• विनोद बचपन में बेहद शर्मीले थे

  • पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फिल्मों में जाए

  • विनोद को सुनील दत्त ने मन का मीत में विलेन के रूप में लांच किया

मुंबई 3 अक्टूबर (एजेंसी)  6 अक्टूबर 1946 को पेशावर, पाकिस्तान में जन्मे विनोद खन्ना के पिता का टेक्सटाइल, डाई और केमिकल का बिजनेस था। आजादी के समय हुए बंटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान से मुंबई आकर बस गया। बताते है कि विनोद बचपन में बेहद शर्मीले थे परन्तु जब स्कूल के दौरान उन्हें एक टीचर ने जबरदस्ती नाटक में उतार दिया और उन्हें अभिनय की कला पसंद आई। बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान विनोद खन्ना ने सोलवां साल और मुगल-ए-आज़म जैसी फिल्में देखीं, जिनका उन पर गहरा असर पड़ा। विनोद खन्ना के पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फिल्मों में जाए। विनोद की जिद के आगे वो झुक गए ।

हैंडसम विनोद को सुनील दत्त ने मन का मीत में विलेन के रूप में लांच किया, वहीँ इस फिल्म में दत्त ने अपने भाई को बतौर हीरो लांच किया था। हीरो के रूप में स्थापित होने के पहले विनोद ने आन मिलो सजना, पूरब और पश्चिम और सच्चा झूठा जैसी फिल्मों में सहायक या खलनायक के रूप में काम किया। गुलजार द्वारा निर्देशित मेरे अपने 1971 में आई थी, जिसमे विनोद खन्ना को काफी चर्चा मिली।  मल्टीस्टारर फिल्मों से विनोद को कभी परहेज नहीं रहा और वे उस दौर के स्टार्स अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, सुनील दत्त आदि के साथ फिल्में करते रहे।

हेराफेरी, खून पसीना, अमर अकबर एंथोनी, मुकद्दर का सिकंदर ब्लॉकबस्टर फिल्मों में लोगों ने अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना की जोड़ी को काफी पसंद किया। 1982 में अचानक विनोद खन्ना ने अपने आध्यात्मिक गुरु रजनीश ओशो की शरण में जाने का फैसला ले, फिल्म इंडस्ट्री में हड़कंप मचा दिया। सूत्रों के अनुसार ओशा के आश्रम में विनोद खन्ना ने बर्तन धोने और माली का काम किया। विनोद के अचानक इस तरह से चले जाने के कारण उनकी पत्नी गीतांजली नाराज हुई और दोनों के बीच तलाक हो गया। विनोद और गीतांजली के दो बेटे अक्षय और राहुल खन्ना हैं। 1990 में विनोद ने कविता से शादी की। कविता और विनोद का एक बेटा साक्षी और बेटी श्रद्धा है।

फिल्मों के प्रति प्यार विनोद को फिर फिल्मों में खींच लाया और 1987 में उन्होंने इंसाफ फिल्म से वापसी की। चार-पांच साल तक नायक बनने के बाद विनोद धीरे-धीरे चरित्र भूमिकाओं की ओर मुड़ गए एक इंटरव्यू के दौरान, विनोद खन्ना ने कहा था कि उनके समय भी हीरो फिट होते थे परंतु तब बॉडी दिखाने का ट्रेंड नहीं था। विनोद खन्ना अभिनेता होने के अलावा, निर्माता और सक्रिय राजनेता भी थे। वे भाजपा के सदस्य थे और कई चुनाव जीत चुके थे। वे मंत्री भी रहे। 1999 में विनोद खन्ना को उनके इंडस्ट्री में योगदान के लिए फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया था।

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