• 12 हजार,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित हैं बीओपी
  • यूटीडीबी के सहयोग से आईटीबीपी की एक विशेष व्यवस्था है
  • संस्थान में वाटर रेस्क्यू और जीवन रक्षा प्रशिक्षण भी संचालित

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (एजेंसी)। युवा मामले, खेल, आयुष और अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरेन रिजिजू उत्तराखंड के दौरे पर हैं। उनका निलोंग घाटी में स्थित बॉर्डर आउट पोस्टों पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों से मिलने का कार्यक्रम है। भारत-चीन सीमा की रखवाली के लिए ।टीबीपी की ये बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) 12 हजार,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित हैं।

रिजिजू गुरुवार को इन्हीं में से एक बीओपी में रात्रि विश्राम करेंगे। आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडेय के अनुसार, मंत्री निलोंग और नागा बीओपी में हिमवीरों से मिलेंगे। आईटीबीपी के जवानों को बर्फानी परिस्थितियों में तैनात रहने के लिए जाना जाता है इसलिए इन्हें हिमवीर कहते है। इस दौरे में आईटीबीपी के डीजी एसएस देसवाल और एडीजी एमएस रावत मंत्री के साथ हैं।जवानों के साथ बातचीत के दौरान, रिजिजू ने कठिन इलाकों और विपरीत मौसमी परिस्थितियों में राष्ट्र को समर्पित सेवाओं के लिए आईटीबीपी कर्मियों की सराहना की।

जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए रिजिजू ने कहा कि आईटीबीपी के जवान अपने हाई जोश, पेशेवराना अंदाज तथा उच्च स्तरीय शारीरिक फिटनेस के लिए जाने जाते हैं, जो अद्वितीय है। 16 अप्रैल को मंत्री रिजिजू आईटीबीपी के टिहरी स्थित वाटर स्पोर्टस और साहसिक संस्थान (डब्ल्यूएसएआई) के उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे। यह संस्थान उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (यूटीडीबी) के सहयोग से आईटीबीपी की एक विशेष व्यवस्था है।

वहां यह बल अगले 20 वर्षों के लिए संस्थान का संचालन करेगा और सीएपीएफ और अन्य सहयोगी बलों के कर्मियों व देश के युवाओं के लिए प्रशिक्षण चलाएगा। यह देश में अपनी तरह का पहला और विशेष संस्थान है ,जहां एयरो, वाटर एंड लैंड से संबंधित खेलों और साहसिक खेलों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां पर कयाकिंग, रोइंग, कैनोइंग, वाटर स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग, पैरासेलिंग, स्कूबा डाइविंग, पैडल बोटिंग, स्पीड बोटिंग, काइट सर्फिंग, जेट स्कीइंग आदि का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

संस्थान में वाटर रेस्क्यू और जीवन रक्षा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। 1962 में गठित आईटीबीपी को मुख्य रूप से भारत-चीन सीमाओं की रक्षा के लिए तैनात किया गया है, जिसकी ज्यादातर बीओपी हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित हैं।

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