• 93वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए भारत की ओर से मलयालम फिल्म जल्लीकट्‌टू की घोषणा

  • फिल्म की कहानी माओवादी हरीश की लघुकथा पर आधारित है

  • बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी

मुंबई 26 नवम्बर (एजेंसी) सूत्रों के अनुसार 93वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए भारत की ओर से मलयालम फिल्म जल्लीकट्‌टू को आधिकारिक एंट्री को घोषित किया गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की 14 सदस्यों की एक कमेटी ने डायरेक्टर लिजो जोस पेलीसरी की इस फिल्म को चुना है। 25 अप्रैल 2021 को लॉस एंजेलिस में होने वाले इस अवार्ड में जल्लीकट्‌टू बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म फॉरेन लैंग्वेज कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। फेडरेशन के जूरी बोर्ड चेयरमैन राहुल रवैल ने घोषणा करते हुए कहा कि यह एक ऐसी फिल्म है जो वास्तव में उन समस्याओं को सामने लाती है जो इंसानों में हैं, यानी हम जानवरों से भी बदतर हैं।  उन्होंने आगे कहा कि पेलीसरी बहुत काबिल डायरेक्टर हैं। जिन्हें अंगमाली डायरीज, इआ, मा याऊ के लिए जाना जाता है। उनकी जल्लीकट्‌टू ऐसी फिल्म है जिस पर देश को गर्व होना चाहिए।

93वें एकेडमी अवॉर्ड्स में भेजने के लिए हिंदी, उड़िया, मराठी और अन्य भाषाओं की कुल 27 फिल्मों के बीच मुकाबला था, जिनमें मेेघना गुलजार की छपाक, शूजित सरकार की गुलाबो सिताबो, सफदर रहना की चिप्पा, हंसल मेहता की छलांग, चैतन्य ताम्हणे की द डिसाइपल, विधु विनोद चोपड़ा की शिकारा, अनंत महादेवन की बिटरस्वीट, रोहेना गगेरा की इज लव इनफ सर, गीतू मोहनदास की मूथॉन, नीला माधब पांडा की कलिरा अतिता, अनविता दत्त की बुलबुल, हार्दिक मेहता की कामयाब और सत्यांशु-देवांशु की चिंटू का बर्थडे भी शामिल थी। ऑस्कर के लिए भेजी गई जल्लीकट्टू केरल के इडुक्की जिले के विवादित खेल जल्लीकट्‌टू पर आधारित है, जिसमें एक बैल को मारने से पहले भीड़ के बीच छोड़ दिया जाता है। फिल्म की कहानी माओवादी हरीश की लघुकथा पर आधारित है, जिसमें एंटोनी वर्गीश, चेम्बन विनोद जोस, साबुमन अब्दसमद और सैंथी बालाचंद्रन ने काम किया है।

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