फिल्म समीक्षा मनोरंजन

1921 : डराती कम है और हँसाती ज्यादा

2008 में आई हॉरर जोन की फिल्म 1920 आज भी लोगों के दिमाग में बसीं हुयी हैं और शायद यही कारण है कि 1920 जैसी सफलता दुबारा पाने के लिए ही विक्रम भट्ट अब इसकी चौथी कड़ी के रूप में 1921 लेकर आये हैं | इससे पूर्व 1920 रिटर्नस और 1920 लन्दन लेकर आये थे |  इस फिल्म के लेखन से लेकर निर्माता-निर्देशक की भूमिका खुद विक्रम भट्ट ने ही निभाई है, जबकि 1920 लन्दन में लेखन-निर्माता और 1920 रिटर्नस में सिर्फ लेखन की बागडोर इनके हाथो में थी |

खैर साल 2018 में बॉलीवुड ने अपनी शुरुआत एक हॉरर जोन की फिल्म 1921 से की है | फिल्म का फर्स्ट डे फर्स्ट शो हाउसफुल या भीड़-भाड से भरा हुआ था | कुछ लोग हॉरर फिल्म का लुत्फ लेने गए थे तो कुछ ज़रीन खान के कामुक दृश्य देखने, मगर अफ़सोस दोनों ही खुद को ठगा हुआ पाते हैं | न तो फिल्म पूरी तरह से हॉरर ही और न ही कामुकता से भरी हुयी |

फिल्म की कहानी आयुष (करण कुंद्रा) की है, जो कि एक पियानो आर्टिस्ट है। फिल्म को फिल्म के टाइटल के अनुरूप 1921 के ढांचे में ढाला गया है । मिस्टर वाडिया आयुष को अपने ब्रिटेन स्थित घर का केयरटेकर बना उसे वहां भेजते है । ब्रिटेन स्थित घर में पहुँचने के बाद आयुष के साथ अजीब अजीब घटनाएं घटित होने लगती है । फिल्म का दूसरा मुख्य किरदार अनाथ लड़की रोजी है, जो आयुष की फैन है | रोजी के अंदर एक अद्भुत शक्ति है, जिसके चलते वो रूहों को देख सकती है। आयुष मदद के लिए रोजी के पास जाता है और रोजी भी उसकी मदद करने के लिए तैयार हो जाती है, जिसके बाद कुछ दृश्य आपको चौका देंगे तो कुछ दृश्य हॉरर होने के बाद भी आपको हँसने पर मजबूर कर देंगे | फिल्म का अंत बताने की जरुरत नहीं है, यदि आपे इस सीरीज के पहले तीन भाग देखे है तो आप आसानी से इस कहानी का अंत सोच सकते है |

करण कुंद्रा और ज़रीन खान ने बेहद ही रूटीन तरीके से अपने किरदारों को निभाया है, जबकि करण के पास एक मौका था खुद को साबित कर बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने का । कई बार इन दोनों की ओवर ऐक्टिंग इस कदर बढ़ जाती है कि डरने के बजाय हँसी आ जाती है |

कुल मिलकर अगर ये कहा जाए कि इस फिल्म को सिनेमा हॉल पर देखने के बजाय घर पे देखे तो कोई गलत नहीं होगा |

 

 

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Title: 1921 hindi movie review in Hindi  | In Category: फिल्म समीक्षा movie_review

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