• गाजियाबाद में नर्सों के साथ अभद्रता

  • दिल्ली में डॉक्टरों के साथ गाली गलौच और थूकने की घटना

  •  इंदौर (मध्य प्रदेश) में डॉक्टरों पर पत्थर फेंके गए

  • मुजफ्फरपुर (बिहार) में जान की कीमत समझाने वाले पुलिसवालों पर ही कर दिया हमला

  • सहारनपुर (यूपी) में मस्जिद के बाहर जमा लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में समझाने पर हमला

नई दिल्ली, 4 अप्रैल। एक  तरफ जहाँ कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ने के लिए विश्व भर के नेता और जनता एकसाथ एकजुट होकर सामना कर रहे है वहीँ कई जगह से ऐसे मामले देखने को मिल रहे है जो मन में रोष पैदा करने का काम कर रहे है । विश्व पर कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है, ये हम सभी जानते है।

आज कोरोना के खिलाफ सबसे ज्यादा पुलिस, डॉक्टर, सफाईकर्मी और तमाम अमल (Staff) लगातार कार्यरत हैं और पूरी लगन के साथ अपना अपना काम कर रहे है । वहीं ये तब्लीगी जमात के लोग उन्हीं डॉक्टरों और नर्सों के साथ अभद्रता पूर्ण व्यवहार कर रहे हैं जो इनका इलाज करने के लिए अपनी जान जाेखिम में डालकर इनकी सेवा कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज से क्वारंटाइन किए गए डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों ने पुलिस और डॉक्टर से बदसलूकी करते हुए उन पर थूका और गालियां दीं। कुछ ऐसा ही इंदौर में भी देखने को मिला, जहाँ संक्रमितों की जांच करने गई टीम पर हमला करते हुए उन पर पत्थर फेंके गए।

अपने ही शहर में ऐसा होता देख मशहूर शायर राहत इंदौरी भी प्रतिक्रिया देने से खुद को रोक नहीं पाए, उन्होंने कहा कि कल रात 12 बजे तक मैं दोस्तों से फोन पर पूछता रहा कि वह घर किसका है, जहां डॉक्टरों पर थूका गया है, ताकि मैं उनके पैर पकड़कर माथा रगड़कर उनसे कहूं कि खुद पर, अपनी बिरादरी, अपने मुल्क व इंसानियत पर रहम खाएं। यह सियासी झगड़ा नहीं, बल्कि आसमानी कहर है, जिसका मुकाबला हम मिलकर नहीं करेंगे तो हार जाएंगे।

 

इस घटना पर प्रधानमंत्री मोदी भी प्रतिक्रिया देने से खुद को रोक नहीं पाए, उन्होंने कहा कि सभी मत-पंथ और सोच के लोग मिलकर कोरोना से लड़ें। सभी धर्मगुरु अपने अनुयाइयों को समझाएं कि वे इस लड़ाई में भागीदार बनें। बात यहीं नहीं रूकती, सिर्फ दो ही नहीं पुरे देश में ऐसे कई मामले सामने आ चुके है, जिनसे इंसानियत को शर्मसार होना पड़ रहा है ।

 नई दिल्ली जहाँ डॉक्टर को न सिर्फ गाली दी गयी बल्कि उन पर थूका भी गया

1 अप्रैल 2020 को निजामुद्दीन स्थित मरकज की इमारत से 2000 से ज्यादा जमातियों को बाहर निकाला गया, जिनमे से 167 लोगों को क्वारैंटाइन सेंटर ले जाया गया। इसके बाद जो हुआ वो बहुत ही निंदनीय है ।  इन जमातियों ने पूरी इमारत में जगह-जगह थूका। बात यहीं नहीं रुकी इन्होने पुलिस और डॉक्टर्स को भला-बुरा कहते हुए उन पर भी थूकने में परहेज नहीं किया । वहां मौजूद स्टाफ को गालियां दीं।

इंदौर (मध्य प्रदेश) में डॉक्टरों पर पत्थर फेंके गए

1 अप्रैल 2020 को इंदौर के टाटपट्टी बाखल में जब कोरोना संक्रमितों की जांच करने स्वास्थ्य विभाग की टीम यहाँ पहुंची तो यहां के लोगों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया। सिलावटपुरा में एक कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत के बाद ये टीम संदिग्धों की जांच के लिए वहां आई थी। जहाँ वहां के लोगों ने इनका स्वागत करना चाहिए था वहां एक दम इसके उल्ट हुआ । ऐसे में सोचना बनता है कि क्या इन लोगों को अपने और अपने परिवार की बिलकुल चिंता नहीं है ? आखिर कोई इतना गैर-जिम्मेदार कैसे हो सकता है । एक परिवार ने टीम में आये अफसरों पर इल्जाम लगाया है कि वे क्वारैंटाइन के नाम पर परेशान कर रहे हैं हालाँकि आपको जानकार ताज्जुब होगा कि इस परिवार के 3 लोग संक्रमित हैं।

मुजफ्फरपुर (बिहार) में जान की कीमत समझाने वाले पुलिसवालों पर ही कर दिया हमला

11 साल की बच्ची की संदिग्ध मौत के बाद जब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मुजफ्फरपुर में लोगों की जांच करने पहुंची तो वहां के लोगों ने उनका स्वागत करने के बजाय उन पर हमला कर एक बार फिर अपनी छवि को दाग लगाने का काम किया है । इस हमले में दो पुलिस जवानों को पीट-पीटकर घायल कर दिया। यह घटना भी 1 अप्रैल 2020 की है। दरअसल  स्वास्थ्य विभाग ने इस क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से उन्हें समझाना चाहा तो स्थानीय लोगों ने कहा कि यह मौत कोरोना की वजह से नहीं हुई। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग उन्हें ऐहतियात बरतने को कहता रहा परन्तु वहां की जनता ने पथराव शुरू कर दिया।

सहारनपुर (यूपी) में मस्जिद के बाहर जमा लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में समझाने पर हमला

ऐसा ही एक मामला 31 मार्च को देखने को मिला जब सहारनपुर के जमालपुर गांव में शाम के समय मस्जिद के बाहर इकट्ठा कुछ लोगों को पुलिस ने वहां से हटने यानी कि सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करने को कहा तो इस भीड़ ने पुलिस के साथ मारपीट शुरू कर दी । इस मारपीट में दो पुलिस जवानों को चोटें आईं। वहीँ कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया परन्तु भीड़ उन्हें छुड़ाने में कामयाब रही । पुलिस ने 26 लोगों के खिलाफ केस दर्ज  कर लिया है।

रायपुर (छत्तीसगढ़) में सैनिटाइजेशन करने पहुंचे कर्मियों को पीटा

आखिर लोगों की समझ को जाने क्या हुआ है, उन्हें समझना चाहिए कि सरकार जो भी कर रही है उनके भले के लिए कर रही है । परन्तु हकीकत कुछ और ही है, रायपुर में जब नगर निगम के कर्मचारी लॉकडाउन के दौरान सैनिटाइजेशन का काम कर रहे थे तभी  यहां कुछ लोगों ने इन कर्मियों से बदसलूकी कर मार पीट शुरू कर दी ।

बेंगलुरु (कर्नाटक) की आशा कार्यकर्ता पर हमला

बेंगलुरु की एक आशा कार्यकर्ता पर लोगों ने उस वक़्त हमला कर दिया जब वो कोरोना वायरस से जुड़ा डेटा कलेक्ट करने गई थी । आशा कार्यकर्ता कृष्णावेनी का आरोप है कि एक मस्जिद से लोगों को भड़काया गया और इसके बाद उन पर हमला किया गया।

रांची (झारखंड) में स्क्रीनिंग करने पहुंची टीम को भीड़ ने भगाया

रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में मलेशिया की एक महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई है, जिसके बाद आसपास के घरों में रहने वालों के स्वास्थ्य की जांच के लिए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम बनाकर वहां भेजी । 2 अप्रैल को जब टीम लोगों की जांच करने पहुंची तो स्थानीय लोगों ने इनका विरोध किया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदपीढ़ी क्षेत्र को बदनाम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है । भीड़ ने टीम को वहां से भगा दिया।

जयपुर (राजस्थान) में भी पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके गए

31 मार्च को रामगंज इलाके में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों पर कुछ लोगों ने पत्थर फेंके जिसमे  दो पुलिसकर्मी घायल हो गए । बाद मेइस मामले में केस दर्ज कर लिया गया।

टोंक (राजस्थान) में सर्वे करने पहुंची टीम को पीटा गया

कोतवाली इलाके में सर्वे करने पहुंची छह सदस्यीय टीम पर लोगों ने हमला कर  उनके साथ जमकर मारपीट व गालीगलौज की गयी । इतना ही नहीं उनके कागजात फाड़कर नाली में फेंक दिए गए । इस मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया ।

 

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