फिल्म समीक्षा

ओमर्टा film review : उमर सईद शेख की बायोपिक जिसे देखकर आप सिहर जाएंगे

ओमर्टा, बॉलीवुड फिल्मों के शौक़ीन लोगों को शायद यह नाम अजीब लगे, ओमर्टा का अर्थ बेहद गंभीर है। दरअसल ओमर्टा एक इटालियन शब्द है, जिसका मतलब होता है ख़ामोशी। जहाँ सेंसर बोर्ड ने फिल्म के रिलीज होने से पहले ही इस फिल्म पर दो दृश्यों पर कैची चलायी है, हालाँकि अब फिल्म रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म की लम्बाई 1 घंटा 30 मिनट है, जो कि हंसल मेहता की सबसे छोटी फिल्म है। इस फिल्म का निर्देशन हंसल मेहता ने किया है और मुख्य भूमिका में राजकुमार राव है। इस जोड़ी की शुरुआत फिल्म शाहिद से हुयी थी, जिसके बाद यह दोनों सिटीलाइट और अलीगढ में भी अपने जादू को कायम रखते हुए नज़र आये थे | अब इस जोड़ी की नयी पेशकश है ओमर्टा।

ओमर्टा कोई काल्पनिक कहानी न होकर सत्य घटना पर आधारित है। कहानी पढ़े-लिखे व समझदार अहमद उमर सईद शेख की है, जो बोस्निया में अपने मुस्लिम भाई-बहनों पर बढ़ते अत्याचारों से अंदर तक दुखी हैं। वो चाहता है कि वो इनकी मदद करे और इसी उद्देश्य के साथ वो लंदन के एक मौलाना से अपने मन की बात साझा करता है। यहीं से कहानी एक नया रुख लेती है। पहले उमर का ब्रेनवॉश और उसके बाद ट्रेनिग देकर बेहद खुंखार आतंकवादी बना दिया जाता है। हालाँकि उमर के पिता सईद शेख उसे समझाने की कोशिश करते हैं, परन्तु वो किसी की नहीं सुनता । परन्तु ट्रेनिंग के बाद उमर बोस्निया के बजाय कश्मीर के उद्देश्य पर कार्यरत हो जाता है, जिसका कारण उसके दिमाग में डाले गये विचार होते है, जिसके चलते उसे लगता है बोस्निया की ही तरह कश्मीर में भी उसकी कौम के साथ अत्याचार किया जा रहा हैं। कई आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देते हुए उमर दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादियों की सूची में शामिल हो गया जाता है । वर्ष 2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या के आरोप में उमर को गिरफ्तार किया जाता है तथा मौत की सजा दी जाती है। पंरतु आज तक इस पर तामील नहीं हो सका है। यही फिल्म का आखिरी दृश्य है |

फिल्म में 1994 में भारत में विदेशी नागरिकों के अपहरण, 1999 में कंधार विमान अपहरण के बाद तीन आतंकवादियों की रिहाई, 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर आतंकवादी हमला, पाकिस्तान में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या और 2008 में मुंबई पर आतंकवादी हमले की घटनाओं को जस का तस चित्रण किया गया है। हंसल मेहता बधाई के पात्र है कि उन्होंने अन्य निर्देशकों की तरह फिल्म के विषय से किसी प्रकार की कोई छेड़छाड़ नहीं किया है और घटनाओं को उनके मूलरूप में ही पेश किया है अत: इस फिल्म न कहकर डाक्यूमेंट्री ड्रामा कहा जाए तो कोई गलत नहीं होगा। फिल्म की गति थोड़ी धीमी है, परन्तु फिल्म का विषय ही ऐसा है जिसमे फिल्म को दौड़ाया नहीं जा सकता था। फिल्म का गीत संगीत ठीक-ठाक है |

यदि अभिनय की बात की जाए तो फिल्म में सिर्फ राजकुमार राव ही नज़र आते है और वो अपने प्रसंशकों को निराश नहीं करते है। राजकुमार एक उम्दा कलाकार है, इसमें कोई शक नहीं है। एक आतंकवादी के किरदार में राजकुमार इतना रम गये कि आपको भी कही कही पर लगने लगेगा कि ये कैसा निर्दय और क्रूर इंसान है। आप भूल जायेंगे कि आप अपने पसंदीदा कलाकार को देखने आये हैं, आप फिल्म को देख उसे उसकी क्रूरता के लिए कोसते हुए नज़र आयेंगे।

यकीनन यह एक बेहतरीन फिल्म है, परन्तु यदि आप नाच गाने के उद्देश्य से भरी फिल्म देखते है तो यह फिल्म आपके लिए नहीं है। यदि आप विषय प्रधान फिल्मों के शौक़ीन है तो ओमर्टा आपको निराश नहीं करेगी।

 

वीडियो में देखिए फिल्म का रिव्यू

Read all Latest Post on फिल्म समीक्षा movie_review in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें
Title: omerta movie review a surprisingly passion less biopic of omar saeed sheikh in Hindi  | In Category: फिल्म समीक्षा movie_review

मिली जुली फिल्म समीक्षा

  1. Film review सत्यमेव जयते : लगता है 90’s का दौर वापस आ रहा है
  2. Film review Gold: दर्शकों में देशभक्ति का जुनून पैदा करती अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड
  3. साहेब, बीवी और गैंगस्टर 3 : पुरानी और बासी पेशकश
  4. Film review: मिशन इम्पॉसिबल फॉलआउट : एक्शन का दमदार पैक
  5. SOORMA FILM REVIEW:  सूरमा किसी सूरमे से कम नहीं  
  6. Sanju : sanju movie review in hindi: रणबीर कपूर की दमदार प्रस्तुति
  7. Race 3 movie review: सलमान की लगातार तीसरी कमजोर पेशकश
  8. फिल्म समीक्षा वीरे दी वेडिंग : हॉलीवुड मसाले को बॉलीवुड थाली में परोसना
  9. फिल्म रिव्यू भावेश जोशी सुपरहीरो : एक बार फिर वहीँ दास्ताँ
  10. फिल्म रिव्यू परमाणु – देशभक्ति का नया जज्बा
  11. फिल्म रिव्यू सोलो : ए स्टार वॉर स्टोरी, नए दमखम के साथ वापसी
  12. फिल्म रिव्यू: बायोस्कोपवाला : कई रंगों में रंगी कहानी
  13. अंग्रेजी में कहते है मूवी रिव्यु : क्या यही प्यार है ?
  14. डेडपूल 2 : इस मज्जेदार फिल्म में बच्चों की एंट्री है मना
  15. फिल्म रिव्यू खजूर पे अटके : एक स्वस्थ फैमिली हास्य मनोरंजन
  16. ओमर्टा film review : उमर सईद शेख की बायोपिक जिसे देखकर आप सिहर जाएंगे
  17. 102 Not Out movie review: ये जीना भी कोई जीना है लल्लू
  18. Film review: एवेंजर्स इफिनिटी वॉर, अभी पिक्चर बाकी है मेरे दोस्त
  19. Daas Dev Review: : सुधीर मिश्रा की बेहतरीन पेशकश दास देव
  20. अक्टूबर film review : दिल से महसूस करो इस प्यार को
  21. बागी 2 movie review: एक्शन से भरपूर मसाला फिल्म
  22. Film reiview Hichki : लोगों का दिल जीत लेगी रानी मुखर्जी की 'हिचकी'
  23. Film review: ब्लैक शीप कहानी जिसे समझने के लिए दिमाग लगाते रहिए!
  24. Film review: रेड : अभिनय और कहानी के दम पर जीत लेगी आपका दिल
  25. Film review 3 स्टोरीज : उलझे रिश्तों को सुलझाने की कोशिश  
  26. Hate Story 4 Movie Review: : मोहब्बतों में सियासतों की साजिशें जानिए कैसी है फिल्म
  27. FILM REVIEW : "वीरे की वेडिंग" का न्योता नहीं मिला है तो आप भाग्यशाली हैं
  28. परी मूवी रिव्यू : डर से डर लगता है  
  29. सोनू के टीटू की स्वीटी : दोस्ती और कॉमेडी का कॉकटेल
  30. वेलकम टू न्यू यॉर्क : स्टारडम और हँसी एक साथ
  31. कुछ भीगे अल्फाज : दो अनजाने अजनबी
  32. अय्यारी : नीरज पांडे की एक कमजोर कोशिश  
  33. पैडमैन : सिर्फ और सिर्फ अक्षय कुमार
  34. कुलदीप पटवाल : आई डिड नॉट डू इट, काफी हद तक आम आदमी की कहानी  
  35. वोदका डायरीज : बेहतरीन कलाकारों की कमजोर प्रस्तुति
  36. निर्दोष : कमजोर कहानी भारी पड़ी अभिनय पर
  37. माय बर्थडे सॉन्ग : सपना या हकीकत
  38. मुक्काबाज : आँखे खोलता हुआ पंच
  39. कालाकांडी : चीजों का बुरी तरह गड़बड़ा जाना
  40. 1921 : डराती कम है और हँसाती ज्यादा
  41. टाइगर जिन्दा है : एक बार फिर सिर्फ और सिर्फ सलमान
  42. स्टार वार्स: द लास्ट जेडी
  43. मॉनसून शूटआउट : क्या गलत क्या सही
  44. फुकरे रिटर्न्स : पहले के मुकाबले में कुछ कम
  45. गेम ओवर : सस्पेंस की कमजोर कड़ी 
  46. तेरा इंतजार : कभी कभी पैसो की बचत भी जरुरी है
  47. फिरंगी : न देशी, न विदेशी
  48. तुम्हारी सुलू – सपनो की उड़ान
  49. अक्सर 2 : कुछ तो अधूरा है
  50. इत्तेफाक : कही कोई इत्तेफाक नहीं
  51. थॉर राग्नारोक : साम्राज्य की जंग
  52. रांची डायरीज : मुख्य पृष्ठ से आकर्षक अंदर से बकवास
  53. मुआवजा : ज़मीन का पैसा
  54. शेफ : वेलकम बेक सैफ
  55. सिमरन : कॉमेडी या क्राइम ड्रामा
  56. पटेल की पंजाबी शादी : फीकी फीकी सी जलेबी
  57. लखनऊ सेंट्रल : ख्वाबों का जैसे टूट जाना
  58. न्यूटन : जवाब नही, सवाल है ये
  59. किंग्समैन द गोल्डन सर्कल : इनका अंदाज़ है अलग
  60. भूमि : सिर्फ और सिर्फ संजय दत्त  
  61. जुड़वाँ 2 : दाल में तडके की कमी
  62. ए जेंटलमैन : सुंदर सुशील रिस्की
  63. बादशाहों : ऊंची दूकान के फीके पकवान
  64. बाबुमोशाय बन्दूकबाज़ : यमराज का एजेंट

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *