• महमूद और अमिताभ बच्चन के रिश्ते बेहद घनिष्ठ थे

  • अमिताभ के बॉलीवुड में स्थापित होने में भी महमूद की ही अहम भूमिका

  • आखिरी दिनों में दिए इंटरव्यू में महमूद ने अमिताभ के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की

मुंबई 29 सितम्बर (एजेंसी) बताया जाता है कि बॉलीवुड के लीजेंड कॉमेडियन और डायरेक्टर महमूद और अमिताभ बच्चन के रिश्ते बेहद घनिष्ठ थे। इतना ही नहीं, अमिताभ के बॉलीवुड में स्थापित होने में भी महमूद की ही अहम भूमिका थी । बताया जाता है जब अमिताभ बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब महमूद ने उन्हें अपने साथ अपने घर में रखा, फ़िल्में दिलाईं और तो और अपनी फिल्मों में काम तक दिया। मगर इसके बाद अमिताभ ने ऐसी बुलंदी छुई कि फिर पीछे पलट के नहीं देखा । अपने आखिरी दिनों में दिए इंटरव्यू में महमूद ने अमिताभ के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी ।

अमिताभ बच्चन ने अपने एक इंटरव्यू में महमूद से अपनी मुलाकात और उनके एहसानों का ज़िक्र करते हुए कहा था कि उन्हें हम भाईजान कहते थे। वे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के महानतम कॉमेडियन हैं। उनके भाई अनवर अली और मैं, मेरी पहली फ़िल्म सात हिंदुस्तानी के सेट पर मिले। वो भी एक रोल कर रहे थे। तब से हम करीबी दोस्त बन गए। मैं उनके साथ उनके अपार्टमेंट में भी रहा जो एक बड़े कॉम्पलेक्स में बना हुआ था, जो महमूद भाई का था। उसमें उनका बड़ा परिवार रहता था। महमूद भाई मेरे करियर के शुरुआती ग्राफ में मदद करने वालों में से थे। उनका मुझ पर पहले दिन से भरोसा था। वो मुझे न जाने क्यों, डेंजर डायबॉलिक कह कर बुलाते थे। वो पहले प्रोड्यूसर थे जिन्होंने मुझे लीड रोल दिया था बॉम्बे टू गोआ में। जब मेरी कई फिल्में फ्लॉप होने लगी थी तो मैंने घर जाने का मन बना लिया था लेकिन जैसे महमूद भाई को यह बात पता लगी उन्होंने मुझे जाने से रोक लिया। अगर उस दिन वो न होते तो मैं आज यहां न होता।

वहीँ एक इंटरव्यू में अमिताभ के प्रति नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए महमूद ने कहा था कि मेरा बेटा अमित आज 25 साल का हो गया है। फिल्म लाइन में। अल्ला उसे सेहत दे। ऊरूज पर रखे। जिसको मैंने काम दिया, मैं उसके पास काम मांगने जाऊं तो मुझे शर्म नहीं आएगी? इसलिए मैं नहीं गया। जिस आदमी को सक्सेस मिले उसके दो बाप हो जाते हैं। एक बाप वो जो पैदा करता है और एक बाप वो जो पैसा कमाना सिखाता है। तो पैदा करने वाला बाप तो बच्चन साहब है हीं और मैं वो बाप हूं जिसने कमाना सिखाया। अपने साथ में रख के। घर में रख के। पिक्चरें दिलाईं। पिक्चरों में काम दिया। बहुत इज्जत करता है अमित मेरी। बैठा होगा, पीछे से मेरी आवाज सुनेगा, खड़ा हो जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि लेकिन आखिर में मुझे इतना फील हुआ जब मेरा बाइपास हुआ, ओपन हार्ट सर्जरी। उसके फादर बच्चन साहब (हरिवंशराय) गिर गए थे तो मैं उन्हें देखने के लिए अमित के घर गया, एक कर्टसी है। और उसके एक हफ्ते बाद जब मेरा बाइपास हुआ तो अमित अपने वालिद को लेकर वहां आए ब्रीच कैंडी (अस्पताल), जहां मैं भर्ती था, लेकिन अमित ने वहां ये दिखा दिया कि असली बाप असली होता है और नकली बाप नकली होता है। उसने आके मुझे हॉस्पिटल में विश भी नहीं किया। मिलने भी नहीं आया। एक गेट वेल सून का कार्ड भी नहीं भेजा। एक छोटा सा फूल भी नहीं भेजा। ये जानते हुए कि भाईजान भी इसी हॉस्पिटल में हैं। खैर, मैं बाप ही हूं उसका और कोई बद्दुआ नहीं दी। आई होप, दूसरों के साथ ऐसा न करे।

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