• भारत-पाक बंटवारे के बाद वो अपनी मां के साथ ग्वालियर से मुंबई आ गये

  • बी. आर. चोपड़ा की फिल्म अफसाना के लिए मिले थे छह रूपये

  • फिल्म अफसाना ने जगदीप ने पहली बार काम किया, हालाँकि इससे पहले वो खुद नही जानते थे फिल्म क्या होती है

मुंबई, 10 जुलाई (एजेंसी)। मध्यप्रदेश के दतिया में जन्में जगदीप उर्फ सैयद इश्तियाक अहमद जाफरी ने बॉलीवुड में अपने स्टाइलिश कॉमिक अंदाज़ के चलते पांच दशक तक लोगों का मनोरंजन किया, पर क्या आपको पता है कि उन्हें अपनी पहली फिल्म के लिए मात्र छह रुपये मिले थे। जब जगदीप सात-आठ साल के थे, उनके सिर से पिता का साया उठ गया। वहीँ भारत-पाक बंटवारे के बाद वो अपनी मां के साथ ग्वालियर से मुंबई आ गये। ये कहना गलत नहीं होगा कि जगदीप ने बचपन के दिनों से ही गरीबी को काफी करीब से देखा था। कहा जाता है कि जगदीप की मां यतीम खाने में खाना बनाने का काम करतीं जिससे वह अपने बच्चे को पढ़ा-लिखा सके और उसे पाल सके।

घर के ऐसा हालात देखते हुए एक दिन जगदीप ने फैसला किया कि घर की परिवार की मदद के लिये उन्हें कुछ काम करना चाहिये। बताते है कि उनकी माँ इस फैसले से बिलकुल खुश नहीं थी, उन्होंने जगदीप को मना कर दिया, पर जगदीप भी अपनी बात के पक्के निकले और उन्होंने जो सोचा उसे करने की ठान ली। जगदीप पढ़ाई छोड़कर पतंगें बनाने लगे, साबुन और कंघी बेचने का काम करने लगे। जगदीप जिस सड़क पर काम किया करते थे, वहां एक आदमी आया और वह वैसे बच्चों को ढूंढ रहा था जो फिल्म में काम कर सके। उस शख्स ने जगदीप से फिल्मों में काम के बारे में पूछा कि क्या तुम काम करोगे। जगदीप ने उस शख्स से पूछा कि ये फिल्में क्या होती हैं। जगदीप ने उस समय तक फिल्में नहीं देखी थी। जगदीप ने उस शख्स से पैसे की बात की उन्हें इस काम के लिए कितने मिलेंगे। जिसपर जवाब आया तीन रुपये।

जगदीप को महसूस हुआ कि जैसे उनकी लॉटरी लग गयी है। जगदीप तुरंत फिल्मों में काम के लिए तैयार हो गए। अगले दिन जगदीप की मां उन्हें लेकर स्टूडियो पहुंच गईं, जहां बच्चों का ही सीन चल रहा था। हालांकि, उस वक्त जगदीप को केवल चुपचाप बैठने वाला रोल मिला था, लेकिन तभी उर्दू में एक ऐसा डायलॉग आया, जिसे कोई बच्चा बोल नहीं पा रहा था। जगदीप ने किसी बच्चे से पूछा कि यदि यह डायलॉग मैंने बोल दिया तो क्या होगा, जवाब आया, पैसे ज्यादा मिलेंगे छह रुपये। जगदीप ने सामने जाकर यह डायलॉग बड़ी ही खूबसूरती से बोल दिया और फिर यहीं से शुरू हुआ उनकी चाइल्ड आर्टिस्ट का सफर। यह फिल्म थी वर्ष 1951 में प्रदर्शित बी. आर. चोपड़ा की अफसाना। इसके बाद जगदीप ने सफलता की बुलंदियों को छुआ और एक से बढ़कर एक फिल्मों में अपने लाजवाब कॉमिक अभिनय से दर्शकों को दिल जीता।

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