Gold movie review in hindi:

 अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। विकी कौशल के भाई सनी कौशल फिल्म् गोल्ड से बॉलीवुड में करियर की शुरुआत कर रहे हैं। उनके काम को दर्शकों ने सराहा है। खुलासा डॉट इन में पढ़िए फिल्म् गोल्ड का रिव्यू।

अभी कुछ दिनों पहले एक हॉकी प्लेयर के जीवन पर आधारित सूरमा आई थी, जिसने पैसों से अधिक तारीफें लूटी। अक्सर देखा गया है कि खेलों पर आधारित फिल्में देशभक्ति का जज़्बा जगाने में पूरी तरह से कामयाब रहती हैं और शायद यहीं वजह है कि फिल्ममेकर्स भी खुद इस विषय के प्रति आकर्षित होने से खुद को बचा नहीं पाते । इसी कड़ी में नया नाम है रीमा कागती निर्देशित अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड । निर्देशक के तौर पर यह रीमा की तीसरी फिल्म है, चूँकि रीमा काफी समय से फरहान अख्तर के बैनर से जुडी रही हैं उनके बैनर की कई फिल्मों में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम भी किया है अत: फरहान अख्तर ने इस बार भी रीमा को अपनी काबिलियत दिखने का एक मौका दिया है। अक्सर 2 (Aksar 2) मूवी रिव्यु पढ़ें।

फिल्म की कहानी तपन दास नामक एक बंगाली की है, जो हॉकी से बेइंतहां मोहब्बत करता है। तपन के अंदर कई बुरी आदत है, मगर इन सबके साथ उसका एक सपना भी है कि वो भारत को हॉकी में गोल्‍ड जीताये। दो बार उसका सपना टूट जाता है। इसके बावजूद तपन दास सपने को मरने नहीं देता और काफी मेहनत और जद्दोजहद के बाद  आजाद भारत की पहली हॉकी टीम बनाता है, जो 1948 के ओलम्पिक गेम्स में इंग्लैंड को उनके घर में धूल चटाकर आजाद भारत को उसका पहला ओलम्पिक गोल्ड दिलाती है।

फिल्म में अक्षय कुमार के कई रंग देखने को मिलते है, कभी वो हँसाते है तो कभी अपनी बातों से इमोशनल कर देते हैं। इस फिल्म में सिर्फ अक्षय ही नहीं बल्कि अन्य सभी किरदार भी जानदार लगे हैं। कुणाल कपूर ने काबिल-ए-तारीफ काम किया है। गैंग ऑफ़ वासेपुर से एक बड़ा ब्रेक लेने के बाद मुक्काबाज़ से अपनी पहचान बनाने वाले विनीत कुमार सिंह इस बार भी दमदार साबित होते हैं। अमित साध, सनी कौशल और दलीप ताहिल अपने अपने हिस्से को बखूबी निभा गए है | मोनी रॉय खुबसूरत दिखने के साथ साथ अपने किरदार के साथ भी पूरा न्याय करती हैं।

फिल्म को पुराने ज़माने का लुक देने में काफी मेहनत की गयी है। सिनेमटॉग्रफी और बैकग्राउंड स्कोर तकनीक और गुणवत्ता के मामले में काफी कमाल के हैं। फिल्म में कुछ गाने ज़बरदस्ती ठुसे गए हैं, जो फिल्म को खींचने का काम करते हैं। फिल्म अच्छी है मगर इसे बेहतर बनाया जा सकता था। फिल्म की सबसे बड़ी कमी यहीं है कि इस फिल्म पर एडिटिंग वर्क ढंग से नयी किया गया है, जिसके चलते कई इमोशनल सीन्स भी आपको इमोशनल नहीं कर पाते, उल्टा आप खुद उन सीन्स को पचा नहीं पाते। आज कल चारों और देशभक्ति का माहौल बना हुआ है अत: आप देशभक्ति के नाम पर अपनी जेब ढीली कर सकते हैं ।

Gold Real Story: Akshay Kumar Recreates the 1948 London Olympics Story

 

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