• आयुष्मान खुराना की शुभमंगल सावधान खींच रहीं है दर्शकों का ध्यान
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने की आयुष्मान खुराना की फिल्म की तारीफ
  • आयुष्मान अपनी फिल्मों में गंभीर मुद्दों को चुटीले अंदाज में पेश करते हैं
  • शुभमंगल सावधान में आयुष्मान निभा रहे हैं एक गे का किरदार

लगातार कई सुपरहिट फिल्में देकर बॉलीवुड में खुद को साबित करने वाले आयुष्मान खुराना की नयी फिल्म शुभ मंगल ज्यादा सावधान सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। समलैंगिकता जैसे गंभीर विषय पर बनी ये लाइट कॉमेडी फिल्म दर्शको का ध्यान खीचने में कामयाब रही है । ऐसे में उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरन अपनी कामयाबी और संघर्ष की दास्ताँ बयान की।

जब उनसे पूछा गया कि शुभ मंगल ज्यादा सावधान में गे के किरदार को निभाने के लिए उन्होंने क्या-क्‍या तैयारियां की, तो आयुष्मान ने बताया कि वो इस फिल्म में होमोसेक्शुअल गे अभिनय कर रहे हैं जिसके लिए ये जानना जरुरी था कि हकीकत में ऐसे लोगों को किन किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस बात को ऑब्जरवेशन करना बेहद जरुरी था, जो उन्होंने किया। चूँकि इस तरह के लोग हर जगह हैं, चाहे वो कॉर्पोरेट सेक्टर हो या सिनेमा ।

जब आयुष्मान से उनके किरदारों के चयन को लेकर पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि उनके लिए स्क्रिप्ट हमेशा दो लोग पढ़ते हैं जो कि उनकी वाइफ और मैनेजर है । इसके बाद आपस में चर्चा करते है चूँकि वो प्रोग्रेसिव फैमिली से है अत: उनके इस तरह के रोल करने में कोई दिक्कत नहीं आती। हालाँकि वो मानते है कि अंधाधुंध और आर्टिकल 15 जैसी फ़िल्में करने के लिए उन्हें ज्यादा तैयारी करनी पड़ती है ।

क्या शुभ मंगल ज्यादा सावधान संवेदनशील मुद्दे को ढंग से उठा पाएगी, सवाल उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये फिल्म यहीं सन्देश देती है कि उनको भी वैसे ही अपनाओ जैसे वे हैं क्योंकि गे होना कोई बीमारी नहीं है। आयुष्मान कहते है कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी समलैंगिकता पर मोहर लगा दी है । फिल्म को कॉमेडी के फ्लेवर में इसलिए रखा गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिल्म को देख सकें। पहले भी इस मुद्दे पर कई सीरियस फिल्में आ चुकी हैं जो कमर्शियली फ्लॉप रहीं अत: इसे कॉमेडी के फ्लेवर में डुबाया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा से लोग देख सकें।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी इस फिल्म की तारीफ की है इस मुद्दे पर आयुष्मान ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति का उनकी फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर रिएक्शन देना उनके लिए बहुत सरप्राइजिंग था। हालांकि ये भी सच है कि उन्होंने अभी तक ये फिल्‍म देखी नहीं है।

सामाजिक मुद्दों को लेकर भी आयुष्मान बोले उन्होंने कहा कि आर्टिस्ट और एक्टीविस्ट में सबसे बड़ा फर्क यही है कि एक आर्टिस्ट अपनी कला के जरिए अपनी बात सामने रख सकता है जबकि अगर वो एक्टिविस्ट के तौर पर कोई मोर्चा खोल दे तो 100 से हजार लोग इकट्ठा होंगे। हालाँकि फिल्म देखने वाले लोगों की संख्या ज्यादा होती है इसलिए आर्टिस्ट की ताकत एक्टिविस्ट से ज्यादा होती है। अत: किसी भी मुद्दे पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने से बेहतर है कि उन विषयों पर फिल्मने बनाकर अ[नी बात सबके सामने रखे ।

लाइफ में टाइम मैनेजमेंट को लेकर उन्होंने बताया कि यदि किसी का पैशन ही प्रोफेशन बन जाए तो टाइम मैनेजमेंट करना कोई बड़ी बात नहीं होती । पिछले साल उनके पास एक के बाद एक कई मूवी होने के चलते टाइम मैनेजमेंट शेड्यूल ज्यादा टाइट था परन्तु अब एक के बाद दूसरी फिल्म करने के लिए वो दो महीने का गैप रखने का प्रयास कर रहे है।

आयुष्मान बताते है कि उन्हें अचानक से सक्सेस नहीं मिली है जो कि अच्छा ही हुआ यदि एक दम से सफलता मिल जाती है तो रातोंरात सक्सेस मिलने से वो सिर पर चढ़ जाती है। 2012 में आई उनकी फिल्म विकी डोनर को वो अपनी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट मानते हैं ।

 

 

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