Newton movie review in hindi : न्यूटन (Newton) कहानी है उस वर्ग की जिसको नेता और आम जनता दोनों ही अक्सर नज़रंदाज़ करते है | फिल्म 92,300 वर्ग किलोमीटर में फैले दंडकारण्य में रहने वाली जनता की बात करती है । छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना की सीमा से लगा हुये, इस क्षेत्र को पिछले काफी वर्षो से माओवादियों का गढ़ माना जाने लगा है | यहाँ के क्षेत्रवासियों की अपनी ही दुनिया है जो कि आज की दुनिया से बहुत ही पीछे है । यहाँ के वासियों को न तो दिल्ली में बनी सरकार से, आईफोन मोबाइल (Iphone mobile) से और न ही GST जैसे फैसलों से कोई फर्क नही पड़ता । फिल्म का नायक भी यहाँ जाता है और इलेक्शन (Election) के महत्व को समझाता है | न्यूटन जवाब तो दंडकारण्य के वासियों को दे रहा होता है मगर इन जवाबो में पूरे समाज से सवाल कर रहा होता है |

न्यूटन (Newton) फिल्म की कहानी एमएससी पास एक आशावादी लड़के की है जिसका नाम है नूतन कुमार | न्यूटन सरकारी विभाग में कार्यरत है और विभाग का नाम है इलेक्शन कमीशन (Election commission) | नूतन कुमार न्यूटन (Newton) क्यों बनता है ये फिल्म के एक डायलॉग से साफ़ तौर पर ज़ाहिर हो जाता है, न्यूटन कहता है – ““मां-बाप ने नूतन कुमार नाम रखा था तो सब लोग बहुत मजाक उड़ाते थे, तो  मैंने टेंथ के फॉर्म में ‘नू’ का ‘न्यू’ और ‘तन’ का ‘टन’ कर दिया ।”  मगर कहानी में रोमांचक मोड़ तब आता है, जब न्यूटन नक्सल प्रभावित इलाके में चुनाव करवाने की जिद्द ठान लेता है | चूँकि ऐसे इलाको हर समय गोली चलने का और जान जाने का डर लगा रहता है तो यहाँ चुनाव कराना बेहद टेड़ी खीर होता है । इस बात को जानते हुए भी न्यूटन नक्सली इलाके  में मतदान कराने के साथ साथ वहां के वासियों को चुनाव का मतलब समझाने और इसके प्रति जागरुक करने के लिए आगे आ जाता है । फिल्म में न्यूटन कहता भी है – “मेरे से भी पहले बहुत पहले एक न्यूटन था । पढ़ाई करते वक्त उसकी बात कभी समझ नहीं आई, पर अब काम करते वक्त आ रही है कि जब तक कुछ नहीं बदलोगे न दोस्त तो कुछ नहीं बदेलगा ।” इसी ताने बाने के बीच फिल्म आपको हँसाती भी है और आपके लिए कई सवाल भी छोड़ जाती है |

राजकुमार राव (Rajkumar Rao) एक के बाद एक बेहतरीन फिल्मे कर रहे है और यक़ीनन ये उनके अब तक के कैरियर की सबसे बेहतरीन फिल्म है | फिल्म का निर्देशन गज़ब का है और सिनेमेटोग्राफी लाजवाब है । सह-कलाकारों में पंकज त्रिपाठी, अंजली पाटिल, रघुबीर यादव और संजय मिश्रा ने अपने किरदार बखूबी निभाए है । नये निर्देशक होने के बावजूद अमित मसुरकर की फिल्म पर पकड़ बेहद मजबूत है | फिल्म की जितनी तारीफ की जाए वो कम है । फिल्म की पूरी यूनिट की मेहनत का ही रंग है कि फिल्म को ऑस्कर (Oscar ) के लिए भेजा जा रहा है, इसलिए फिल्म की पूरी यूनिट को बधाई ।

वीडियो में देखिए Full Movie Review | Newton | Rajkumar Rao | Pankaj Tripathi

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