• इंदिरा गांधी ने 19 जनवरी 1966 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली
  • इंदिरा लगातार 3 कार्यकाल तक प्रधानमंत्री रहीं
  • 31 अक्टूबर 1984 को अपनी हत्या के दिन तक देश की प्रधानमंत्री रहीं

नयी दिल्ली 19 जनवरी (एजेंसी) बता दे कि 11 जनवरी 1966 यानी कि ताशकंद समझौते की रात ही भारत देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया था, जिसके चलते 12 जनवरी को गुलजारी लाल नंदा एक बार फिर कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। वहीँ कांग्रेस में नेता चुनने की लड़ाई शुरू हुई। सात दिन तक चली जद्दोजहद के बाद आज ही के दिन यानी कि 19 जनवरी को तय किया गया कि देश को पहली महिला प्रधानमंत्री मिलने जा रही है। उस महिला ने प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी में एक ऐसे नेता को हराया था जिसके बारे में जवाहर लाल नेहरू ने लिखा था की बहुत कम ऐसे लोग हैं जिनका मैं उनकी काबलियत, सक्षमता, निष्पक्षता और ठोस नैतिकता की वजह से सम्मान करता हूं। जिस महिला ने उस काबिल नेता को हराया था वो नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी थी। 19 जनवरी 1966 को कांग्रेस संसदीय दल में हुए चुनाव में इंदिरा गांधी को 355 वोट मिले थे। उनके खिलाफ खड़े हुए उस वक्त के वरिष्ठ नेता मोरारजी देसाई को महज 169 वोट मिले। ये दूसरा मौका था जब मोरारजी प्रधानमंत्री बनने चूके थे। इससे पहले नेहरू के निधन के बाद भी वे प्रधानमंत्री पद की दौड़ में थे।

मोरारजी देसाई कभी भी इंदिरा को नेहरू का उत्तराधिकारी नहीं मानते थे। देसाई ने उन्हें लिटिल गर्ल कहकर खारिज कर दिया था। 11 जनवरी 1966 की रात ताशकंद में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया था। सवाल उठने लगा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा? इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष के कामराज के पास थी। प्रधानमंत्री की तलाश शुरु हुई और दो नाम सामने आए। पहला मोरारजी देसाई और दूसरा इंदिरा गांधी। इस दौड़ में एक और नाम शामिल था के. कामराज का। उस समय पार्टी में सिंडिकेट नेताओं का बोलबाला था और उसके प्रमुख कामराज ही थे। 13 जनवरी की रात सिंडिकेट के नेताओं की एक बैठक हुई थी। बैठक में कामराज ने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया था। 14 जनवरी को कांग्रेस वर्किग कमेटी की बैठक हुई। 19 जनवरी तक प्रधानमंत्री के फैसले की मियाद तय हुई। इस बीच मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डीपी मिश्रा ने मुख्यमंत्रियों की एक बैठक बुलाई। इसमें फैसला हुआ कि अगर के कामराज का नाम तय हुआ तो उनका समर्थन करेंगे, वरना इंदिरा गांधी का समर्थन करेंगे। कामराज मना कर चुके थे। कांग्रेस के 14 में 12 मुख्यमंत्री इंदिरा के समर्थन में थे। मोरारजी के पक्ष में सिर्फ यूपी और गुजरात के मुख्यमंत्री थे। 19 जनवरी को प्रधानमंत्री पद के लिए वोटिंग हुई। इसमें इंदिरा की जीत हुई। मोरारजी देसाई उप-प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री बने। इंदिरा गांधी ने 19 जनवरी 1966 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद इंदिरा लगातार 3 कार्यकाल तक प्रधानमंत्री रहीं। 1980 में वो चौथी बार प्रधानमंत्री बनीं। 31 अक्टूबर 1984 को अपनी हत्या के दिन तक देश की प्रधानमंत्री रहीं।

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