• प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा साहब को उनकी जन्मतिथि पर नमन किया

  • देश में मनाये जाने वाले त्यौहारों में भी लोगो के लॉकडाउन पालन की करी प्रशंसा

  • कोरोना से जंग में भारत की तरफ से उठाये गए क़दमों का भी ज़िक्र किया

  • इंटिग्रेटेड अप्रोच के बारे में बात करते हुए अन्य देशों से तुलना

  • लॉकडाउन के समय में सोशल डिस्टेंसिंग का लाभ देश को मिला

  • 20 अप्रैल के बाद कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति

दिल्ली 14 अप्रैल (एजेंसी) 25 मार्च से लागू किये गये 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन लॉकडाउन का आज आखिरी दिन था। सबको उम्मीद थी कि आज से सबकी ज़िन्दगी फिर से पहले जैसी हो जाएगी, सब अपने अपने काम पर वापस लौट जायेंगे, लॉकडाउन में बेरोजगार हुए लोगों को वापस रोजगार मिल जायेगा और जो कहीं न कहीं फँसे हुए वापस अपने आशियाने में लौट आयेंगे, शायद इसी उम्मीद से लोगों ने खुद को ठीक 10 बजे खुद को टीवी से बांध लिया । ठीक 10 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की जनता को 25 मिनट तक संबोधित किया और उन्होंने देशहित में फैसला लेते हुए देश में लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने का ऐलान किया। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि 20 अप्रैल से कुछ जरूरी चीजों की अनुमति दी जाएगी परन्तु यदि ऐसे में कोरोना पैर पसारता है तो ये अनुमति तुरंत वापस ले ली जाएगी। पिछले 26 दिन में प्रधानमंत्री मोदी का देश के नाम यह चौथा संदेश था।

प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा साहब को उनकी जन्मतिथि पर नमन किया

प्रधानमंत्री मोदी ने वी द पीपल ऑफ इंडिया की शक्ति की बात करते हुए कहा कि हमारे संविधान में जिस वी द पीपल ऑफ इंडिया की शक्ति की बात कही गई है, वह यही तो है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर हम भारत के लोगों की तरफ से अपनी सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन और संकल्प बाबा साहब को श्रद्धांजलि है। बाबा साहब का जीवन हमें हर चुनौती को अपनी संकल्प शक्ति और परिश्रम के बूते पर पार करने की निरंतर प्रेरणा देता है। मैं सभी देशवासियों की तरफ से बाबा साहब को नमन करता हूं।

देश में मनाये जाने वाले त्यौहारों में भी लोगो के लॉकडाउन पालन की करी प्रशंसा

प्रधानमंत्री मोदी ने देश में मनाये जाने वाले त्यौहार का ज़िक्र भी किया और उनका लॉकडाउन में भी पालन करने वाले लोगों की भी प्रशंसा भी की, उन्होंने अपनी बात देश के सामने रखते हुए कहा कि साथियो! देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग त्योहारों का भी समय है। वैसे भी भारत को उत्सवों से भरा और हरा रहता है। उत्सवों के बीच खिलखिलाता रहता है। बैसाखी जैसे त्योहारों के साथ कई राज्यों में नए वर्ष की शुरुआत हुई है। लॉकडाउन के बंधनों के बीच देश के लोग जिस तरह नियमों का पालन कर रहे हैं, जितने संयम से अपने घरों में रहकर त्योहार बड़ी सादगी से मना रहे हैं, ये सारी बहुत प्रेरक और प्रशंसनीय हैं। मैं नए वर्ष पर आपके और आपके परिवारजन के उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना करता हूं।

कोरोना से जंग में भारत की तरफ से उठाये गए क़दमों का भी ज़िक्र किया

भारत में कोरोना की स्थिति और उसको लेकर सरकार द्वारा उठाये गए क़दमों का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि साथियो! आज पूरे विश्व में कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है, हम सब उससे भली-भांति परिचित हैं। अन्य देशों के मुकाबले भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए हैं, आप इसके सहभागी भी रहे हैं और साक्षी भी। जब हमारे यहां कोरोना का एक भी केस नहीं था, उससे पहले ही भारत ने कोरोना प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी। कोरोना के मरीज 100 तक पहुंचे, उससे पहले ही भारत ने विदेश से आए हर यात्री के लिए 14 दिन का आइसोलेशन अनिवार्य कर दिया था। मॉल, थिएटर, क्लब, जिम बंद किए जा चुके थे।

इंटिग्रेटेड अप्रोच के बारे में बात करते हुए अन्य देशों से तुलना

प्रधानमंत्री मोदी ने देश की तुलना उन देशो से जहाँ किसी समय में भारत बराबर ही संक्रमण के मामले थे परन्तु वहां अब स्थिति ख़राब हो चुकी है, के बारे में बात करते हुए कहा कि महीना-डेढ़ महीना पहले कई देश कोरोना संक्रमण के मामले में भारत के बराबर खड़े थे, आज उन देशों में भारत की तुलना में कोरोना के मामले 25 से 30 गुना बढ़ गए हैं। उन देशों में हजारों लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है। भारत ने पुलिसिंग अप्रोच न अपनाई होती, इंटिग्रेटेड अप्रोच न अपनाई होती, समय पर तेज फैसले नहीं लिए होते तो आज भारत की स्थिति क्या होती, इसकी कल्पना करते ही रोए खड़े हो जाते हैं। लेकिन बीते दिनों के अनुभवों से यह साफ है कि हमने जा रास्ता चुना है, आज की स्थिति में वही हमारे लिए सही है।

लॉकडाउन के समय में सोशल डिस्टेंसिंग का लाभ देश को मिला

सोशल डिस्टेंसिंग किस तरह देश के लिए लाभकर साबित हुयी इस बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन का बहुत बड़ा लाभ देश को मिला है। अगर सिर्फ आर्थिक दृष्टि से देखें तो यह महंगा जरूर लगता है, बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है, लेकिन भारतवासियों की जिंदगी के आगे इसकी कोई तुलना नहीं हो सकती। सीमित संसाधनों के बीच भारत जिस मार्ग पर चला है, उस मार्ग की चर्चा आज दुनियाभर में होना बहुत स्वाभाविक है। देश की राज्य सरकारों, स्थानीय स्वराज संस्थाओं की इकाइयों ने भी इसमें बहुत जिम्मेदारी के साथ काम किया है।

3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा

कोरोना वायरस को भारत में जड़ से खत्म करने के लिए लॉकडाउन की सीमा बढ़ाये जाने के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई राज्य तो पहले से ही लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला कर चुके हैं। सारे सुझावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है कि लॉकडाउन को अब 3 मई तक बढ़ाना पड़ेगा। यानी 3 मई तक हम सभी को, देशवासियों को लॉकडाउन में ही रहना होगा। इस दौरान हमें अनुशासन का उसी तरह पालन करना है, जैसे हम करते आ रहे हैं। मेरी सभी देशवासियों से यह प्रार्थना है कि अब कोरोना को हमें किसी भी कीमत पर नए क्षेत्रों में फैलने नहीं देना है। स्थानीय स्तर पर अगर एक भी मरीज बढ़ता है तो यह हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए।

20 अप्रैल के बाद कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति

लोगों हो होने वाली समस्या को देखते हुए कहा कि जो क्षेत्र इस अग्नि परीक्षा में सफल होंगे, जो अपने यहां हॉटस्पॉट नहीं बढ़ने देंगे और जिनके हॉटस्पॉट में बदलने की आशंका भी कम होगी, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति, छूट दी जा सकती है। लेकिन याद रखिए, ये अनुमति सशर्त होगी। बाहर निकलने के नियम बहुत सख्त होंगे। लॉकडाउन के नियम अगर टूटते हैं और कोरोना का पैर हमारे इलाके में पड़ता है तो सारी अनुमति तुरंत वापस ले ली जाएगी। न खुद कोई लापरवाही करनी है, न किसी और को लापरवाही करने देना है। मेरे देशवासियो! कल इस बारे में सरकार की तरफ से विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी। 20 अप्रैल से चिह्नित क्षेत्रों में इस सीमित छूट का प्रावधान हमारे गरीब भाई-बहनों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए किया गया है। जो रोज कमाते हैं, रोज की कमाई से जरूरतें पूरी करते हैं, वही मेरा वृहद परिवार है। मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता में इन गरीबों की दिक्कतों को कम करना है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के जरिए हमने इसका हर संभव प्रयास किया है। नई गाइडलाइन में भी उनके हितों का ध्यान रखा गया है।

सात बातों में माँगा साथ

 

 

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