• महिला ट्रांसजेंडर को एयर इंडिया ने केबिन क्रू सदस्य के तौर पर नौकरी देने से मना किया

  • 2017 से लंबित मामले की तीन हफ्ते बाद सुनवाई

  • महिला ने 2014 में अपना लिंग परिवर्तन कराया था

नयी दिल्ली 8 सितम्बर (एजेंसी) सूत्रों के अनुसार एक महिला ट्रांसजेंडर को एयर इंडिया ने केबिन क्रू सदस्य के तौर पर नौकरी देने से मना कर दिया था, जिसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो तीन हफ्ते बाद इस मामले की याचिका पर सुनवाई करेगा। बता दे कि तीन जजों की पीठ ने इस मामले में कहा कि इस मामले को संज्ञान में ले लिया गया है और तीन हफ्ते बाद इस मामले पर सुनवाई की जाएगी। बता दे कि तीन जजों की पीठ में न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना शामिल हैं । सूत्रों के अनुसार याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी मुख्य याचिका के लिए जल्दी सुनवाई की मांग की है क्योंकि ये मामला 2017 से लंबित है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 23 जुलाई को शीर्ष अदालत ने इस ट्रांस्जेन्डर महिला को एयर इंडिया के निर्णय को चुनौती देने वाली अपनी याचिका में संशोधन करने की इजाजत दी थी। याचिका में तीसरे लिंग के उम्मीदवारों के लिये व्यक्तित्व परीक्षण कराने के आधार को चुनौती दी थी। महिला ने 2014 में अपना लिंग परिवर्तन कराया था। 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एयर इंडिया और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को नोटिस जारी कर सफाई देने के लिए कहा था। कंपनी ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने उस महिला को इसलिए नौकरी पर नहीं रखा क्योंकि महिला ने पर्सनैलिटी टेस्ट और ग्रुप डिस्कशन में न्यूनतम अंक भी नहीं प्राप्त किए थे और महिला के साथ किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं किया गया है।

वहीँ याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसने अपना सपना पूरा करने के लिये चेन्नई में 13 महीने सदरलैंड ग्लोबल सर्विसेज में एयरलाइन क्षेत्र और एयर इंडिया के ग्राहक सहायता क्षेत्र (दोनों घरेलू) और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में काम किया था। तमिलनाडु में 1989 में जन्मी इस महिला ने 2010 में इंजीनियरिंग में स्नातक किया। उसने पूर्ण महिला बनने के लिये अप्रैल, 2014 में अपना सेक्स परिवर्तन कराया और यह जानकारी राज्य सरकार के राजपत्र में प्रकाशित हुयी थी। महिला ने 2017 में अखबार में एयर इंडिया का एक विज्ञापन देखा था, जिसमें महिला केबिन क्रू सदस्य पद के लिए नौकरी निकली थी।

महिला ने उस नौकरी के लिए आवेदन भरा। महिला ने कहा कि उसके पास कंपनी से कॉल लेटर आया कि महिला को जी़डी और पर्सनैलिटी टेस्ट देना है। लेकिन महिला का कहना है कि उसकी तरफ से अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी उसे नौकरी पर नहीं रखा गया। अपनी याचिका में महिला ने कंपनी पर आरोप लगाया है कि वो ट्रांसजेंडर होने की वजह से नहीं चयनित की गई और ये भर्तियां केवल महिला केबिन क्रू सदस्यों के लिए ही थीं। महिला की याचिकाकर्ता में लिखा है कि ट्रांसजेंडर पर्सन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल, 2016 भेदभाव पर प्रतिबंध लगाता है। महिला ने कहा कि बिल में साफ लिखा है कि कोई भी व्यक्ति रोजगार और व्यवसाय के संबंध में किसी ट्रांसजेंडर के साथ भेदभाव नहीं कर सकता है।

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