• समांतर जत्थेदार ज्ञानी ध्यान सिंह मंड ने दिया बड़ा बयान

  • प्रधानमंत्री से 15 दिन के भीतर अपना बयान वापस ले

  • सिख कौम को उनके विरुद्ध धारा 295 (ए) के तहत मामला दर्ज करवाने के आदेश

नयी दिल्ली 13 अगस्त (एजेंसी) राम मंदिर भूमि पूजन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश को किए गए संबोधन में श्री गुरु गोबिंद सिंह द्वारा रचित गोबिंद रामायण के जिक्र ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। सूत्रों के अनुसार तरनतारन के कस्बा चब्बा में 2015 में सिख संगठनों द्वारा गठित सरबत खालसा की ओर से मनोनीत श्री अकाल तख्त साहिब के समांतर जत्थेदार ज्ञानी ध्यान सिंह मंड ने प्रधानमंत्री से 15 दिन के भीतर अपना बयान वापस लेने और सिख कौम से माफी मांगने को कहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि अगर पीएम मोदी ने अपना बयान वापस नहीं लिया और सिख कौम से माफी नहीं मांगी तो एक नया गुरमत्ता यानी कि धार्मिक प्रस्ताव पारित करके सिख कौम को उनके विरुद्ध धारा 295 (ए) के तहत मामला दर्ज करवाने के आदेश जारी किए जाएंगे। समांतर जत्थेदार भाई ध्यान सिंह मंड ने अपने साथियों के साथ इस मुद्दे पर विचार विमर्श के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय के बाहर बैठक का आयोजन किया।

इस बैठक में एक गुरमत्ता (धार्मिक प्रस्ताव) पारित किया गया। इस गुरमत्ता को जारी भी कर दिया गया। इस गुरमत्ता में तख्त श्री पटना साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह को भी स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए गए है। उन्होंने सिखों को लव-कुश के वंशज बताकर विवादित बयान दिया था।

 

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