• शख्स ने अमिताभ को कहा मेरी इच्छा है कि आप कोविड-19 से मर जाएं

  • अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी

  • भगवान के आशीर्वाद से मैं बच गया तो फिर तुम लोगों के गुस्से का तूफान झेलोगे

मुंबई 28 जुलाई (एजेंसी) बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन जब से कोरोना से ग्रसित होकर हॉस्पिटल में भर्ती है तब से उनके फैन्स लगातार उनके लिए दुआ मांग रहे है और शुभकामनाओं भेज रहे है। 11 जुलाई से कोरोना वायरस से जंग लड़ रहे अमिताभ के साथ एक बेहद ही अजीब किस्सा हुआ हैं। जहाँ एक तरफ जहाँ उनके चाहने वाले और करीबी उनके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं, वहीँ दूसरी तरफ कई लोंग ऐसे भी है जो अमिताभ बच्चन के लिए गलत शब्दों का लगातार प्रयोग कर रहे हैं। इस बात का खुलासा होने के बाद अमिताभ ने ऐसे लोगों के प्रति गुस्सा जाहिर किया है।

दरअसल एक शख्स ने अमिताभ बच्चन के लिए कहा था कि मेरी इच्छा है कि आप कोविड-19 से मर जाएं। इस बात की जानकारी अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में देते हुए अपने मन की बात को सबके सामने रखा है। बता दे कि अमिताभ बच्चन इन दिनों अपना इलाज मुंबई के नानावती अस्पताल में करवा रहे हैं, हालाँकि वो लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय होने के साथ साथ अपने फैंस से भी जुड़े रहते हैं।

अमिताभ बच्चन ने एक ब्लॉग लिखा जिसमें उन्होंने उनकी मौत के बारे में ऐसी बात करने वाले पर गुस्सा निकाला। बिग बी ने लिखा कि मिस्टर अज्ञात, आपने अपने बाप का नाम तक नहीं लिखा, क्योंकि आपको नहीं पता कि आपका बाप कौन है। यहां दो चीजें हो सकती हैं या मैं जिंदा रहूंगा या मर जाऊंगा। अगर मैं मर गया तो तुम एक सेलेब्रिटी के नाम पर अपनी भड़ास निकालने, निंदा करने का काम आगे नहीं कर पाओगे।

बिग बी ने आगे लिखा कि अफसोस कि आपके लिखे को नोटिस में लाने वाला नहीं रहेगा, क्योंकि जिस अमिताभ बच्चन पर आपने कटाक्ष किया, तब वह जिंदा नहीं रहेगा। लेकिन भगवान के आशीर्वाद से मैं बच गया तो फिर तुम लोगों के गुस्से का तूफान झेलोगे, केवल मेरी ओर से नहीं बल्कि मेरे नौ करोड़ फॉलोअर्स की तरफ से, और यह जान लो कि यह दुनिया भर में हैं, हर कोने में, पूरब से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से लेकर दक्षिण तक और यह केवल इस पेज की ईएफ यानी एक्सटेंडेंड फैमिली नहीं है बल्कि एक्सटर्मिनेशन फैमिली है। मुझे बस केवल यह कहना है कि ठोक दो साले को।

अपने ब्लॉग के आखिरी में अमिताभ बच्चन ने लिखा कि मारीच, अहिरावन, महिषासुर, असुर, उपनाम हो तुम; हमारा यज्ञ प्रारम्भ होते ही, तुम राक्षसों की तरह तड़पोगे, जान लो इतना की अब तुम ही केवल समाज की आवाज ना हो, चरित्रहीन, अविश्वासी, श्रद्धा हीन, लीचड़ तुम हो, जलो गलो पिघलो, बेशर्म, बेहया, निर्लज, समाज कलंकी।

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