नई दिल्ली, 15 अप्रैल (एजेंसी)। सरकार ने ग्रामीण इलाकों में कुछ शर्तों के साथ 20 अप्रैल से कुछ मामलों में विनिर्माण गतिविधियां शुरू करने की छूट देने की बुधवार को घोषणा की। कोरोना वायरस के कारण लगाये गये लॉकडाउन की वजह से पिछले तीन सप्ताह से आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभाविति हुई हैं। सरकार अब कुछ क्षेत्रों में गतिविधियां शुरू करने की दिशा में पहल कर रही है।

गृह मंत्रालय के जारी आदेश में यह जानकारी देते हुये कहा गया है कि काम शुरू करने की छूट उन क्षेत्रों में लागू नहीं होगा जहां कोराना वायरस संक्रमण फैलने का संकट अधिक है और राज्य सरकारों, केन्द्र शासित प्रदेशों या फिर जिला प्रशासन ने वहां इलाकों को सील वकिया है और उन्हें संक्रमण क्षेत्र घोषित किया हुआ है।

दिशानिर्देश में कहा गया है नगर निगमों, स्थानिय निकायों की सीमाओं से बाहर ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले सरकारी और निजी दोनों तरह के उद्योग अपनी गतिविधियां चला सकेंगे। इनमें औद्योगिक क्षेत्रों और औद्योगिक शहरों में विनिर्माण तथा अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ ही विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) और निर्यातोन्मुखी इकाइयों (ईओयूज) को संपर्क पर नियंत्रण रखते हुए गतिविधियां चलाने की अनुमति होगी। इसमें कहा गया है कि दवा, औषधि विनिर्माता, चिकित्सा उपकरण, कच्चा माल और उत्पाद तेयार करने में जरूरी सामानों की कारखानों को काम करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा नगर निगमों की सीमाओं से बाहर काम करने वाले खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, आईटी हार्डवेयर, कोयला उत्पादन, खान एवं खनन उत्पादन, इनका परिवहन, तथा खान परिचालन से जुड़ी गतिविधियों को भी चलाने की अनुमति होगी।

गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि इन प्रतिष्ठानों को उनसे जुड़े श्रमिकों, कामगारों के लिये ठहरने की व्यवस्था जहां तक संभव हो सके कारखाना परिसर में ही अथवा उसके आसपास के भवन में ही करनी होगी। कर्मियों को कार्यस्थल तक लाने ले जाने के लिये सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुये नियोक्ताओं को ही पक्की व्यवस्था करनी होगी।

दिशानिर्देश में कहा गया है कि काम शुरू करने से पहले सभी प्रतिष्ठानों, कार्यस्थलों और कार्यालयों को रोगाणुओं से मुक्त करने के लिये उपयुक्त रूप से संक्रमण रहित करने के उपाय करने होंगे। कार्यालय के प्रवेश द्वारों, कार्यालय के भीतर, कैंटीन, बैठक स्थल, सम्मेलन हॉल, भवन, उपकरण और औजारों, लिफ्ट, शौचालयों, दीवारों और तमाम अन्य जगाहों को पूरी तरह से रोगाणु मुक्त करना होगा। बाहर से आने वाले कर्मचारियों के लिये नियोक्ता की तरफ से ही वाहन की व्यवस्था की जायेगी। कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिये और जो भी वाहन कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराया जायेगा उसमें क्षमता से केवल 30 से 40 प्रतिशत यात्री क्षमता का इस्तेमाल होगा।

कार्यालय में प्रवेश करने से पहले वाहन पर रोगाणु मुक्त करने के लिये छिड़काव की व्यवस्था करनी होगी। दिशानिर्देशों में अन्य जरूरी बातों में परिसरे में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की थर्मल स्क्रीनिंग करना, अनिवार्य चिकित्सा बीमा, हाथ धोने और सैनिटाइज करने की व्यवस्था को आवश्यक बताया गया है। सैनिटाइजर ऐसा होना बेहतर होगा जो बिना हाथ लगाये ही कार्य करे।

ग्रामीण क्षेत्रों में पैकेजिंग सामग्री, जूट उद्योगों को भी अलग अलग पालियों में सामाजिक दूरी का ध्यान रखते हुये काम करने के साथ ही ईंट के भट्टों को चलाने की भी अनुमति दी गई है। काम शुरू करने से पहले राज्य सरकारों, संघ शासित प्रदेशों और जिला प्रशासन को प्रतिष्ठानों में पूरी तैयारियों के बारे में सुनिश्चित होना होगा। देश में 25 मार्च से लॉकडाउन शुरू किया गया था।

शुरुआत में यह 14 अप्रैल तक लगाया गया था जिसे मंगलवार को बढ़ाकर तीन मई तक कर दिया गया। इस दौरान उद्योग और निर्यातक लगातार उन्हें सीमित कर्मचारियों के साथ काम शुरू करने की अनुमति दिये जाने की सरकार से मांग करते रहे ताकि वह अपने निर्यात दायित्वों को पूरा कर सकें और कर्मचारियों को वेतन का भी भुगतान कर सकें।

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