Satyamev jayate movie review in hindi:

स्वतंत्रता दिवस पर इस साल सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है सत्यमेव जयते। युं तो फिल्म एक्शन से भरपूर है लेकिन कहानी कुछ कमजोर नजर आती है। सत्यमेव जयते को अक्षय कुमार की फिल्म गब्बर इज बैक से भी जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि फिल्म के एक्शन सीन्स की तारीफ की जा रही है।

यदि आप फिल्मों के शौक़ीन हैं तो आपने 90’s के दौर की सुपरहिट फिल्म शहंशाह जरूर देखी होगी। अमिताभ बच्चन के करियर की सुपरहिट फिल्मों में से शहंशाह एक ऐसी फिल्म थी, जिसमे दमदार डायलॉग थे, एक्शन सीन्स थे, फैमिली ड्रामा था और साथ में एक लाइन को स्टोरी थी। नायक के पिता, जो कि पुलिस विभाग में है, को झूठे इल्जाम में फंसाकर नौकरी से निकलवा दिया जाता है। अपमान के घूंट पीते हुए वो आत्महत्या कर लेता है। अब बेटा अपने बाप की मौत का बदला लेने की ठान लेता है और एक एक कर के सब मुजरिमों में सजा देता है। 90’s के दशक में ऐसी कहानी वाली सैकड़ों फिल्मे बनी और कोई हिट या फ्लॉप का तमगा लेकर आज बीते ज़माने की बात बन गयी। फिल्म सत्यमेव जयते भी इसी कहानी की जनता की जेब पर मार है।

एक इन्सान एक एक कर के सभी बे-ईमान पुलिस वालों को मार रहा है, ऐसे में शहर के कमिशनर छुट्टी पर गए अपने ईमानदार ऑफिसर को वापस बुलाता है और केस सँभालने की जिम्मेदारी देता है। चूहे-बिल्ली का खेल शुरू हो जाता है। फर्स्ट हाफ बहुत कसा हुआ है और आपको यह चूहे-बिल्ली का खेल देखने में मज़ा भी खूब आएगा।

फर्स्ट हाफ खत्म होने से पहले एक नया ट्विस्ट आता है कि कातिल और पुलिस का ईमानदार ऑफिसर भाई-भाई है। सेकंड हाफ शुरू होने के बाद कहानी में फ्लैशबैक आता है, जिससे पता चलता है कि यह दोनों भाई एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर के बेटे है तथा इनके पिता को झूठे इल्जाम में फंसा कर नौकरी से निकाल दिया था ।आत्मग्लानि में इनके पिता खुद को आग लगा लेते हैं और इसी वजह से कातिल सभी बे-ईमान पुलिस वालों को जलाकर मार रहा है। जहाँ बड़ा बेटा पुलिस विभाग का ईमानदार और काबिल ऑफिस बनता है, तो छोटा बेटा पेंटिंग करने के अलावा एक सीरीज से सारे बे-ईमान पुलिस ऑफिसर को मारने का ज़िम्मा उठाये फिरता है। इस फिल्म में दोनों भाइयों की नायिका भी है, मगर क्यों है, समझ से परे है। सेकंड हाफ बिलकुल कमजोर है, जिसके चलते सेकंड हाफ में आप सोने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

अगर बात एक्टिंग की जाए तो जॉन अब्राहम एक बार फिर एक्शन अवतार में जमते हैं, मगर मिलाप मिलन जवेरी का ख़राब निर्देशन न सिर्फ जॉन का बल्कि मनोज वाजपेयी का भी शिकार करता है, फिर भी मनोज अपना 100% देने का पूरा प्रयास करते हैं। आयशा शर्मा के लिए फिल्म में कुछ भी नहीं था अत: उन्हें बॉलीवुड में एंट्री करने के लिए किसी और फिल्म का चयन करना चाहिए था। कमजोर निर्देशन ने फिल्म को कहीं का नहीं छोड़ा, मगर मिलाप चाहते तो 90’s के इस फॉमूर्ले पर एक ज़बरदस्त फिल्म बना सकते थे।

 

Satyamev Jayate PUBLIC REVIEW | FIRST DAY FIRST SHOW | John Abraham, Manoj Bajpayee

 

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