• पहली फिल्म सलाम बॉम्बे होने के बावजूद नहीं दिखे स्क्रीन पर

  • खलनायिकी ने दी नयी पहचान

  • फिल्मों जैसी थी उनकी प्रेम कहानी

कहावत है कि व्हेन लाइफ गिव्ज यू लेमन, यू मेक ए लेमनेड। बोलने में अच्छा लगता है, लेकिन सच में जब जिंदगी आपके हाथ में नींबू थमाती है तो शिकंजी बनाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन आपके पास और चॉइस भी क्या होती है पॉजिटिव रहने के अलावाइरफान खान

हरफनमौला इरफान खान का इंतकाल होने के बाद सोशल मीडिया पर मानो हर कोई इस कलाकार को श्रद्धांजलि देने लगा हो । सबकी आँखे नम हो गयी इरफ़ान के जाने की खबर सुनकर ।

7 जनवरी 1967 को जन्मे साहबजादे इरफान अली खान उर्फ़ इरफ़ान खान ने अपने करियर की शुरुवात टेलीविजन से शुरू की थी । जयपुर के पास स्थित टोंक जिला के रहने वाले इरफ़ान ने एमए पूरा करने के बाद उन्होंने 1984 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली में एडमिशन लिया था। एक्टर बनने के उद्देश्य से इरफान ने अपना रुख मुंबई की ओर किया, जिसके बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुवात 1985 में आये सीरियल श्रीकांत ने की थी, जिसके बाद चाणक्य, भारत एक खोज, सारा जहां हमारा, बनेगी अपनी बात, जय हनुमान और चंद्रकांता जैसे कई टीवी सीरियल में अपने अभिनय से किरदारों को जीवत कर दिया। इरफान खान ने नेशलन स्कूल ऑफ ड्रामा में साथ पढ़ने वालीं सुतापा सिकदर से 1995 में शादी की थी। दोनों के दो बच्चे बबिल और आयान हैं।

वहीँ इरफ़ान ने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुवात 1988 फिल्म सलाम बॉम्बे से की थी, जिसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक बेहतरीन फ़िल्में की है । कमला की मौत, दृष्टि, मकबूल, एक डॉक्टर की मौत, घात, गुनाह, चरस, आन, द बायपास, रोग जैसी कई बेहतरीन और ऑफ़बीट फिल्मों में काम किया है ।

इरफ़ान काफी समय से दुर्लभ किस्म के ब्रेन कैंसर से ग्रसित थे और उनकी कोलन इंफेक्शन की समस्या बढ़ गई थी । 17 दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना आखिरी सन्देश पोस्ट किया था ।

पहली फिल्म सलाम बॉम्बे होने के बावजूद नहीं दिखे स्क्रीन पर

टेलीविजन में अपने करियर की शुरुवात करने के बाद जब इरफ़ान ने फिल्मों में अपना करियर बनाना चाहा तो उन्हें मौका मिला मीरा नायर की फिल्म सलाम बॉम्बे । फिल्म में इरफ़ान का कैमियो रोल था परन्तु फिल्म से उनके सभी सीन काट दिए गए थे। इसके बाद इरफान ने साल 1990 में पंकज कपूर और शबाना आजमी स्टारर फिल्म एक डॉक्टर की मौत से अपने करियर की शुरुवात की जिसमे इरफान ने एक बेबाक रिपोर्टर की भूमिका निभाई थी परन्तु पंकज कपूर और शबाना आजमी की चमक के आगे इरफ़ान कहीं गुम हो गये

खलनायिकी ने दी नयी पहचान

कई फिल्मों में अपने अभिनय को दिशा देने के उद्देश्य से यह सितारा कड़ी मेहनत करता रहा, इसके बाद उनके करीयर में नया टर्निंग पॉइंट बनकर आयी साल 2004 हासिल, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट विलेन का अवॉर्ड मिला है और इस सितारे के करियर को नयी दिशा मिली और इस दिशा को गति देने का काम किया 2007 में आई फिल्म लाइफ इन अ मेट्रो ने, जिसके बाद इरफ़ान बॉलीवुड में खुद की पहचान बनाने में सफल रही।

फिल्मों जैसी थी उनकी प्रेम कहानी

एक इंटरव्यू के दौरान इरफ़ान ने बताया था कि जब वो 16 साल के थे तब वो दूध लेने जाते थे ताकि वो दूधवाले की बेटी को देख सके, जो उन्हें देखकर मुस्कुराया करती थी । एक दिन लड़की ने इरफान को अपने कमरे में बुलाकर उन्हें एक कॉपी दी जिसमें एक चिट्ठी रखी हुई थी, जिसे लड़की ने उन्हें पड़ोस के एक लड़के को देने के लिए दिया । इरफान ने खुद को हीरो समझा और प्यार की क़ुरबानी देते हुए चिट्ठी उस लड़के तक पहुंचा दी।

इसके बाद उनकी एक और प्रेम कहानी शुरू हुयी । दोनों घर पर छुप्पन-छुप्पाई खेलते थे । इरफ़ान को ये पल सबसे बेहतरीन लगते थे । लेकिन दोनों के बीच आ गया उनका एक कजिन जिसने इरफ़ान को बताया कि उस लड़की ने उसके साथ भी छुप्पन-छुप्पाई खेली है । इस बात से उनका दिल टूट गया और उन्होंने इस लड़की से ब्रेक-अप कर लिया । गम में डूबे इरफ़ान ने ब्रेक-अप के बाद दो-तीन हफ़्तों तक मुकेश के गीतों का सहारा लिया, ताकि वो इस गम से बाहर निकल सके ।

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