• कला और सिनेमा मनुष्य की मानसिकता बदलने का काम करते है

  • उनकी पिछली फिल्म समलैंगिक रिश्तों पर आधारित थी

मुंबई, 20 अप्रैल (एजेंसी)। बॉलीवुड में अपने अभिनय के दम पर पहचान बनाने वाले आयुष्मान खुराना ने सिनेमा की महत्ता को बताते हुए कहा कि कला और सिनेमा मनुष्य की मानसिकता को बदलने में कारगर साबित होती है । उनकी हाल ही में रिलीज फिल्म शुभ मंगल ज्यादा सावधान भी समाज की सोच को बदलने का प्रयास करती नज़र आती है। इससे पहले वो बधाई हो, आर्टिकल 15, बाला और शुभ मंगल सावधान जैसी फिल्मों में इसी तरह का प्रयास करते नज़र आये है ।

फिल्म शुभ मंगल ज्यादा सावधान के बारे में बात करते हुए आयुष्मान ने कहा कि यह फिल्म मेरे दिल के बहुत करीब है। समलैंगिक रिश्ते को बहुत पहले से ही वैद्य किया जा चुका है, हालांकि मेरा मानना है कि समाज द्वारा इसे स्वीकार कर लिए जाने के रास्ते में अभी हमें काफी लंबा सफर तय करना है।

उन्होंने आगे कहा कि शुभ मंगल ज्यादा सावधान भारत में व्याप्त समलैंगिक रिश्तों को लेकर मौजूद पूर्वाग्रहों की वास्तविकता का एक सारांश मात्र है और यह इस तरह की असाधारण कहानियों को आगे लाने का एक प्रयास भी है। मेरे ख्याल से, कला और सिनेमा मानसिकता को बदलने में काफी कुछ कर सकती हैं। इस फिल्म के साथ हमारा मकसद बस यही था कि भारत में समलैंगिक रिश्तों को लेकर बातचीत शुरू हो।

हितेश केवल्या द्वारा निर्देशित इस फिल्म का प्रसारण 18 अप्रैल को अमेजन प्राइम वीडियो पर किया गया है। इस पर आयुष्मान ने कहा कि मैं इस फिल्म का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं और अमेजन प्राइम वीडियो पर इसके डिजिटली प्रसारण को लेकर बेहद उत्साहित हूं, जहां यह दुनिया भर के दर्शकों के बीच अपनी पहुंच बना पाएगी।

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