• 14 सितंबर को भाजपा सांसद रवि किशन के बयान के बाद संसद का माहौल गरमाया

  • कंगना ने कहा कौन सी थाली दी है जयाजी और उनकी इंडस्ट्री ने

  • कुछ लोगों की वजह से आप पूरे इंडस्ट्री की छवि को धूमिल नहीं कर सकते

मुंबई 16 सितम्बर (एजेंसी) सुशांत सिंह आत्महत्या मामले का असर अब संसद में भी देखने को मिल रहा है, जहाँ सपा सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में थाली में छेद वाला बयान दे ये जताया कि कुछ लोग बॉलीवुड को बदनाम करना चाहते है, वहीँ कंगना रानौत ने जया के बयान पर जवाब दिया। कंगना ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कौन सी थाली दी है जयाजी और उनकी इंडस्ट्री ने? मैंने इस इंडस्ट्री को फेमिनिज्म सिखाया। थाली देश भक्ति नारी प्रधान फिल्मों से सजाई। यह मेरी अपनी थाली है जयाजी आपकी नहीं। सूत्रों के अनुसार जया बच्चन के बयान पर विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में स्थित अमिताभ बच्चन के बंगले की सुरक्षा बढ़ा दी है।

बता दे कि इस विवाद की शुरुवात मानसून सत्र के साथ ही हुआ, जहाँ 14 सितंबर को भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा कि पाकिस्तान और चीन से ड्रग्स की तस्करी हो रही है। यह देश की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने की साजिश है। हमारे फिल्म उद्योग में इसकी पैठ हो चुकी है और एनसीबी इसकी जांच कर रही है। मेरी मांग है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाए। वहीँ अगले दिन संसद में सपा सांसद जया बच्चन ने कहा कि कुछ लोगों की वजह से आप पूरे इंडस्ट्री की छवि को धूमिल नहीं कर सकते। मुझे शर्म आती है कि कल लोकसभा में हमारे एक सदस्य, जो फिल्म उद्योग से हैं, उन्होंने इसके खिलाफ बोला। यह शर्मनाक है। आप जिस थाली में खाते हैं उसमें छेद नहीं कर सकते हैं।

बता दे कि जया के बयान पर अब कंगना ने पलटवार करते हुए कहा जया जी क्या ये बात आप तब कह पातीं, जब मेरी जगह आपकी बेटी श्वेता को पीटा जाता, ड्रग्स दी जाती और युवावस्था में शोषण होता। क्या ये बात आप तब कह पातीं, यदि अभिषेक ने लगातार हैरेसमेंट की बात की होती और आप उन्हें एक दिन लटका पातीं। हमारे साथ सहानुभूति रखिए।

दूसरी तरफ रविकिशन ने कहा कि जिस थाली में जहर हो, उसमें छेद करना ही पड़ेगा। जयाजी के जमाने में केमिकल जहर नहीं था, अब इंडस्ट्री को इससे बचाना होगा। वहीँ एक बार फिर कंगना ने जया की बात का जवाब देते हुए कहा कि शो बिजनेस हमेशा से जहरीला रहा है। लाइट और कैमरे की इस दुनिया में लोग भरोसा करने लगते हैं और इसी में जीने लगते हैं। लोग एक वैकल्पिक सच्चाई पर विश्वास करने लगते हैं और अपने चारों ओर एक घेरा बना लेते हैं। इस भ्रम से बाहर निकलने के लिए मजबूत आध्यात्मिक शक्ति की जरूरत पड़ती है।

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