खेत खुद अपनेआप में बड़ी प्रयोगशाला और नई गुंजाइशों से भरा आधार होता है। खेत में की गई एक नई पहल किसी बड़े कारोबार और उद्योग को जन्म दे सकती है। टर्फ घास इस का एक अच्छा उदाहरण है।

लाखों घरों के मालिकों, हजारों एथलेटिक मैदानों के प्रबंधकों, लैंडस्कोप डिजाइनरों, पार्कों, खेल के मैदानों वगैरह को मिला कर एक उद्योग जो तेजी से पनप रहा है वह है टर्फ घास उद्योग
देश की जनता का पेट भरने वाला अनाज, फल और सब्जी अभी ठीक से से उद्योग का दर्जा हासिल नहीं कर पाए हैं, लेकिन एक खरपतवार यानी जिसे फसलों का दुश्मन माना जाता है, वही घास बड़ा और अंतर्राष्ट्रीय उद्योग बन कर अपनी फितरत के मुताबिक तेजी से बढ़ रही है।

घास को कालीन का रूप दे कर उसे टर्फ घास का नाम दिया गया है। यह टर्फ घास आज लाखों घरों की सुंदरता बढ़ा रही है। यह घास 7 लाख से भी ज्यादा खेल के मैदानों में खिलाड़ियों को एक मजबूत और सुंदर आधार दे रही है।
हजारों बीज निर्माता और खेती के विभिन्न कामधंधों से जुड़े लाखों लोगों को इसी घास की बदौलत आर्थिक अवसर मिल रहे हैं।
इन सब के अलावा यह हरीभरी और मखमली टर्फ घास लाखों मील लंबे रास्तों, हजारों हवाई अड्डों के रनवे को धूल वगैरह से बचा कर उन पर चलने वालों को सुरक्षा मुहैया करवा रही है। साथ ही, यह हमें शारीरिक और मानसिक रूप से भी तंदुरूस्त रखने का काम कर रही है। इस तरह इतने सारे लोग किसी न किसी तरह इस ‘हरित उद्योग’ से जुड़े हुए हैं।

कुल मिलाकर टर्फ घास हमारी आबोहबा को महफूज रखने, जमीनी पानी का स्तर बढ़ाने और पानी व हवा को शुद्ध रखने के साथ लोगों को रोजगार मुहैया कराने के नए अवसर दे रही है।
तकरीबन 50 घासों को टर्फ घास के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा रहा है। अगर अकेले अमेरिका की बात की जाए तो यहां गोल्फ कोर्स बनाने और उन के रखरखाव, खेल के मैदान, पार्क, घरों के लान, सड़क के किनारे, व्यावसायिक संस्थान, अस्पताल और न जाने क्या-कया, में 40 से 60 बिलियन डाॅलर सालाना की टर्फ घास इंडस्ट्री पनप रही है।

अमेरिका में ही टर्फ घास का रकबा 50 मिलियन एकड़ है, जिस में से 31 मिलियन एकड़ रकबा सिंचित है। यहां टर्फ घास चैथी सब से बड़ी फसल है और सिंचित फसलांे में सब से बड़ी फसल है।
अगर अमेरिका के मैरीलैंड, पेनसिलवेनिया, फ्लोरिडा, न्यूजर्सी और नार्थ केरोलिना जैसे राज्यों की बात की जाए, तो यहां टर्फ घास पहले या दूसरे नंबर का कृषि उत्पाद है।
एशिया पेसिफिक रिजन के देश सिंगापुर, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, हांगकांग, भारत, जापान, कोरिया, मलेशिया, फिलीपंस, ताईवान, थाईलैंड और वियतनाम की बात करें तो यहां भी टर्फ घास उद्योग विभिन्न मौसमों के मुताबिक पनप रहा है।
दक्षिणी कोरिया में 3 हजार हेक्टेयर में तकरीबन 9 लाख अमेरिकी डाॅलर और चीन में 10 हजार हेक्टेयर में 10 लाख डाॅलर का कारोबार इसी टर्फ घास इंडस्ट्री के तहत हो रहा है।

टर्फ घास के इसी महत्व को ले कर कई देशों में टर्फ घास पर बड़ी ही गहनता से रिसर्च हो रही है। कुछ विश्वविद्यालय तो टर्फ घास पर रिसर्च और प्रबंधन पर डिग्री कोर्स भी करवा रहे हैं।

पेनसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी, एथेंस की यूनिवर्सिटी आफ जार्जिया, कोलबंस स्थित औहियो स्टेट यूनिवर्सिटी, मिशगन स्टेट यूनिवर्सिटी, टैक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी समेत विभिन्न देशों की 2 दर्जन से ज्यादा यूनिवर्सिटी टर्फ घास से जुड़े कोर्स और उस की रिसर्च करवा रही है।

भारत में टर्फ घास की बात करें तो यहां साल 2010 में दिल्ली में हुए काॅमनवेल्थ गेम्स के दौरान टर्फ घास चर्चा में आई। विदेशों से जुड़े खिलाड़ियांे और मेहमानों को अच्छा खेल का मैदान और खूबसूरत वातावरण मुहैया कराने के मकसद से टर्फ घास पर जोर दिया गया।
यहां आईसीएआर के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली, हिमाचल प्रदेश के सोलन की डा. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी और तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय में टर्फ घास पर रिसर्च का काम चल रहा है। नई दिल्ली के आईएआरआई में पहली बार 2 छात्र टर्फ घास पर पीएचडी कर रहे हैं।

हमारे यहां टर्फ घास पर इतना ध्यान देने की जरूरत क्यों पड़ रही है, तो इस के पीछे तर्क है कि लोगों की जीवनशैली और उन की सोच में बदलाव ने टर्फ घास की अहमियत बढ़ा दी है।
बढ़ता शहरीकरण, नई कालोनी और भवनों का विस्तार, शहरों और गांवों को सुंदर बनाने की जरूरत, लोगों का मनोरंजन और खेलों के प्रति रुझान, मिट्टी कटाव को रोकने की जरूरत, खूबसूरती को ले कर लोगों में बढ़ती सोच, स्वस्थ वातावरण के प्रति सजगता और खेल के मेदानों में घास की उपयोगिता के चलते टर्फ घास की अहमियत बढ़ी है और इस के विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही है।
लेकिन टर्फ घास पर काम किया जाए तो कैसे किया जाए, काम कहां से शुरू हो और कौन-कौन से पहलुआंे में काम किया जाए, इस पर वैज्ञानिकों का कहना है कि जो काम किसी एक फसल के लिए जरूरी होते हैं, वे सब काम टर्फ घास में भी होने चाहिए, मसलन
टर्फ घास के लिए खास देखभाल और रखरखाव प्रबंधन
टर्फ घास के लिए अच्छे स्तर का उर्वरक प्रबंधन,
लान या मैदान के लिए सिंचाई तकनीक का विकास
नए या पुराने लान की घास के लिए खरपतवार व कीट प्रबंधन
समंवित टर्फ मैनेजमेंअ सिस्टम का विकास करना
कम तापमान यानी सुप्त अवस्था में भी टर्फ घास के विकास को बढ़ावा देने की तकनीक ईजाद करना

टर्फ घास के लिए रोग प्रबंधन
पर्यावरण में टर्फ घास के रोल को बढ़ावा देना वगैरह
इन के अलावा हमारे देश की आबोहबा के मुताबिक टर्फ घास की वैरायटियां ईजाद करना, इन सब कामों में अहम है। इस के तहत ये काम किए जाने हैं।
टर्फ घास के जर्म प्लाज्म को इकट्ठा करना, उस की सुरक्षा व विस्तार का काम करना।
अलग-अलग इस्तेमाल और आबोहबा के मुताबिक वैरायटी तैयार करना।
पूरे साल उगने वाली वैरायटी तैयार करना
अलग-अलग मिट्टियों में पनपने वाली वैरायटी खोजना
बीमारियां सहन कर सकने वाली किस्में तैयार करना
ऐसी किस्में तैयार करना जो पैदल लोगों के दबाव या भारी तनाव को सहन कर सकें।
किसी समय टर्फ घास इंडस्ट्री को हिंडन एग्रीकल्चर्ल इंडस्ट्री यानी कृषि का दबाछिपा उद्योग कहा जाता था, क्योंकि इसे अन्य कृषि उत्पादों के साथ या उन की तरह कभी पेश नहीं किया गया, लेकिन अब पार्क, गोल्फ कोर्स, खेल के मैदान बढ़ने से टर्फ घास की मांग बढ़ी है। इस उद्योग ने दुनियाभर के किसानों के सामने लाखों करोड़ों रुपए के कारोबार खोल कर रख दिए हैं। भारत के किसानों और बेरोजगारों नौजवानों के लिए भी इस में ढेर सारे मौके हैं।
एक अच्छा लौन किसी धान के खेत से 6 गुना और गेहूं के खेत से 4 गुना ज्यादा बारिश का पानी इकट्ठा करने की कूवत रखता है। टर्फ घास की जड़ें मिट्टी की जैविक गतिविधियों को बढ़ा देती है।

घास के मैदान में टहलने से शारीरिक कूवत बढ़ने के साथ मानसिक शांति भी मिलती है।
इस तरह की एक छोटी सी घास वह सारे काम करती है जो उस के घास होने के कारण हम कभी देख नहीं पाते हैं। अगर हमें पर्यावरण के साथ विकास की सोच को साकार करना है तो उस में टर्फ घास एक बहुत बड़ा और मजबूत आधार है, इस लिए भारत की खेती एक आधुनिक खेती की तरफ कदम बढ़ा रही है। जहां शिक्षा, खोज, रोजगार, आमदनी और कुछ नया करने के विचारों की धरातल पर टर्फ घास का बीज रोपा जा रहा है।

 

Read all Latest Post on खेल sports in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और ट्विटर पर ज्वॉइन करें