इसे उगाया जा सकता है। इस को अच्छी पैदावार के लेने के लिए अच्छे बीज इस्तेमाल में लाने चाहिए। यूकेलिप्टस के बीज या पौध सरकारी नर्सरी, कृषि विश्वविद्यालय या राज्य वन अनुसंधान संस्थान, कानपुर से लिए जा सकते हैं।


यूकेलिप्टस की पौध को खेत में बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है। पेड़ का फैलाब ऊंचा व हल्का होने के कारण इस की छाया बहुत कम होती है। पेड़ को काट देने पर दोबारा कल्ले निकल आते हैं, जिस से 5 साल में नया पेड़ तैयार हो जाता है। इस पेड़ को जानवर नहीं खाते हैं, जिस से इस की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने जरूरत नहीं होती है। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगा कर पर्यावरण संतुलन बनाने में मदद होती है।

यूकेलिप्टस के पेड़ पर रहने वाले पक्षी खेती के दुश्मन कीट, पतंगों, चूहों वगैरह को खा कर फसल की रक्षा करते हैं। खेत की मेंड़ों पर लगाए गए यूकेलिप्टस के पौधों को अलग से सिंचाई व खाद देने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि खेतों को दिया गया पानी व खाद यूकेलिप्टस को अपने आप मिल जाता है।

पौध रोपाई

  • यूकेलिप्टस के पौधे खेत की मेंडों पर 2 मीटर की दूरी पर लगाने चाहिए।
  • मेंड़ों पर पौध लगाने की दिशा पूर्वपश्चिम रखें ताकि सर्दियों में रबी की फसल पर लगातार छाया न पड़े।
  • अगर खेत के अंदर ये पौधे लगा रहे हैं तो बंजर या कम उपजाऊ वाली जमीन पर यूकेलिप्टस की सघन रोपाई 2-2.5 मीटर के अंतर पर करें।
  • इस की लाइनों के बीच 2 साल तक खेती की जा सकती है। इस से कम उपजाऊ जमीन पर भी अच्छा फायदा मिलता है।

पैदावार और मुनाफा

कृषि वानिकी तकनीक में 1 हेक्टेयर खेत में 500 यूकेलिप्टस पौधे लगाने पर लागत और फायदा, उस में लगाई गई फसलों के मुताबिक तय होता है। खेत की मेंड़ों व खेत के अंदर ज्यादा से ज्यादा यूकेलिप्टस लगाएं, क्योंकि गेहूं, धान, गन्ना वगैरह फसलों के साथ यूकेलिप्टस लगाने पर अलग से उपज मिल सकती है। आमतौर पर 8 साल बाद यूकेलिप्टस के पेड़ को बेचने से 3 सौ से 5 सौ रुपए प्रति पेड़ की आमदनी होती है।
यूकेलिप्टस से तेल, शहद वगैरह जैसे उत्पाद भी मिलते हैं। 5 साल पुराना युकेलिप्टस का एक पेड़ तकरीबन 2 क्विटल ईंधन देता है जो 1 परिवार के लिए 1 महीने तक के लिए खाना बनाने के काम आता है।

इस तरह खेत में 12 यूकेलिप्टस के पेड़ आप को साल भर ईंधन देते हैं, जिस से पशुओं को गोबर खाद बनाने के काम आता है और ईंधन खोजने के लिए घर से बाहर नहीं जाना पड़ता। निजी जमीन के यूकेलिप्टस पेड़ों को उत्तर प्रदेश वन विभाग तय समर्थन मूल्य पर खरीदता है। यूपी वन विभाग यूकेलिप्टस की गोलाई के हिसाब से कीमत तय करता है। उत्तर प्रदेश में अपने खेत में उगाए गए यूकेलिप्टस के पेड़ काटने व बेचने के लिए वन विभाग किसी दूसरे विभाग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

 

 

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Title: eucalyptus cultivation making farmers richer in Hindi  | In Category: खेत खलिहान khet khalihan

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