ग्लैमर के बीच अपना सा चेहरा राजबब्बर

ग्लैमर के बीच अपना सा चेहरा राजबब्बर raj babbar a politician and an actor

चाहे फिल्मी कामकाज हो या फिर राजनीति जीवन, इन दोनों को साथ-साथ जीने के कारण पहले भी उनकी बहुत यात्राएं हुआ करती थीं और आज भी इधर-उधर आने-जाने की दौड़भाग कोई कम नहीं हुई है। इसी वजह से रात को अक्सर सोना बहुत देर से होता है। लेकिन फिर भी राज बब्बर सुबह उठने के मामले में कोई समझौता नहीं करते। भरपूर थकान और लगातार काम के बोझ के बावजूद सुबह सात बजे उठना उनकी आदत है। राज बब्बर के हिसाब से जिंदगी सतत चलते रहने का नाम है। इसीलिए उन्होंन कहीं भी, कभी भी थमना नहीं सीखा।

यही संस्कार उन्होंने अपनी बेटी जूही और बेटे आर्य को भी दिया है। घर का ख्याल रखने की जिम्मेदारी उन्होंने अपनी पत्नी नादिरा बब्बर के भरोसे छोड़ रखा है। राज बब्बर कहते हैं-‘नादिरा जी जो संभाल रही हैं वह सचमुच बहुत बड़ा काम है। क्योंकि अगर वे घर के हम चार पांच लोगों को नहीं संभालती तो मैं अपने इतने सारे लोगांे को कैसे संभाल पाता।


लोगों को सुनना और उस सुने हुए को जीवन में उतारने को अपनी आदत में ढाल चुके राज बब्बर की परेशानी यह है कि वे झूठ सहन नहीं कर पाते। लेकिन राजनीति में झूठ का ही बोलबाला है? इस सवाल पर उन्होंने कहा-‘होगा, लेकिन मेरी निजी जिंदगी में इससे दूर का भी वास्ता नहीं है।’’

विख्यात समाजवादी चिंतक डाॅ. राममनोहर लोहिया को अपने जीवन का आदर्श माननेवाले सांसद राज बब्बर की जिंदगी पर सिनेमा के मुकाबले सामाजिक प्रभाव बहुत ज्यादा झलकता है। यही असर उनके बंगले ‘नेपथ्य’ के भीतर भी अपने गजब स्वरूप में निखरते देखा जा सकता है। विशाल ड्रांइग रूम मेें बीचोबीच मकबूल फिदा हुसैन की बनाई एक बहुत ही विशाल और शानदार पेंटिंग लगी हुई है। और उन्हीं की बनाई कई सारी छोटी-छोटी पेटिंग पूरे घर में यहां-वहां कहीं भी दिख जाएंगी। इसके अलावा उनके घर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अंदर का माहौल धार्मिक मेल-जोल वाला दिखता है।

कहीं उर्दू में आयतें दिखती हैं तो कहीं सूफियाना बातें तो कहीं दिखाई देती हैं प्यार और मोहब्बत की शानदार झलक। दीवार पर टंगी एक तस्वीर में बहुत ही सधे हुए अक्षरों में लिखा है –‘रात के अंधेरी काली में, लो इश्के चराग जलाता हूं’। सुल्तान बाबू की लिखी सांप्रदायिकता विरोधी यह बात राज बब्बर की जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती है।

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तीन मंजिल के उनके बंगले में छोटा सा लाॅन और उसके बीच से गुजरती पथरीली पगडंडी से राज बब्बर की जिंदगी को जोड़कर देखा जा सकता है। इस पगडंडी पर कदम बढ़ाते हुए राज बब्बर कह रहे थे-‘जिंदगी बिल्कुल इतनी ही सख्त है, यह रह-रहकर डराती है। लेकिन जो डर जाए वह आगे कदम नहीं बढ़ा पाता।’ इस लाॅन के बीचों-बीच भगवान गणपति की काली प्रतिमा बेलपत्तों के बीच अपने अप्रतिम सौंदर्य के साथ स्थापित है। ऐसी ही कुछ और मूर्तियां दफ्तर है, जहां फिल्मी कामकाज के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक काम भी लगातार चलता रहता है।

राज बब्बर जब दिल्ली में रहते हैं तब भी उनकी दिनचर्या वही रहती है और मुंबई में भी उससे अलग नहीं। सुबह 7 बजे उठने के बाद फटाफट तैयार हो जाना फिर अपने यहां आए लोगों से मिलना। इस बीच थोड़ा-बहुत व्यायाम और हफ्ते में जब भी ज्यादा समय मिल जाए तो दो-तीन बार योग और प्राणायाम कर लेना उन्होंने पिछले कुछ सालों से अपनी जिंदगी में शामिल कर दिया है। कभी-कभार भले ही मांसाहारी भोजन कर लेते हैं, लेकिन खाना उन्हें शाकाहारी ही पंसद है। उसमें भी हरी सब्जियां हों तो बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन कम उबली और अधपकी हरी सब्जियां उन्हें अगर मिल जाएं तो वे भरपूर खाते हैं।

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गले में स्वर्णजड़ित रुद्राक्ष की लंबी सी माला के साथ सोने की चेन और हाथ में हरे नीले और इलायची रंग के नगवाली सोने और चांदी की अंगूठियों पहनने वाले राज बब्बर ईश्वर में जबर्दस्त आस्था रखते हैं और यह मानते हैं कि आखिकार वही एक शक्ति है जो इस दुनिया को चलाती है और इंसान को अच्छा करने की प्रेरणा देती है।

कपड़े वे हर तरह के पहनते हैं। जीन्स और टी शर्ट उनकी पहली पंसद भले ही हो, लेकिन राजनेता होने के बावजूद बहुत लोगों ने उनको कुर्ते-पायजामें में इसलिए नहीं देखा क्योंकि वे उस वेशभूषा में खुद को सहज महसूस नहीं करते। हिंदुस्तान दुनिया में उनकी सबसे प्रिय जगह है और आगरा के साथ-साथ लखनऊ उन्हें बहुत पंसद है।


बेहद सरल और मृदुभाषी राज बब्बर जिंदगी के हर मुकाम पर खुद को ग्लैमर की चकाचैंध से दूर इसीलिए रख पाएं, क्योंकि वे मानते हैं कि जिंदगी पर कोई चीज कभी भी हावी नहीं होनी चाहिए।

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Title: raj babbar a politician and an actor in Hindi  | In Category: मनोरंजन manoranjan

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