ब्लैकएंड वाइट फिल्में जो आज भी आपका मन मोह लेंगी

Best Black & White Old Hindi Movies From Bollywood

Best Black & White Old Hindi Movies From Bollywood

आज से करीब सौ वर्ष पहले दादा साहेब फालके (Dada saheb phalke) उर्फ (धुंडिराजगोविन्दफालके) ने 1912 में अपनी पहली ‘मूक’ फिल्म बनाई जिसका नाम था ‘हरिश्चंद्र’ (Harishchandra)। यह भारत की पहली फीचर फिल्म थी। इस फिल्म को बनाने में दादा साहेब ने करीब 15 हजार रुपए खर्च किए जो उस जमाने में एक मोटी रकम मानी जाती थी। धीरे-धीरे वक्त बदलता गया और मुंबई की वो फिल्म नगरी संसार भर में आज बॉलीवुड (Bollywood) के नाम से मशहूर हो गई। बॉलीवुड (Bollywood) में वक्त के साथ-साथ जहां एक ओर फिल्मों का बजट बढ़ता गया वहीं फिल्मों के प्रॉडक्शन के तौर-तरीकों में भी काफी बदलाहट आई। आज कंप्यूटर (Computer) के युग में जहां बेमिसाल वीएफएक्स्, शानदार थ्रीडी और 4डी सिनेमा चलन में हैं वहीं कुछ ब्लैंक एंड वाइट फिल्में (Black & White) ऐसी हैं जो आज भी दर्शकों का मन-मोह लेती हैं। खुलासा डॉट इन’ में हम आज ऐसी ही कुछ फिल्मों की चर्चा करेंगे, जो बीतते वक्त के साथ-साथ दर्शकों के दिलो-दिमाग पर आज भी अपना असर वैसे ही बनाए हुए हैं और कोई भी दर्शक इन फिल्मों को बार-बार देखने से अपने आप को नहीं रोक पाता।

 महल (1949) Mahal (1949)

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Poster of Mahal_movie

सन् 1949 में आई ‘महल’ (Mahal Movie 1949) पुनर्जन्म की कहानी पर बनने वाली पहली भारतीय फिल्म थी, जो उस जमाने में सुपरहिट साबित हुई। फिल्म का निर्देशन कमाल अमरोही (Kamaal amrohi) ने किया था। फिल्म में अशोक कुमार (Ashok Kumar) और मधुबाला (Madhubala) मुख्य भूमिकाओं में नजर आए।


फिल्म में (अशोक कुमार) एक ऐसे युवा वकील हरिशंकर के रूप में नजर आएं हैं जो अपने पिता द्वारा खरीदी एक हवेली में रहने आता है हवेली के बारे में एक कहानी है कि ये एक असफल प्रेमी जोड़े की हवेली है जिनकी मौत चालीस साल पहले हो गई है।

फिल्म के नायक हरिशंकर को एक अनजान औरत (मधुबाला) का साया अपनी ओर आकर्षित करता है। जैसे-जैसे फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है अशोक कुमार (Ashok kumar) और मधुबाला (Madhubala) की खूबसूरत अदाकारी दर्शकों का मन मोह लेती है।

फिल्म का सस्पेंश और थ्रिल अंत तक दर्शकों को बांधे रखता है। कहा तो ये तक जाता है कि बॉलीवुड (Bollywood) में सस्पेंश थ्रिलर फिल्मों (Sespense thriller movies)  की शुरुआत इसी फिल्म से हुई। बताया जाता है कि मशहूर निर्देशक बिमल राय (Bimal roy) इस फिल्म में मुख्य एडिटर (Editor) के तौर पर काम कर रहे थे। ‘महल’ के निर्माण के दौरान वो इतना प्रभावित हुए कि पुर्नजन्म को लेकर उन्होंने 1958 में ‘मधुमति’ (Madhumati) बनाई। बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा माला सिन्हा के बारे में रोचक तथ्य (Interesting facts actress Mala sinha in hindi)

फिल्म में लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) द्वारा गाया ‘आएगा आने वाला’ (aayega aanewala song) गीत बहुत प्रसिद्ध हुआ। जिसके बाद लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) को बॉलीवुड में खूब सफलता मिली। बताया जाता है कि जब खेमचंद प्रकाश (Khemchand Prakash) ने इस गीत की धुन बनाई तो दोनों निर्माताओं की गीत को लेकर राय अलग अलग थी।

जहां एक ओर सावक वाचा (Savak vacha) को गीत की धुन पंसद नहीं आई थी वहीं दूसरी ओर अशोक कुमार (Ashok Kumar) को यह धुन बहुत पंसद आई थी। बहरहाल काफी हील हुज्जत के बाद गीत को फिल्म में ले लिया गया मगर गलती से गीत के रिकॉड पर गायिका का नाम कामिनी छप गया। कामिनी फिल्म में नायिका (मधुबाला) का नाम था। जब फिल्म रिलीज हुई तो यह गीत इतना मशहूर हुआ कि रेडियो पर श्रोताओं के ढेरों पत्र कामिनी के नाम से आने लगे। इसके बाद एचएमव्ही रेडियो पर जानकारी दी गई कि गीत की गायिका कामिनी नहीं लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) हैं। कहा जाता है कि इस गीत के बाद लता मंगेशकर बॉलीबुड (Bollywood) में रातों-रात प्रसिद्ध हो गईं।

Mahal [1949] – Full Movie | Ashok Kumar, Madhubala | Movies Heritage

 

दो बीघा जमीन (1953) Do Bigha Zameen (1953)

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बॉलीवुड की मशहूर फिल्म दो बीघा जमीन (Do Bigha Zameen (1953)) का पोस्टर

भारतीय समानांतर सिनेमा के प्रारंभ में बनने वाली महत्वपूर्ण फिल्मों में ‘दो बीघा जमीन’ (Do Bigha Zameen) का नाम भी शामिल है। फिल्म का निर्देशन जहां एक ओर मशहूर निर्देशक बिमल रॉय (Bimal Roy) ने किया था वहीं दूसरी ओर उस दौर के मशहूर कलाकार बलराज साहनी (Balraj Sahni) और निरुपा रॉय (Nirupa Roy) फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में नजर आए।

बताया जाता है कि भारतीय किसानों की दुर्दशा पर बनी इस फिल्म को हिन्दी की महानतम फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म की कहानी संगीतकार सलिल चौधरी (Salil Chowdhury) ने लिखी थी। इटली के नव यथार्थवादी सिनेमा से प्रेरित विमल दा की ‘दो बीघा जमीन’ (Do Bigha Zameen) एक ऐसे गरीब किसान की कहानी है जो जमींदार के पास गिरवीं पड़ी अपनी जमीन को छुड़ाने के लिए अपने बेटे के साथ शहर चला जाता है, जहां शहर में वह रिक्शा खींचकर रुपए कमाता है जिससे वह गिरवीं पड़ी जमीन छुड़ा सके।


गरीब किसान की भूमिका में बलराज साहनी (Balraj Sahni) ने इस फिल्म में शानदार अभिनय किया है। बताया जाता है कि पहले पहल विमल राय (Bimal Roy) को इस पर भरोसा नहीं था कि लंदन से लौटे (अंग्रेज) बलराज साहनी (Balraj Sahni) वास्तव में किसान शम्भू की भूमिका को सही तरीके से कर पाएंगे, लेकिन बलराज साहनी ने इस फिल्म में अपने किरदार के साथ पूरी तरह से इंसाफ करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। वे कई कई दिनों तक भूखे रहे और उन्होंने बहुत सा वक्त रिकशा चालकों के बीच बिताया जिससे वे गरीब किसान शंभू के किरदार पूरी शिद्दत के साथ निभा सकें।

ये अलग बात है कि व्यावसायिक रूप से ‘दो बीघा जमीन’ (Do Bigha Zameen) बहुत सफल फिल्म नहीं रही लेकिन इस फिल्म ने बिमल राय (Bimal Roy) को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पहचान दी। दो बीघा जमीन के लिए बिमल राय को ‘कांस फिल्म महोत्सव’ (Cannes film festival) और ‘कार्लोवी वैरी फिल्म महोत्सव’ में पुरस्कार मिले। इसी फिल्म ने हिन्दी सिनेमा में बिमल रॉय को एक मजबूत मुकाम पर पहुंचा दिया। दो बीघा जमीन के लिए ही पहली बार निर्देशक के तौर पर बिमल रॉय को पहला फिल्म फेयर अवार्ड (Filmfare award) भी मिला।

दो बीघा ज़मीं | Do Bigha Zamin (1953) | Balraj Sahni Movies | Nirupa Roy Movies | Meena Kumari

 


 

बूटपॉलिश 1954, Boot Polish (1954)

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बूट पॉलिस Boot Polish (1954) फिल्म का पोसटर

1954 में बनी बूट पॉलिश (Boot Polish) दो ऐसे गरीब बच्चों की कहानी है जो अपनी जिंदगी को सम्मान से जीने के लिए बूट पॉलिश (Boot Polish) का काम अपनाते हैं। फिल्म में डेविड (David) और बेबी नाज (Baby Naaz) ने अभूतपूर्व अभिनय किया है। राजकपूर (Rajkpoor) द्वारा निर्मित बूट पॉलिश (Boot Polish) का निर्देशन प्रकाश अरोड़ा (Prakash Arora) ने किया था। इस फिल्म को बेस्ट फिल्म के फिल्मफेयर अवार्ड से भी नवाजा गया था।

बूट पॉलिश (Boot Polish) भोला और बेलू दो ऐसे भाई बहन की कहानी है जिनकी मां की मौत हो चुकी है और पिता जेल में बंद है। मजबूरी वश इन बच्चों को अपनी चाची के पास रहना पड़ता जो इन बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर करती है और उसकी बात न मानने पर बच्चों को मारती पीटती है और भला बुरा कहती है।


फिल्म में डेविड (David) जॉन चाचा के किरदार में नजर आया है। वैसे तो जॉन चाचा अवैध शराब का कारोबार करता है पर इन बच्चों का भीख मांगना उसे पंसद नहीं आता है वह बच्चों को भीख मांगना छोड़कर इज्जत से जिंदगी जीने की सलाह देता है, बच्चे जॉन चाचा की बात मानकर बूट पॉलिश (Boot Polish) का सामान खरीदते हैं और बूट पॉलिश का धंधा शुरू करते हैं। डेविड (David) को इस फिल्म में जॉन चाचा के किरदार के लिए बेस्ट सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाजा गया। इस फिल्म का एक गीत नन्हें मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है (nanhe munne bachche teri mutthi mein kya hai)  इतना सफल हुआ कि आज भी लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है।

Boot Polish 1954 Full Movie | Raj Kapoor | Classic Bollywood Full Movie | Movies Heritage

 

 

जागते रहो (1956) Jaagte Raho (1956)

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राजकपूर अभिनीत फिल्म जागते रहो (Jagte Raho) का पोस्टर

1956 में बनी जागते रहो (Jagte Raho), सभ्य समाज के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है। जागते रहो को अगर एक कालजयी फिल्म कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। राजकपूर (Rajkapoor) ने इस फिल्म में ऐसा अभिनय किया जो उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुआ।

फिल्म में राजकपूर (Rajkapoor), नर्गिस (Nargis), मोतीलाल (Motilal), प्रदीप कुमार (Pradeep Kumar) सुमित्रा देवी (Sumitra Devi) और सुलोचना चटर्जी मुख्य भूमिका में नजर आए।  1956 में बनी इस फिल्म के निर्देशक सोम्भू मित्रा और अमित मित्रा थे।

फिल्म के संगीतकार सलिल चौधरी थे। फिल्म एक ऐसे गरीब की कहानी है जो अच्छे जीवन की तलाश में शहर आता है और फिर प्यास से बेहाल होकर जब एक घर में घुसता है तो लोग उसे चोर समझकर मारने लगते हैं। इस फिल्म में राजकपूर का शानदार अभिनय आज तक याद किया जाता है। इस फिल्म के एक गीत में मोतीलाल (Motilal) शराब के नशे में जिंदगी ख्वाब है ख्वाब में गाते हुए परदे पर आते हैं मोतीलाल (Motilal) का इस फिल्म में यह स्टाइल दर्शकों ने खूब पंसद किया। इस फिल्म ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार जीते और अरसा बीत जाने के बाद आज भी सिने प्रेमियों के दिलों पर राज कर रही है।

Jagte Raho (1956) Hindi Classical Full Movie || Raj Kapoor, Nargis || Bollywood Old Movies

 

प्यासा (1957) Pyaasa (1957),

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गुरुदत्त की फिल्म प्यासा (Pyaasa) जो उनके जीवन में मील का पत्थर साबित हुई

 

 

गुरुदत्त (Gurudutt) द्वारा निर्मित, निर्देशित और अभिनीत प्यासा 1957 (Pyaasa) में आई एक कल्ट क्लासिक मूवी (Cult classic movie) है।  समाज के छल कपट से क्रुद्ध एक नायक द्वारा अपने ही मौलिक अस्तित्व को नकार देना इस फिल्म में किसी भी आदमी की चरम हताशा को दर्शाता है।

इस फिल्म को विश्व प्रसिद्ध टाइम पत्रिका (Time Magazine) ने सर्वश्रेष्ठ रोमांटिक फिल्मों की सूची में पांचवा स्थान दिया है। इस फिल्म में माला सिन्हा (Mala Sinha), गुरुदत्त (Gurudutt), वहीदा रहमान (Vahida rehman), रहमान (Rahman), जॉनी वॉकर (Johnny Walker), कुमकुम (Kumkum), लीला मिश्रा (Leela Mishra), श्याम कपूर (Shyam Kapoor), महमूद (Mahmood), टुनटुन (Tun Tun) और मोनी चटर्जी (Moni chatterjee) मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं।

फिल्म की कहानी एक संघर्षरत कवि विजय की है जो अपनी रचनाओं को सही स्थान नहीं दिला पाता। न तो कोई प्रकाशक उसकी रचनाओं को छापते हैं और न ही उसके परिवार वाले उसकी लेखनी की कद्र करते हैं और आखिर एक दिन उसकी रचनाओं को एक कबाड़ी को बेच दिया जाता है।

संयोग से उसकी ये रचनाएं एक वेश्या जिसका नाम गुलाबो है खरीद लेती है। उधर अपनी गरीबी और परिवार के तानों से त्रस्त विजय घर बार छोड़कर जब सड‍़कों पर इधर उधर धक्के खाता घूम रहा होता है तो उसकी मुलाकात उसी वेश्या गुलाबो से होती है। प्यासा (Pyaasa) इसी विजय और गुलाबो की प्रेम पर आधारित एक प्रेम कहानी है। गुरुदत्त (Gurudutt) और वहीदा रहमान (Vahida Rehman) को प्यासा (Pyaasa) में अभूतपूर्व अभिनय के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

Pyaasa | Full Hindi Movie (HD) | Popular Hindi Movies | Mala Sinha – Guru Dutt – Waheeda Rehman

 

चलती का नाम गाड़ी (1958), Chalti Ka Naam Gaadi (1958)

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किशोर कुमार की फिल्म चलती का नाम गाड़ी (Chalti ka naam Gaadi) का पोस्टर

सन 1958 में किशोर कुमार द्वारा बनाई गई फिल्म चलती का नाम गाड़ी (Chalti Ka Naam Gaadi) एक कॉमेडी फिल्म थी। फिल्म में किशोर कुमार (Kishore Kumar) ने अपने दोनों भाइयों अशोक कुमार (Ashok Kumar) और अनूप कुमार (Anoop Kumar) के साथ जबरदस्त अभिनय किया। फिल्म की कहानी एक गाड़ी के चारों ओर घूमती है। फिल्म में ब्रजमोहन शर्मा अशोक कुमार अपने दो छोटे भाईयों मनमोहन किशोर कुमार और जगमोहन अनूप कुमार के साथ एक गैराज चलाते हैं।

ब्रजमोहन शर्मा औरतों को पंसद नहीं करते यहां तक कि अपने गैराज में किसी लड‍़की की फोटो तक लगाना उन्हें गंवारा नहीं है। एक दिन जब मनमोहन रात की शिफ्ट में गैराज पर काम कर रहा होता है तभी मधुबाला (Madhubala) गैराज पर आती हैं जिनकी गाड़ी खराब हो जाती है और थोड़ी नोंक झोंक के बाद किशोर कुमार उनकी गाड़ी तो ठीक कर देते हैं लेकिन पैसा लेना भूल जाते हैं, और जब किशोर कुमार (Kishore Kumar) अपना पैसा लेने मधुबाला (Madhubala) के पास जाते हैं तो न सिर्फ मधुबाला के प्रेम में गिरफ्तार हो जाते हैं बल्कि और कई तरह की मुसीबतें मोल ले लेते हैं।

फिल्म के अधिकतर गाने खुद किशोर दा (Kishore Kumar) और आशा भोंसले (Asha bhosle) ने गाए। फिल्म में संगीत दिया एसडी बर्मन (SD Burman) ने और गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी (Majrooh Sultanpuri) थे। फिल्म के सभी गाने उस दौर में खूब हिट हुए।

चलती का नाम गाड़ी (Chalti Ka Naam Gaadi) में अशोक कुमार, अनूप कुमार किशोर कुमार के अलावा मधुबाला, के एन सिंह, कुकु मौर्या, हेलन, वीना, मोहन चोटी, सज्जन आदि ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। बताया तो ये तक जाता है कि किशोर दा को विश्वास था कि यह फिल्म नहीं चलेगी और अपनी फिल्म् में मोटा घाटा दिखाकर इनकम टैक्स बचाने के लिए उन्होंने इस फिल्म का निर्माण किया, लेकिन उनकी आशा के विपरीत फिल्म को जबरदस्त सफलता मिली। इसलिए उन्होंने इस फिल्म् के सभी अधिकार अपने सेक्रेटरी अनूप शर्मा के नाम कर दिए थे।

Chalti Ka Naam Gaadi (1958) | B&W Hindi Movie | चलती का नाम गाड़ी | Kishore Kumar, Madhubala

 

लव इन शिमला (1960) Love In Simla (1960)

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जॉय मुखर्जी की फिल्म लव इन शिमला (Love in Simla) का पोस्टर

1960 में बनी लव इन शिमला (Love in Simla) जॉय मुखर्जी  (Joy Mukherjee) और साधना (Sadhna) द्वारा अभिनीत एक सदाबाहार रोमाटिंक फिल्म थी। फिल्म का निर्माण शशिधर मुखर्जी (Sashidar Mukherjee) ने अपने बैनर फिल्मालय प्रॉडक्शन हाउस के तहत किया।

फिल्म का निर्देशन आर के नायर (R K Nayyar) ने किया था। फिल्म की कहानी एक ऐसी लड‍़की की कहानी है जो अपने माता पिता की मौत के बाद अपने चाचा चाची के पास रहने के लिए आती है, जहां उसे अपने सामान्य रूप रंग को लेकर चाचा चाची और उनके बच्चों का तंज सहना पड‍़ता है और इन्हीं तानों और जली कटी बातों से तंग आकर वो एक दिन अपनी चचेरी बहन को चैलेंज देती है कि वो उसके प्रेमी को अपने प्रेम में फंसा लेगी ।

बताया जाता है कि इस फिल्म में नायक की भूमिका निभाने के लिए धमेन्द्र काफी प्रयासरत थे, मगर निर्देशक ने शशिधर मुखर्जी (Sashidar Mukherjee) के बेटे जॉय को ही नायक के लिए चुना। इसी फिल्म से पहली बार साधना ने फिल्म नगरी में कदम रखा और उनके साथ साथ उनकी हेयर स्टाइल साधना कट भी मशहूर हो गई।  फिल्म में जॉय मुखर्जी और साधना के अलावा अजरार, किशोर साहु, सोभा समर्थ, दुर्गा खोटे, विजयलक्ष्मी, मास्टर रमेश, रवि टंडन किरन कुमार और फौजा सिंह मुख्य भूमिकाओं में नजर आए।

Love in Simla(1960) | Hindi

 

मुगले आजम (1960)Mughal-E-Azam (1960)

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पृथ्वीराज कपूर और दिलीपकुमार अभिनीत फिल्म मुगलेआजम (Mughal E Azam) का पोस्टर

हिंदी सिनेमा के इतिहास में मुगले आजम (Mugle e azam) अब तक की सबसे सफलतम फिल्म मानी जाती है। मुगले आजम का निर्देशन के आसिफ (K Asif) ने किया था। खुद के आसिफ (K Asif) के शब्दों में ये एक फिल्म नहीं शाहकार थी। मुगले आजम को शानदार सेटो, भव्य साज सज्जा और लाजवाब संगीत के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा। बताया जाता है कि इस फिल्म के निर्माण में के आसिफ (K Asif) को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्हें इस फिल्म को बनाने में करीब दस साल लगे। फिल्म के निर्माण में इतना रुपया खर्च हुआ की के आसिफ करीब करीब दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गए थे। मगर जब फिल्म प्रदर्शित हुई तो इसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।

भारतीय सिनेमा को 100 वर्ष पूरे होने पर ब्रिटेन में कराए गए एक सर्वेक्षण में मुगले आजम (Mugle e azam) को हिन्दी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ कृति माना गया।  बताया जाता है कि इस फिल्म के एक गीत मोहब्बत जिंदाबाद में मोहम्मद रफी (Mohammad rafi) ने करीब 100 कोरस गायकों के साथ गाना गाया था। ये भी कहा जाता है कि इस फिल्म में जो कृष्ण जी की मूर्ति इस्तेमाल की गई वो शुद्ध सोने से बनी हुई थी। फिल्म में दिलीप कुमार(Dilip kumar) , मधुबाला (Madhubala), पृथ्वीराज कपूर (Prathvi Rajkapoor), दुर्गा खोटे (Durga Khote), निगर सुल्ताना, अजीत (Ajit), एम कुमार, मुराद (Murad), जलाल आगा, विजयलक्ष्मी (Vijay Laxmi), एस नजीर, सुरेन्द्र, जॉनी वाकर, तबस्सुम  मुख्य भूमिका में नजर आए।

Mughal-E-Azam 1960 Full Hindi Movie starting Prithiviraj Kapoor,Dillip Kumar,Madhubala

 

काला बाजार (1960) Kala Bazar (1960)

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सदाबाहार अदाकार देवानंद अभिनीत फिल्म कालाबाजार (Kala bazar) का पोस्टर

1960 में नवकेतन फिल्मस (Navketan films) के बैनर तले बनी काला बाजार (Kala Bazar) का निर्माण देवानन्द (Dev Anand) ने किया था। फिल्म का लेखन और निर्देशन देवानन्द (Dev anand) के छोटे भाई विजयान्द (Vijay Anand) ने किया था। इस फिल्म में पहली बार तीनों आनन्द भाइयों ने एक साथ काम किया। फिल्म का संगीत एस डी बर्मन (S D Burman) ने दिया था और फिल्म के गीत शैलेन्दे (Shailendra) ने लिखे थे। इस फिल्म के बारे में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस फिल्म में एक दृश्य में बहुत सारे कलाकारों को लिया गया।

फिल्म की कहानी एक ऐसे गरीब बस कंडेक्टर की है जिसकी एक यात्री से कहासुनी होने की वजह से उसकी नौकरी चली जाती है और वो अपने परिवार का पेट पालने के लिए दर दर की ठोकरे खाता है तभी उसे एक व्यक्ति सिनेमा हॉल के बाहर फिल्म के टिकट ब्लैक करता हुआ दिखाई देता है और वो भी वही काम शुरू कर देता है।

धीरे धीरे उसी ब्लैक की कमाई से वो एक दिन वो मरीन ड्राइव पर अपने परिवार के लिए एक बंगला खरीद लेता है। फिल्म में देवानंद (Dev Anand), वहीदा रहमान (Vahida rehman), विजय आनंद (Vijay Anand), चेतन आनंद (Chetan Anand), नंदा (Nand), राशिद खान (Rashid Khan), मदन पुरी (Madan Puri), लीला चिटनिस (Leelal Chitnis), हेलन (Helan) और मुमताज बेगम (Mumtaj Begum) मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं।

Kala Bazar – Old Hindi Classic Movie | Popular Hindi Movies | Dev Anand, Waheeda Rehman

 

हम दोनों (1961) Hum Dono (1961)

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देवानंद और साधना अभिनीत फिल्म हमदोनों (Hum Dono) का पोस्टर

नवकेतन (Navketan films) के बैनर तले बनी फिल्म हम दोनों (Hum Dono) सन् 1961 में आई। देवानंद (Dev Anand) ने इस फिल्म का निर्माण किया। जहां एक ओर इस फिल्म के निर्देशक अमरजीत बताए जाते हैं वहीं दूसरी ओर देवानंद ये दावा करते हैं कि इस फिल्म का निर्देशन और कथानंक विजयानंद (Vijay Anand) ने किया था। बहरहाल जो भी हो हम दोनों उस दौर की एक जबरदस्त हिट फिल्म रही।

फिल्म में देवानंद ने डबल रोल किया। इसमें वो एक फौजी के रूप में नजर आए हैं। जो उनके ही हमशक्ल की मौत की खबर के बाद उसके घर पहुंच जाता है। जहां एक ओर मृतक फौजी के घर वाले उसे जिंदा समझने लगते हैं वहीं वह उनके प्रेम में खुद को फंसा पाता है। इस फिल्म में देवानंद एक फौजी के रूप में खूब जंचे हैं, उनके साथ इस फिल्म में नंदा (Nand), साधना शिवदासानी, लीला चिटनिस (Leela Chitnis), गजानन जागीरदार और राशिद खान (Rashid Khan) मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। सन 2011 में करीब पचास सालों के बाद फिल्म को एक बार फिर रंगीन करके दोबारा रिलांच किया गया।

Hum Dono | Full Hindi Movie (HD) | Popular Hindi Movies | Dev Anand – Sadhana

 

 

साहिब बीवी और गुलाम (1962) Sahib, Bibi Aur Ghulam (1962)

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गुरुदत्त् का शाहकार साहेब बीबी और गुलाम (Sahib biwi aur gulam ) का पोस्टर

विमल मित्र के बंगाली उपन्यास शाहेबबीबीगोलाम  पर बनी साहिब बीवी और गुलाम (Sahib biwi aur gulam ) 1962 में बनी। फिल्म का निर्माण गुरुदत्त (Guru dutt) ने किया और इसका निर्देशन अबरार अलवी द्वारा किया गया। यूं तो इससे पहले भी बहुत सी साहित्यक कृतियों पर फिल्में बन चुकी हैं लेकिन इस फिल्म में कुछ ऐसी खास बात थी जो ये हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर बन गई।

साहिब बीवी और गुलाम (Sahib biwi aur gulam ) को उस वर्ष के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान मिला और साथ ही फिल्मफेयर पुरस्कारों में इसे चार श्रेणियों में एक साथ सम्मानित किया गया। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों की कहानी कहती यह फिल्म कलकत्ता की पृष्ठभूमि पर बनी थी। जिसमें एक बंगाली जमीदार की सामंतवादी सोच, और उसकी अकेली पत्नी और गुलाम की आदर्शवादी दोस्ती को दर्शाने का प्रयास किया गया है। फिल्म में मीना कुमार का अभिनय अभूतपूर्व है।

फिल्म में मुख्य रूप से गुरुदत्त (Guru Dutt), मीना कुमारी (Meena Kumari), रहमान (Rehman), वहीदा रहमान (Vahida Rehman) और नजीर हुसैन ने भूमिका निभाई। बताया जाता है कि कागज के फूल (Kaagaz ke phool) के बाद गुरुदत्त ने यह फैसला लिया था कि वो अब किसी और फिल्म का निर्देशन नहीं करेंगे इसलिए उन्होंने इस फिल्म के लिए नितिन बोस और फिर सत्येन बोस से बात की।

जब दोनों ही लोगों से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला तब गुरुदत्त (Guru Dutt) ने इस फिल्म के निर्देशन का काम अबरार अल्वी को सौप दिया था। कुछ लोगों का कहना है कि गुरुदत्त (Guru Dutt) चाहते थे कि फिल्म में भूतनाथ का किरदार शशिकपूर (Sashi Kapoor) निभाएं लेकिन शशिकपूर के मना करने पर उन्हें यह रोल खुद करना पड़ा।

Sahib Bibi Aur Ghulam Full Movie | Guru Dutt | Meena Kumari Old Hindi Movie |Old Classic Hindi Movie

 

 हॉफ टिकट (1962) Half Ticket (1962)

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किशोर कुमार की फिल्म हाॅफ टिकट (Half Ticket) का पेास्टर

किशोर कुमार (Kishore Kumar) अभिनीत हॉफ टिकट (Half Ticket) 1962 में आई। जिसका निर्देशन कालिदास (Kalidas) ने किया था। फिल्म में किशोर कुमार (Kishore Kumar) के अलावा मधुबाला (Madhubala), हेलन (Helen), प्राण (Pran), शम्मी (Shammi), मनोरमा (Manorma), प्रदीप कुमार (Pradeep Kumar), मोनी चटर्जी (Moni chaterjee) और टुन टुन (Tun Tun) मुख्य भूमिकाओं में नजर आए।

फिल्म में किशोर कुमार (Kishore Kumar) ने विजय का किरदार निभाया है जो एक बड़े उद्योगपति का बेटा है। विजय जिंदगी से लापरवाह है और अपने पिता द्वारा शादी के दबाव से तंग आकर एक दिन अपने जीवन में कुछ करने के लिए घर छोड़कर बंबई भाग जाने के निर्णय लेता है। ट्रेन में जहां उसकी मुलाकात एक डायमंड के स्मगलर प्राण से होती है वहीं दूसरी ओर ट्रेन में सफर कर रही मधुबाला (Madhubala) से सफर के दौरान वह प्यार करने लगता है। फिल्म में किशोर कुमार और मधुबाला की अदाकारी को खूब वाहवाही मिली। बताया जाता है कि हॉफ टिकट हॉलीवुड की मूवी यूआर नेवर टू यंग से प्रेरित थी।

HALF TICKET | Full Hindi Movie (HD) | Popular Hindi Movies | Kishore Kumar – Madhubala

 

 बंदिनी 1963 Bandini (1963)

धर्मेन्द्र, नतून और अशोक कुमार अभिनीत फिल्म बंदिनी का पोस्टर
धर्मेन्द्र, नतून और अशोक कुमार अभिनीत फिल्म बंदिनी (Bandini) का पोस्टर

विमल मित्र (Bimal Mitra) द्वारा निर्देशित आखिरी फिल्म बंदनी 1963 (Bandini 1963) में आई। सुजाता (Sujata) की तरह बंदिनी (Bandini) भी एक महिला प्रधान फिल्म थी। फिल्म बंदनी (Bandini Movie) की कहानी जेल में बंद एक महिला कैदी कल्याणी के चारों ओर घूमती है।

इस महिला पर खून का इल्जाम है और जब जेल में एक वृद्धा को टीवी की बीमारी हो जाती है तो कल्याणी अपनी मर्जी से उसकी देखभाल करती है। जेल में वृद्धा का इलाज करने आए डाक्टर को कल्याणी से प्यार हो जाता है। कल्याणी अपने बीते हुए अतीत के चलते डाक्टर के प्यार को ठुकरा देती है। फिल्म में नूतन ने कल्याणी का किरदार निभाया है। फिल्म में नूतन के अलावा अशोक कुमार (Ashok Kumar), धर्मेन्द्र (Dharmendra), तरुण बोस (Tarun bose), इफतेखार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। इस फिल्म ने जहां एक ओर बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया वहीं दूसरी ओर इस फिल्म को उस वर्ष फिल्मफेयर पुरस्कारों में उसे छह पुरस्कारों से नवाजा गया जिसमें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार भी शामिल था।

Bandini (HD) (With Eng Subtitles) | Ashok Kumar | Nutan | Dharmendra | Raja Paranjpe | Tar

 

दोस्ती (1964) Dosti (1964)

हिंदी फिल्म जगत की सफलत फिल्मों में से एक दोस्ती का पोस्टर
हिंदी फिल्म जगत की सफलत फिल्मों में से एक दोस्ती (Dosti) का पोस्टर

दोस्ती (Dosti Movie) हिन्दी फिल्म जगत के इतिहास की सबसे सफलतम फिल्मों में से एक है। इसका फिल्म का निर्माण राजश्री प्रोडक्शन (Rajshree production) के बैनर तले ताराचंद बड़जात्या (Tarachand Barjatya) ने किया था और फिल्म का निर्देशन सत्येन बोस (Satyen bose) ने किया था। बताया जाता है कि इसी फिल्म से संजय खान (Sanjay Khan) ने अपने करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में बेबी फरीदा (Baby Farid), उमा राजू (Uma Raju), लीला मिश्रा (Leela Mishra), नाना पालसिकर, लीला चिटनिस (Leela chitnis) और अभिभट्टाचार्य जैसे कलाकार ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

दोस्ती सन् 1964 (Dosti Movie) की दस सबसे ज्यादा प्रसिद्ध फिल्मों में से एक थी। दोस्ती फिल्म (Dosti Movie) की कहानी एक अपाहिज लड़के और एक अंधे लड़के की दोस्ती पर आधारित है। सुशील कुमार और सुधीर कुमार के अद्भुत अभिनय को देखकर दर्शक भाव विभोर हो गए।

इस फिल्म में माउथ ऑर्गन (Mouth organ) का जबरदस्त इस्तेमाल हुआ जो आरडीबर्मन का कमाल था। फिल्म के सभी गाने आज तक दर्शकों के दिलो दिमाग पर छाए हुए हैं।  इस फ़िल्म को१९६४ के फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कारों में छ: पुरस्कारों से नवाज़ा गया जिसमें फ़िल्म फ़ेयर सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार भी शामिल है।

 

देखिए यूट्यूब पर फिल्म का एक गीत

Chahunga Main Tujhe Saanjh Savere – Dosti – Sudhir Kumar & Sushil Kumar – Old Hindi Songs

 

 

अनुपमा (1966) Anupama (1966)

धर्मेन्द्र और शर्मिला टैगोर अभिनीत फिल्म अनुपमा का पोस्टर
धर्मेन्द्र और शर्मिला टैगोर अभिनीत फिल्म अनुपमा (Anupama) का पोस्टर

अनुपमा (Anupama) जैसा इसके नाम से प्रतीत होता है, यह फिल्म एक अंतमुर्खी लड़की की अद्भुत प्रेम कहानी पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी (Hrishikesh Mukherjee) ने किया था। फिल्म में धर्मेन्द्र (Dharmendra), शर्मिला टैगोर (Sharmila tagore), तरुण बोस (Tarun bose), शशिकला (Sashikala), देवेन वर्मा (Deven verma), दुर्गा खोटे (Durga Khote), दुलारी (Dulari), सुरेखा, ब्रहम भारद्वाज और राजदीप मुख्य भूमिका में नजर आए।

अनुपमा एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसके जन्म के समय उसकी मां का देहांत हो जाता है और उसका पिता उसे अपनी मां की मौत का जिम्मेदार मानते हुए लड़की से नफरत करने लगता है। पिता की नफरत से लड़की अंतमुर्खी हो जाती है और उसके जीवन में एक लड़का आता है जो लेखक और अध्यापक है, अनुपमा को उससे प्यार हो जाता है। अपने प्रेम और पिता की नफरत के बीच झूलती इस प्रेम कहानी में शर्मिला टैगोर ने कमाल की एक्टिंग की है।

 

Dheere Dheere Machal | Surekha Pandit | Tarun Bos | Anupama | Lata Mangeshkar | Hemant Kumar

बहारों के सपने (1967) Baharon Ke Sapne (1967)

राजेश खन्ना और आशा पारेख अभिनीत फिल्म बहारों के सपने
राजेश खन्ना और आशा पारेख अभिनीत फिल्म बहारों के सपने (Baharon ke Sapne)

बहारों के सपने (Baharon Ke Sapne Movie) निर्माता निर्देशक नासिर हुसैन (Nasir hussain) की एक ऐसी फिल्म थी जो उनकी पुरानी फिल्मों से एकदम अलहदा थी। बताया जाता है कि नासिर हुसैन (Nasir Hussain) ने अपने कॉलेज के जमाने में लेखन प्रतियोगिता के लिए एक कहानी लिखी थी जिसको प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ था, और तभी से नासिर के मन में इस कहानी को लेकर फिल्म बनाने का कीड़ा कुलबुला रहा था।  बहारों के सपने (Baharon ke Sapne Movie) एक छोटे बजट की फिल्म थी।

उस जमाने में राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) नए नए फिल्मों में आए थे, नासिर ने रोजश खन्ना (Rajesh Khanna) को फिल्म में हीरो ले लिया लेकिन हिरोईन के रूप में वो नन्दा को लेने का विचार बना रहे थे। नन्दा (Nanda) ने इस फिल्म में काम करने से इनकार कर दिया तो नासिर (Nasir Hussain) ने इस फिल्म में आशा पारेख को लिया।

बताया जाता है कि बहारों के सपनों के साथ ही नासिर हुसैन (Nasir Hussain) देवानंद को लेकर तीसरी मंजिल (Teesri Manzil) के निर्माण की भी तैयारी कर रहे थे। उन्होंने सोचा बहारों के सपनों (Baharon Ke Sapne Movie) के निर्देशन की जिम्मेदारी देवानंद के भाई विजयान्द को दे दी जाए। इस बात पर देवानंद भड‍़क उठे और उन्होंने ताना मारा कि छोटे बजट की और कलात्मक फिल्म मेरे भाई को दे रहे हो और खुद तीसरी मंजिल का निर्देशन कर रहे हो। यह बात नासिर हुसैन को इतनी चुभी की उन्होंने बहारों के सपनों (Baharon Ke Sapne Movie) का निर्देशन खुद किया।

बहारों के सपनों (Baharon Ke Sapne Movie) पहले एक दुखांत फिल्म थी। राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) व आशा पारेख (Asha Parekh) दोनों की फिल्म के अंत में मौत हो जाती है । फिल्म जब रिलीज हुई तो एकदम ठण्डी पड़ गई। समालोचकों की मांग पर एक बार फिर फिल्म का अंत दोबारा शूट किया गया और सुखद अंत के साथ एक बार फिर फिल्म रिलीज की गई। इस फिल्म के कुछ ‘आजा पिया तोहे प्यार दूँ’ , ‘ क्या जानूं सजन होती है क्या ग़म की शाम’, ‘चुनरी संभाल गोरी’ जैसे सदाबहार गीत आज भी दर्शकों के यादों में तरोताजा बने हुए है।

 

रात और दिन (1967) Raat Aur Din (1967)

फिरोज खान और नरगिस की अदाकारी से लबरेज रात और दिन का पोस्टर
फिरोज खान और नरगिस की अदाकारी से लबरेज रात और दिन (Rat aur Din) का पोस्टर

 रात और दिन (Rat aur Din) का निर्माण सन 1967 में जफर हुसैन ने किया था। फिल्म का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था। इस फिल्म में नरगिस ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है जो मल्टीपल पर्सनेल्टी डिसऑडर्र से पीडि़त है। इस फिल्म में नरगिस के अभूतपूर्व अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया था।

फिल्म में प्रदीप कुमार, नरगिस, फिरोज खान, के एन सिंह, लीला मिश्रा, अनूप कुमार, हरेन्द्र नाथ चटोपध्याय और अनवर हुसैन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म में नरगिस एक ऐसी औरत बनी हैं जो दिन में तो अपने पति के साथ रहती हैं और शाम को वो पेग्गी बनकर क्लब में घूमती है और नए नए लोगों से मिलती है। जब उसके पति को उस पर शक होता है तो नरगिस को बीती रात को हुई किसी भी घटना के बारे में याद होने से इनकार कर देती है। फिल्म का कथानक इतना जबरदस्त है कि अंत तक दर्शकों को बांधे रखता है।

 

देखिए यूटयूब पर पूरी फिल्म

 

 

 खामोशी (1969) Khamoshi (1969)

वहीदा रहमान और राजेश खन्ना की फिल्म खामोशी का पोस्टर
वहीदा रहमान और राजेश खन्ना की फिल्म खामोशी का पोस्टर

खामोशी फिल्म एक बंगाली लघु कथा नर्स मित्रा पर आधारित थी। आशुतोष मुखर्जी और असित सेन ने इसी कहानी पर बंगाली भाषा में दीप जले जाई बनाई जिसे अपार सफलता मिली। इस फिल्म में वहीदा रहमान ने एक नर्स की भूमिका निभाई है। इस फिल्म में वहीदा रहमान, राजेश खन्ना, धर्मेद्र, नजीर हुसैन, इफ्तखार, ललिता पवार, देवेन वर्मा, अनवर हुसैन और स्नेहलता ने मुख्य भूमिका निभाई। खामोशी वहीदा रहमान के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म के गुलजार के लिखे गीत तुम पुकार लो तुम्हारा इंतजार है, वो शाम कुछ अजीब थी और हमने देखी है इन आंखों की महकती खुशबू तो आज भी दर्शकों की जुबान पर तारोताजा बने हुए है।

 

 

 

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