Angreji me kehte hai Movie Review in hindi

क्या प्यार शादी के बाद भी संभव है ? प्यार और शादी निभाने में बहुत फर्क होता है, कही आपका प्यार भी तो शादी निभाने के चक्कर में कहीं गुम तो नहीं हो रहा है | ऐसे ही आम आदमी की शादीशुदा जिंदगी से जुड़े सवालों पर एक सार्थक फिल्म प्रदर्शित हुयी है, फिल्म का नाम है अंग्रेजी में कहते है | फिल्म का निर्देशन हरीश व्यास ने किया है |

अपनी शादी की सिल्वर जुबली बना चुज्के यशवंत बत्रा और उनकी पत्नी किरण बत्रा एक साधारण सा जीवन व्यतीत कर रहे है। वाराणसी निवासी यशवंत सरकारी नौकरी में कार्यरत है, जिनका मानना है कि पत्नी की जगह किचन और बेटी प्रीति की जगह ससुराल में होती है।

बत्रा जी की बेटी अपने पडोसी से प्यार करती है, जब यशवंत को इस बात का पता चलता है तो बाप-बेटी में ठन जाती है |यही से कहानी एक नया मोड़ ले लेती है | किरण यशवत को छोड़कर अपने मायके चली जाती है, उस वक़्त तो यशवंत किरण को नहीं रोकता, परन्तु बाद में उसे पत्नी की कमी खलने लगती है और धीरे धीरे यशवंत को अपनी गलतियों का एहसास होता है और एक सवाल आ खड़ा होता है कि क्या यही प्यार है ? आगे क्या होता है यह तो फिल्म देखकर ही पता चलेगा, अत: आप सिनेमा घरों की तरफ रुख करे | एक खुबसूरत सोच दिखाती इस फिल्म को सभी को देखना चाहिए |

रूटीन फिल्मों से अलग यह फिल्म आपको लुभाने में कोई कमी नहीं छोडती | संजय मिश्रा का अभिनय बढ़िया है, तो पंकज त्रिपाठी व बृजेंद्र काला कहानी में अपने अपने किरदार को बखूबी निभा जाते है | इप्शिता चक्रवर्ती और अंशुमन झा अपने किरदार मे बिलकुल फिट है | एकावली खन्ना किरण के रोल में लुभाती है | छोटे बजट वाली के सफल होने की उम्मीद अधिक है और यदि ऐसा होता है तो इसका कारण पंकज त्रिवेदी और संजय मिश्रा होंगे |

 

 

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