कृषि वानिकीः खेती से करें दो दूनी चार

how to earn money with agri business

जमाना जिस तेजी से बदल रहा है, लोगों की जरूरतें भी बदल रही हैं, तरक्की के आयाम बदल रहे हैं, उसी गति से किसानों को भी बदलना होगा। केवल गेहूं, धान या गन्ने के भरोसे तरक्की की दौड़ में शामिल नहीं हुआ जा सकता, किसानों को भी एक साथ कई काम करने होंगे,
कृषि वानिकी ही एक ऐसा साधन है जिस में किसान एक बार के खर्चे में डबल फायदा ले सकते हैं और वानिकी से यानी पेड़ लगाने से हमारी आबोहबा और जंगल महफूज बने रहेंगे।
एक ही जमीन पर फसल और पेड़ों को लगा कर दोनों तरह की उपज ले कर आमदनी बढ़ाना कृषि वानिकी कहलाता है। इस में इमारती लकड़ी के लिए लंबी उम्र वाले पेड़ों को खेत की मेंड़ या खेत के बीच लाइनों में लगाया जाता है और साथ मंे अनाज, तिलहन या सब्जी वाली फसलें ली जाती हैं।
हमारे देश की अर्थव्यवस्था खेतीबारी के भरोसे है। कुदरती आपदा जैसे बाढ़ व सूखा से फसल खराब होने पर किसानों को नुकसान पहुंचता है या फिर पैदावार ज्यादा दाम कम हो जाने से किसान को लागत भी नहीं निकलती है। खेती के साथ पेड़ लगाने से सही समय और सही दाम मिलने पर फसल काटने व बेचने की सुविधा है। इस के अलावा फसल के साथ लगाए पेड़ कुदरती आपदा को झेलते हुए किसान के लिए फसल बीमा जैसे लाभकारी साबित होते हैं।

किसान कृषि वानिकी को अपना कर खेती में वैरायटी ला कर अनाज के साथ ईधन की लकड़ी, औजारों की लकड़ी, पशुओं के लिए चारा वगैरह की सहूलियत कर के खुद को मजबूत कर सकते हैं। अगर लकड़ी होगी तो ईंधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले गोबर को जलाने से बचा कर खाद के तौर पर इस्तेमाल कर के उर्वरकों पर खर्च होने वाले पैसे की बचत कर सकते हैं।


कृषि वानिकी के प्रकार
कृषि वानिकी में खेत के चारों तरफ मेंड़ों पर या खेतों के अंदर लाइनों में एक तय दूरी में फसलों के साथ पेड़ों को लगाया जाता है। इस में पेड़ों के बीच दूरी इस तरह रखी जाती है कि उन के बीच में दूसरी फसल को उगाया जा सके और खेतों के कामों के लिए पेड़ों के बीच ट्रैक्टर वगैरह चलाया जा सके।
कृषि वानिकी तकनीक को जगह और मौजूद सहूलियतों के आधार पर कई हिस्सों में बांटा जा सकता है। जैसे कृषि वानिकी, कृषि बागबानी, कृषि बागबानी वानिकी, फूल कृषि व वानिकी, किचन गार्डन वानिकी और चारागाह वानिकी वगैरह।

कृषि वानिकीः इस के तहत खेत के चारों तरफ मेंड़ों पर 2 या 3 लाइनों में पेड़ों को 3 मीटर के अंतर में लगाते हैं। इस के अलावा खेतों के अंदर लाइनों में एक तय दूरी में भी पेड़ों की लगाया जाता है। इस तकनीक में पेड़ों के बीच अंतर इस तरह रखा जाना चाहिए कि उन के बीच में अनाज वाली फसलों को उगाया जा सके और निराईगुड़ाई या जुलाई के लिए ट्रैक्टर भी चलाया जा सके।

इस तकनीक में 5-4 या 5-5 मीटर की दूरी पर पेड़ लगाने चाहिए। तराई वाले इलाकों में इस तरह की खेती के लिए पोपलर के पेड़ सब से अच्छे रहते हैं।
वन विभाग द्वारा पोपलर की अच्छी प्रजाति के कुछ क्लोन भी तैयार किए गए है, जिन को अलग-अलग आबोहवा इलाकों में लगाया जा सकता है। कृषि वानिकी तकनीक में यूकेलिप्टस, खैर, बबूल, सागौंन और शीशम के पेड़ में लगाए जा सकते हैं।

कृषि बागबानीः इस तकनीक का सब से ज्यादा प्रचलन तराई व दोआब वाले इलाकों में होता है। इस तकनीक से फसल पैदावार में इजाफा होता है। फल मिलने से बच्चों की सेहत सुधरती है और फलों की बिक्री से लगातार आमदनी होती रहती है।
यह तकनीक भी किसानों में ज्यादा मशहूर होती जा रही है। इस के तहत खेतों में फलदार पेड़ आम, अमरूद, आंवला, बेर, बेल, किन्तू और कटहल वगैरह को एक तय दूरी पर लगाते हैं पेड़ों के बीच में कृषि फसलों की बोआई की जाती है। पेड़ों के बड़े हो जाने पर उन की कटाई छंटाई करते रहते हैं।

कृषि बागबानी वानिकीः यह तकनीक भी तेजी से चलन में आ रहा है, इस तकनीक से कम जगह में ज्यादा फायदा होता है। इस से गांव के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए फल मिलते हैं। फलों से एक लगातार आमदनी का जरिया बन जाता है। पशुचारा और जलाने के लिए लकड़ी के लिए किसानों को जंगल के भरोसे नहीं रहना चाहिए।

इस तकनीक में कृषि फसलांे के साथ-साथ पपीता, आंवला, नींबू, अमरूद और इमारती लकड़ी वाले पोपलर, खैर, यूकेलिप्टस, सागौन वगैरह को मेंड़ों पर लगाते हैं और तीनों तरह के उत्पाद अनाज, फल और लकड़ी एक ही जगह पर हासिल हो जाते हैं। यह तकनीक पश्चिमी उत्तर प्रदेश, तराई व हरियाणा में काफी चलन में है।

फूल, कृषि व वानिकीः जो किसान कुछ नया करने की जुगत में रहते हैं। यह तकनीक उन के लिए बहुत कारगर है। इस की देखभाल मंे आने वाले कम खर्च व अधिक मुनाफे के कारण यह तकनीक सब से अच्छी है। इस में एक लगातार आमदनी का साधन बन जाता है। कम जगह और लागत में ज्यादा फायदा होता है। फलफूल अनाज और लकड़ी एक ही जगह पर मिलते हैं। फूल होने से मधुमक्खी पालन कर के अलग काम कर सकते हैं।
इस के तहत किसान फलदार व लकड़ी के पेड़ों के साथ लिली, ग्लैडिओलस, गुलाब, रजनीगंधा वगैरह फूलों की खेती करते हैं।

सब्जी वानिकीः इस तकनीक में अनाज वाली फसल की जगह पर सब्जी की फसल जैसे बैंगन, मिर्च, गोभी, भिंडी वगैरह को लगाया जाता है। लकड़ी के लिए पोपुलर, सागौन, यूकेलिप्टस वगैरह के पेड़ लगाए जाते हैं। इस तरह की खेती शहरों के नजदीक करने पर सब्जी को बाजार आसानी से पहुंचा सकते हैं।

मछली वानिकीः इस तरीके में तालाबों के किनारे पर पेड़ लगाए जाते हैं। तालाबों में रोहू, कतला, ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प वगैरह मछलियां पाली जाती हैं। यह तकनीक दक्षिणी राज्यों में बहुत पहले से इस्तेमाल की जा रही है। वहां तालाब के किनारे नारियल और केले के पेड़ लगाए जाते हैं।


पेड़ लगाने से तालाब के किनारे की मिट्टी का कटाव नहीं होता है। पेड़ों से पानी मंे गिरने वाली पत्तियां, फूल व फूल वगैरह मछलियों के भोजन में काम आते हैं।

किचन गार्डन वानिकीः इस तरीके को अपनाने से घर की खाली जगह में जरूरत के मुताबिक पेड़ों को चुनाव किया जाता है। जिस की देखभाल घर के लोगों द्वारा की जाती है।

इस में किसान अपने घर के पास खाली जगह पर आम, जामुन, पपीता, नीबू, अमरूद, सहजन, नीम, गूलर, बांस वगैरह के पेड़ लगाते हैं और खाली जमीन पर सब्जियां उगा लेते हैं। उन के घरों के आसपास छाया व पशुओं के बांधने के लिए अच्छी जगह मिल जाती है और घर के लिए सब्जियां मिलती हैं।

चारागाह वानिकीः यह तरीका बेकार जमीन के विकास व चारे की समस्या के निबटारे के लिए अपनाया जाता है। चारे की समस्या को देखते हुए इस तकनीक के तहत गूलर, सहजन, खैर, नीम, विलायती बबूल, कंजी, यूकेलिप्टस, देशी बबूल वगैरह पेड़ लगाए जाते हैं। पशुओं के लिए चारा मुहैया कराने के लिए घास व दलहनी पौधे वगैरह को उगाया जाता है।


कृषि वानिकी के फायदे
खेत का पूरा इस्तेमाल कर ज्यादा से ज्यादा और कई तरह के उत्पाद हासिल कर सकते हैं।
अनाज की पैदावार बढ़ा सकते हैं और पेड़ को बेच कर अच्छा पैसा कमा सकते हैं।
खेत में ही चारा, ईंधन, इमारती लकड़ी, कुटीर व लघु उद्योगों के लिए कच्चा माल मुहैया कर सकते हैं।
ईंधन की लकड़ी मिलने से गोबर का इस्तेेमाल खाद के लिए कर सकते हैं और खाद पर होने वाले खर्च को बचा सकते हैं।
पेड़ लगाने से मिट्टी में सुधार होता है और पैदावार बढ़ती है, मिट्टी कटाव की समस्या हल होती है।
खेत में लगाए पेड़ जरूरत के समय आप को पैसा दिलवा सकते हैं।
बाढ़, सूखा, ज्यादा बारिश वगैरह से फसल को नुकसान पहुंचने पर या फसल ज्यादा होने के कारण मूल्य में कमी आने पर अपने खेत के पेड़ों को बेच कर नुकसान की भरपाई कर सकते हैं।

पेड़ लगा कर हम आबोहबा और कुदरती जंगलों को भी बचाते हैं।
जिस तरी भविष्य के लिए हम बैंक में अपने पैंसों की एफडी (फिक्स्ड डिपोजिट) करवाते हैं, उसी तरह पेड़ को भी हम एफडी के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। कई गांवों में तो इस तरह के प्रयोग हो रहे हैं, गांव में बेटी पैदा होने पर उस के नाम से 11 या 21 पेड़ लगा दिए जाते हैं, जब तक बेटी हो कर शादी लायक होती है तब तक पेड़ भी बड़े हो कर लाखों रुपए के हो जाते हैं, जिन्हें बेच कर ब्याहशादी धूमधाम से की जा सकती है।

पेड़ लगाते समय रखे ध्यान
कृषि वानिकी के तहत लगाए जाने वाले पेड़ों में इन बातों का ध्यान रखना चाहिए कि पेड़ तेजी से बढ़ने वाले हो, जिस से आप अपने फायदे के लिए उन से कम समय में ही उपज हासिल कर सके।
सीधे तने, कम शाखाओं और कटाईछंटाई सहने वाले पेड़ों को ही चुनाव चाहिए।
खेत में लंबी जड़ों वाले पेड़ों को उगाना बहुत फायदेमंद होता है। लंबी जड़ें जमीन में जा कर नीचे से पोषक तत्व ऊपर लाती हैं, जो फसलों के लिए फायदेमंद होते हैं। पेड़ों की मूसला जड़ों की बढ़त इस तरह हो कि वे पानी से खनिज लवणों को लेने व फसलों की जरूरत के साथ तालमेल बना सकें।


कृषि वानिकी के तहत द्विदलीय बीज वाले (ऐसा बीज जिस के 2 हिस्से हों, जैसे दाल) पेड़ को उगाता ज्यादा फायदेमंद है, क्योंकि ऐसे पेड़ हबा से नाइट्रोजन ले कर जमीन में जमा करते हैं।

 

Read all Latest Post on खेत खलिहान khet khalihan in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें
Title: how to make money with agri business in Hindi  | In Category: खेत खलिहान khet khalihan

Next Post

फसलों में जान डालता थायोयूरिया

Sat Jun 25 , 2016
भारत में उगाई जाने वाली तिलहनी फसलों में सरसों की खास जगह है। केरल को छोड़ कर सरसों की खेती पूरे देश में की जाती है। तमाम खोजबीनों से यह पता चला है कि सरसों खराब हालात में भी उगाई जा सकती है। सरसों की खेती के मामले में राजस्थान […]
lllllllllllll

All Post


Leave a Reply