• केदार शर्मा कलाकार के काम से ख़ुश हो दुअन्नी दिया करते थे

  • बाद में केदार ने इस पुरस्कार की राशी को बढ़ाकर चवन्नी किया

  • मीना कुमारी के पास दुअन्नी और चवन्नियों की बहुत बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई

मुंबई 4 अक्टूबर (एजेंसी) चित्रलेखा जैसी बेहतरीन फिल्म बनाने वाले निर्माता-निर्देशक व लेखक केदार शर्मा के अंदर एक ख़ास बात थी कि किसी भी कलाकार के काम से जब वो ख़ुश होते थे तो उसे पुरस्कार स्वरूप एक दुअन्नी दिया करते थे, हालाँकि बाद में केदार ने इस पुरस्कार की राशी को बढ़ाकर चवन्नी कर दिया था । बात उस समय की है जब केदार फ़िल्म चित्रलेखा की शूटिंग कर रहे थे । शूटिंग के दौरान मीना कुमारी ने केदार शर्मा से कहा कि शर्माजी मेरे पास आपकी दुअन्नी और चवन्नियों की बहुत बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई है, अब आप अपना रेट बढ़ा दीजिए । बताया जाता है कि एक दिन सचमुच उन्होंने एक सीन में मीना कुमारी के अभिनय से ख़ुश हो कर उन्हें सौ रुपए का नोट ईनाम स्वरुप दिया था ।

बॉलीवुड में ट्रैजेडी क्वीन के नाम से प्रसिद्ध मीना कुमारी की पूरी ज़िंदगी सिनेमा के पर्दे पर भारतीय औरत की ट्रैजेडी को दर्शाया हालाँकि मीना कुमारी के अभिनय में ट्रैजेडी के अलावा और कोई शेड नहीं था, ऐसा कहना उनके साथ बेइंसाफ़ी होगी । फ़िल्म परिणिता, बैजू बावरा, साहब बीबी और गुलाम और पाकीज़ा जैसी फिल्मों में मीना कुमारी के किरदारों में हर बार एक नयी मीना कुमारी नज़र आई, उनके अभिनय का ही असर था कि उनके अभिनय ने भारतीय जनमानस के दिल पर अमिट छाप छोड़ी है ।

मीना कुमारी ने अपनी शायरी में लिखा –

पूछते हो तो सुनो, कैसे बसर होती है
रात ख़ैरात की, सदक़े की सहर होती है

साँस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही दुखता है, न अब आस्तीं तर होती है

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