लम्हे : यश चोपड़ा (यश राज) की एक ऐसी मास्टरपीस फिल्म जिसका ज़िक्र सबसे कम होता है

Lamhe : A masterpiece film of Yash Chopra (Yash Raj), which is the least mentioned लम्हे : यश चोपड़ा (यश राज) की एक ऐसी मास्टरपीस फिल्म जिसका ज़िक्र सबसे कम होता है

यक़ीनन ये आश्चर्य की बात है कि 1991 में आयी ये फिल्म उस वक़्त की मास्टरपीस होने के बावजूद, भारतीय जनता ने इस फिल्म को नकार दिया था | कुछ दिनों पहले ही मैंने इस फिल्म को देखा तो पाया कि इसमें कोई शक नहीं की यह फिल्म यश चोपड़ा की मास्टरपीस फिल्मो में से एक है | चलिए आपको इस फिल्म के बारे में कुछ बाते बताता हूँ क्यों है यह एक मास्टरपीस फिल्म –

फिल्म का विषय :

फिल्म को भारत में नकार देने का सबसे बड़ा का कारण फिल्म के विषय को माना जाता है | फिल्म की कहानी वीरेंद्र प्रताप सिंह aka विरेन की है जो कई वर्षो बाद विदेश से अपने घर राजस्थान आता है जहाँ उसका पालन-पोषण करने वाली दाई-सा रहती है | जब विरेन राजस्थान आता है तो उसकी मुलाकात पल्लवी से होती है और वो अपना दिल पल्लवी को दे देता है मगर दाई-सा उसे बताती है कि पल्लवी उम्र में उससे बड़ी है | इस बात का विरेन की दीवानगी पर कोई फर्क नहीं पड़ता और वो तय करता है कि वो पल्लवी से अपने दिल की बात कह कर ही रहेगा | अचानक ही पल्लवी के पिता की मृत्यु हो जाती है और उस दिन विरेन को पता चलता है कि पल्लवी सिद्धार्थ को पसंद करती है |


विरेन दिल पर पत्थर रख कर दोनों की शादी करवा देता है | एक दिन विरेन को पता चलता है कि पल्लवी और सिद्धार्थ का एक्सीडेंट हो गया है, जिसमे सिद्धार्थ की मौके पर मौत हो गयी है मगर पल्लवी गंभीर अवस्था में है | इसी दौरान पल्लवी एक बच्ची को जन्म देती है और उसकी जिम्मेदारी दाई-सा को देकर इस दुनिया से हमेशा के लिए रुखसत हो जाती है | पल्लवी की बेटी का नाम दाई-सा पूजा रखती है चूँकि पल्लवी की मौत और पूजा के जन्म का दिन एक ही होता है तो विरेन पूजा से नफरत करने लगता है |

दाई-सा पूजा को राजकुमार जैसे दुल्हे की कहानी सुना कर बड़ा करती है और पूजा बचपन से ही विरेन को दाई-सा की कहानी वाला राजकुमार मानने लगती है | पूजा बड़े होने पर बिलकुल पल्लवी जैसी दिखने लगती है | दाई-सा और पूजा भी विरेन के साथ विदेश रहने लगते है | पूजा विरेन को बहुत ज्यादा पसंद करने लगती है और विरेन की दीवानी हो जाती है तो दूसरी तरफ पल्लवी और पूजा की सूरत एक जैसी होने के कारण विरेन को पूजा पल्लवी की याद दिलाती है, इसलिए वो पूजा से दुरी बनाने की कोशिश करता रहता है | फिल्म के अंत में पूजा और विरेन एक हो जाते है | एक उम्रदराज व्यक्ति से एक 20 साल की लड़की की प्रेम कहानी ही इस फिल्म के भारत में नकार देना का कारण बनी हालाँकि इस फिल्म ने विदेशो में सफलता के झंडे गाड दिए थे |

अनिल कपूर का अंदाज़

मुख्य भूमिका में अपनी फिल्म वो सात दिन (woh saat din) से लेकर अपनी करियर की 42 फिल्मो में लगातार मूंछो (mustache) में ही नज़र आये थे मगर इस फिल्म में वो बिना मूंछो के थे हालाँकि आधी फिल्म के बाद वो फिर से मूंछो में आ जाते है | बिना मूंछ का अनिल कपूर कुछ लोगो को पसंद आया तो कुछ नहीं कई वर्षो तक अनिल कपूर का उनके इस अंदाज़ को लेकर मजाक बनाया | इस फिल्म के बाद 2007 में आयी “सलाम-ए-इश्क़” (Salaam-e-Ishq) में एक बार फिर अनिल कपूर बिना मूंछो के सिल्वर स्क्रीन पर नज़र आये |

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फिल्म का गीत-संगीत

फिल्म का संगीत शिव कुमार शर्मा और हरीप्रसाद चौरसिया की जोड़ी ने दिया था, जिन्हें बॉलीवुड में शिव-हरी के नाम से जाना जाता है | फिल्म के गीत आनंद बक्षी ने लिखे थे | फिल्म का संगीत सदाबहार होने के कारण कभी मैं कहूं, मोरनी बागा मा बोले आधी रात मा और मेघा रे मेघा आज भी बिलकुल तरोताजा लगते है | फिल्म के सुपरहिट गीत “कभी मैं कहूं” को यश चोपड़ा ने सबसे पहले अपनी पिछली फिल्म में चांदनी में बैकग्राउंड म्यूजिक के तौर पर इस्तमाल किया था |

अवार्ड

फिल्म को बेस्ट कॉस्टयूम के लिए 39वा नेशनल अवार्ड मिला था | इसके अलावा 37वे फिल्मफेयर अवार्ड में बेस्ट फिल्म, बेस्ट नायिका के लिए श्री देवी, बेस्ट स्टोरी के लिए हनी ईरानी, बेस्ट कॉमेडियन के लिए अनुपम खेर और बेस्ट डायलॉग के लिए राही मासूम रजा को पुरस्कार से नवाज़ा गया था |

ख्याति

बॉलीवुड के 100 साल पूरे होने पर 2013 में इस फिल्म को टॉप 10 रोमांटिक फिल्मो की श्रेणी में शामिल किया गया है | आउटलुक मैगज़ीन ने लम्हे को बॉलीवुड की बेस्ट फिल्मो में शामिल किया है |

वहीदा रहमान का डांस

1965 में आयी मास्टरपीस फिल्म गाइड के गीत “आज फिर जीने की तमन्ना है” को एक बार फिर इस फिल्म में दोहराया गया, जिस पर वहीदा रहमान ने नृत्य (dance) भी किया है और इस गीत को यश चोपड़ा की धर्मपत्नी पामेला चोपड़ा ने गाया था |

ये बॉलीवुड का दुर्भाग्य ही है कि एक बेहतरीन मास्टरपीस को लोगो ने ऐसे ही नकार दिया |


 

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Title: lamhe a masterpiece film of yash chopra yash raj which is the least mentioned in Hindi  | In Category: आलेख bollywood article

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