Khajoor pe atke movie review in hindi: तारा, आरोहण, बालिका वधु जैसे धारावाहिक और मिथ्या, दिल पे मत ले यार, घात और साया जैसी फिल्मों ने अभिनय करने वाले हर्ष छाया पहली बार निर्देशक के रूप में लेकर आये हैं खजूर पे अटके।  इस फिल्म में विनय पाठक, मनोज पावा, सीमा भार्गव, साना कपूर, अलका अमीन, डॉली डॉली अहलूवालिया और सुनीता सेनगुप्ता ने मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म एक स्वस्थ पारिवारिक हास्य मनोरंजन है।

कहानी का केंद्र बिंदु देवेन्द्र शर्मा है, मौत जिसके दरवाजे पर बैठी है, जिसके चलते उसे मुंबई के एक हॉस्पिटल में भर्ती है। आईसीयू में भर्ती देवेन्द्र के दो भाई और एक बहन, अपने अपने परिवार के साथ उनके अंतिम दर्शन करने आते हैं। फिल्म का हर किरदार कुछ न कुछ समस्या के साथ इस हॉस्पिटल में आया है। इनकी समस्या ही आपको हँसाने का कार्य करती है। इसी बीच एक दिन देवेन्द्र का राम नाम सत्य हो जाता है, परन्तु इस फिल्म का क्लाइमेक्स एक सबक बन जाता है । आखिर ऐसा क्या होता है ये जानने के लिए तो आपको सिनेमा घरों तक जाना होगा। फिल्म का फर्स्ट हाफ बेहद मजबूत है तो सेकंड हाफ में कहानी डगमगाती नज़र आती है,फिर भी हर्ष छाया के इस पहले प्रयास के लिए वो बधाई के पात्र तो बनते है।

मनोज पावा, अलका अमीन, डॉली अहलूवालिया और सीमा भार्गव अपने अभिनय से दिल जीत लेते है, जबकि इस बार विनय पाठक कुछ खास कमाल करते हुए नज़र नहीं आते। फिल्म शानदार के बाद एक बार फिर साना कपूर को देखना अच्छा लगता है  और उन्होंने अपना वेट भी कण्ट्रोल किया जो कि नज़र आता है। फिल्म की कास्टिंग और सहयोगी कास्ट परफैक्ट व दिलचप्स है, जो कि आपको हँसाने में कोई कसर बाकी नहीं रखती। जब कई मंझे हुए कलाकार एक ही पर्दे पर नज़र आये तो उस फिल्म को देखना तो लाज़मी बनता है।

Khajur Pe Atke Movie Review: Vinay Pathak | Manoj Pahwa | Seema Pahwa | Harsh Chhaya

 

 

 

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