• आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की पांचवीं किस्त की घोषणा के बाद वामदल ने दी प्रतिक्रिया

  • माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी

  • आर्थिक पैकेज को वामदलों ने भ्रमित करने वाला और आंकड़ों का मायाजाल बताया

नई दिल्ली, 18 मई (एजेंसी)। केंद्र सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज को वामदलों ने भ्रमित करने वाला और आंकड़ों का मायाजाल बताते हुए इसकी आलोचना की । वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की पांचवीं किस्त की घोषणा करने के चंद घंटों बाद वामदल ने इस पर प्रतिक्रिया दे दी थी । जहाँ वित्तमंत्री ने मनरेगा योजना के तहत बजट में आवंटित 61 हजार करोड़ रुपये से अलग 40 हजार करोड़ रुपये देने की घोषणा करते हुए बताया कि ये प्रवासी कामगारों अपने अपने राज्य में पहुचाने और रोजगार मुहैया कराने के उद्देश्य से आवंटित  किये जा रहे है । वहीँ माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है ।

सीताराम येचुरी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वित्तमंत्री ने राज्यों के ऋण लेने की सीमा को तीन प्रतिशत से बढ़कार पांच प्रतिशत करने के साथ यह कहकर माखौल उड़ाया कि उन्होंने अब तक ऋण सीमा का केवल 14 प्रतिशत ही उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि यह भ्रामक है, केंद्र द्वारा संवैधानिक व्यवस्था के तहत राज्यों को हस्तांतरित की जाने वाली राशि और भारतीय रिजर्व बैंक का साधन बढ़ाने के फैसले को मोदी सरकार राज्यों को दी गई मदद के रूप में दिखा रही।

येचुरी ने कहा कि रिजर्व बैंक को राज्य सरकार द्वारा जारी बांड को रेपो रेट पर हासिल करने, ऋण लेने की लागत को कम करने के उपाय करने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार गत पांच दिनों से आंकड़ों का मायाजाल दिखा रही है और इस भारी संकट में गरीबों और असुरक्षित लोगों की मदद के लिए कुछ नहीं कर रही है। मोदी सरकार सभी जगहों से दिखाई दे रही तस्वीरों और खबरों से आंखें फेर चुकी है और उसकी प्राथमिकता प्रचार और कारोबारियों से साठगांठ को लेकर है। भाकपा के महासचिव डी राजा ने पूछा कि क्या वित्तमंत्री अर्थव्यवस्था को बेच कर आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि महामारी से लड़ने के नाम पर इस सरकार ने आक्रमक रूप से नव उदारवादी आर्थिक एजेंडे को लागू किया है। कृषि से लेकर सभी क्षेत्रों में वे कॉरपोरेटाइजेशन के बारे में बात करते हैं, यहां तक की रक्षा, कोयला और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी। ये रणनीतिक क्षेत्र हैं और संसद का सत्र नहीं चल रहा है। वे इस संकट का इस्तेमाल इन नीतियों को आगे बढ़ाने में कर रहे है।

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