• भारतीय रेलवे ने 12 सितंबर से 80 नई ट्रेनें चलाने का अहम फैसला लिया

  • 10 सितंबर से इन ट्रेनों के लिए टिकट बुकिंग शुरू हो जाएगी

  • 80 नयी ट्रेनों के चलने के बाद अब देश में कुल 310 ट्रेनें पटरी पर लौट आएंगी

नयी दिल्ली 7 सितम्बर (एजेंसी) आने वाले त्यौहारी मौसम को देखते हुए भारतीय रेलवे ने 12 सितंबर से 80 नई ट्रेनें चलाने का अहम फैसला लिया है। सूत्रों की माने तो 10 सितंबर से इन ट्रेनों के लिए टिकट बुकिंग शुरू हो जाएगी, हालाँकि तब तक पहले से चल रही 230 ट्रेनें नियमित रूप से चलती रहेंगी । 80 नयी ट्रेनों के चलने के बाद अब देश में कुल 310 ट्रेनें पटरी पर लौट आएंगी, जिससे लोगों को काफी राहत मिलेंगी । मई-जून में ट्रेनों में 70 प्रतिशत ऑक्युपेंसी थी, जो अगस्त में बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। फेस्टिव सीजन को देखते हुए मांग तेज हो रही थी, इसी वजह से 40 जोड़ी नई ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इस मामले में  रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ वीके यादव ने बताया कि औसत ऑक्युपेंसी बढ़कर 80-85% हो गई है, इसी वजह से जिस ट्रेन पर 10-12 दिन का वेटिंग पीरियड है, उस रूट पर क्लोन ट्रेन चलाने का प्रस्ताव है, ताकि वेटिंग लिस्ट को क्लीयर किया जा सके।

ज्ञात हो कि कोरोना काल में भारतीय रेलवे ने 12 मई को लिमिटेड पैसेंजर सर्विस शुरू की थी। इतना ही नहीं, दिल्ली से चलने वाली 15 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाई थी, इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से 1 जून से रेलवे ने 100 जोड़ी ट्रेनें और चलाई। इसमें 17 जन शताब्दी, 5 दूरंतो और कई पारंपरिक तौर पर लोकप्रिय मेल या एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल थी। सरकार ने अहम फैसला लेते हुए महाराष्ट्र और गुजरात से साप्ताहिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें भी चलाई।

बता दे कि रेलवे ने लंबी दूरी की गाड़ियों में भी फिलहाल पैंट्री कार में ऑपरेशंस को सीमित कर दिया है तथा पैक्ड और रेडी-टू-ईट फूड आइटम्स परोसे जा रहे हैं, जो कि आने वाले समय में भी जारी रहेगा। सूत्रों के अनुसार कुछ रेलवे डिविजनों ने तो लंबी अवधि के लिए पैकेज्ड फूड मैन्युफैक्चरर्स और सप्लायर्स से बातचीत करना अभी शुरू कर दिया है।

सूत्रों की माने तो जल्द ही यात्रियों की सेफ्टी के लिए स्पेशल पोस्ट-कोविड कोच भी ट्रैक्स पर आ जाएंगे, जिसके चलते इसमें हैंड्स-फ्री सुविधाएं और प्लाज्मा एयर प्यूरिफिकेशन सिस्टम लगा होगा। बता दे कि नॉर्थ सेंट्रल रेलवे ने तो क्यूआर कोड-बेस्ड कॉन्टेक्टलेस टिकट चेकिंग सिस्टम लागू भी कर दिया है। ह्यूमन-टू-ह्यूमन कॉन्टेक्ट कम से कम करने का प्रयास हो रहा है। हैंड्स-फ्री सुविधाएं दी जा रही हैं, जैसे पैरों से चलने वाला पानी का नल, सोप डिस्पेंसर, फ्लश वॉल्व और टॉयलेट डोर। तांबे के एंटी-माइक्रोबियल गुणों को देखते हुए रेलवे ने कॉपर-कोटेड हैंडल और लैच लगाने का फैसला किया है। रेलवे ने इस मामले में कहा कि जब वायरस तांबे पर आता है तो वायरस के डीएनए और आरएनए को खत्म कर देता है।

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