फिल्म समीक्षा

जुड़वाँ 2 : दाल में तडके की कमी

जब एक ही कहानी को बार बार घुमाया जाए तो उसमे मनोरंजन के नये तडके लगने की आस दर्शको के मन में जागृत होना लाज़मी है | सबसे पहले 1992 में जैकी चैन (Jackie Chan) इस कहानी को लेकर अपने दीवानों के लिए इस फिल्म को लाते है, जिसे साउथ के निर्देशक भारतीय तड़का लगाकर हेल्लो ब्रदर के नाम से लोगो के सामने पेश करते है | 1994 में दक्षिण भारतीय सिनेमा के सिमित होने के कारण फिल्म सिर्फ दक्षिण भारत में ही रह जाती है | 1997 डेविड धवन इस कहानी को दक्षिण भारत के सिनेमा से उठाते है, जैसा वो पहले भी कई बार कर चुके है, और सलमान खान स्टारर जुड़वाँ को भारतीय सिनेमा के सामने लाते है | फिल्म सफलता के झंडे गाद देती है | सुपरहिट हिट गीत संगीत और स्वस्थ हास्य फिल्म की गारंटी बनता है | ऐसे में 2017 में जब एक बार फिर उसी कहानी को दोहराया जाता है तो लोगो की उम्मीदे बढ़ जाती है | मगर जब दर्शक सिनेमा घर से बाहर आते है तो खुद को लूटा हुआ सा महसूस करते है | न तो ये सलमान की जुड़वाँ से बेहतर साबित होती है और न ही फिल्म में कुछ खास है जो फिल्म को मस्ट वाच बनाती हो | हास्य की दाल में मनोरंजन के तडके की कमी साफ़ तौर पर झलकती है |

फिल्म की वही कहानी है जो सलमान की जुड़वाँ की थी | दो भाई, जो बचपन में बिछड़ जाते है, फिर अचानक मिल जाते है | इन भाइयों के बाप का एक पुश्तैनी दुश्मन भी है |  आखिर में दोनों भाई मिल जाते है और अपने बापके दुश्मन का खात्मा कर देते है | मूल रूप से फिल्म की कहानी 90 के दशक की है और कमाल की बात ये है कि 2017 में भी ये 90 के दशक की ही याद दिलाती है, कोई इम्प्रोव्मेंट नही | जो कि फिल्म की पहली कमजोर कड़ी है |

तापसी पन्नू जैसी बेहतरीन कलाकर इस फिल्म में सिर्फ शोपीस नज़र आती है | क्या इस फिल्म को करना तापसी की मज़बूरी थी ? जैकलीन फर्नांडिस हमेशा की तरह परदे पर अपनी खूबसूरती के जलवे बिखेरती नज़र आती है, आखिर उन्हें फिल्मो में रखा भी इसीलिए जाता है | अब बात करते है फिल्म के मुख्य हीरो वरुण धवन की |

वरुण अपनी पिछली कुछ फिल्मो से लोगो का मनोरंजन करने की कोशिश कर रहे है और अपने प्रयास में धीरे धीरे कमजोर होते हुए वो जुड़वाँ 2 जैसी फिल्म कर लेते है | मुझे वरुण की पिछली फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हियाँ भी कुछ खास नही लगी मगर जुड़वाँ 2 उससे भी पीछे है | सचिन खेडेकर, प्राची देसाई, जाकिर हुसैन, राजपाल यादव, जोनी लिवर, अनुपम खेर, अली असगर, पवन मल्होत्रा और विवान भटेना जैसे कलाकर होने के बावजूद फिल्म में किसी की भी एक्टिंग प्रभावित नही करती | न ही तो हास्य दृश्यों पर हँसना आता है और न ही इमोशनल दृश्यों पर भावुकता |

 

 

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Title: judwaa 2 lack of tempering in pulses in Hindi  | In Category: फिल्म समीक्षा movie_review

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सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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