• मुख्यमंत्री उड़नदस्ता ने छापेमारी कर शुक्रवार देर रात फर्जी कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़

  • वहां उनोलो टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और इंडोसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दो फर्जी कॉल सेंटर चल रहे थे

  • दोनों कॉल सेंटर में 50 के लगभग युवक- युवतियां काम कर रहे थे

गुरुग्राम, 07 नवंबर (एजेंसी)। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता ने छापेमारी कर शुक्रवार देर रात सेक्टर-35 में स्थित जीएसएम टेक्नोलॉजी बिल्डिंग में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल पर चल रहे दोनों कॉल सेंटर के चार मालिकों को मौके से गिरफ्तार किया। दो आरोपी अभी फरार चल रहे हैं। दोनों कॉल सेंटर में 50 के लगभग युवक- युवतियां काम कर रहे थे। सभी से पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया गया।

इस बिल्डिंग में डेढ़ महीने से दोनों कॉल सेंटर चल रहे थे। दोनों के अलग-अलग मालिक थे, लेकिन दोनों कॉल सेंटर का काम करने का तरीका एक जैसा ही था। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के इंस्पेक्टर कृष्ण की शिकायत पर बादशाहपुर थाने में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री उड़नदस्ता गुरुग्राम के डीएसपी इंद्रजीत यादव ने बताया कि टीम के साथ वे शुक्रवार देर रात सेक्टर-35 के प्लॉट नंबर चार स्थित जीएसएम टेक्नोलॉजी बिल्डिंग की पांचवी मंजिल पर पहुंचे। वहां उनोलो टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और इंडोसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दो फर्जी कॉल सेंटर चल रहे थे। दोनों कॉल सेंटर में 50 लोग काम कर रहे थे। वे अमेरिका के लोगों को फोन कर पॉप अप और सामाजिक सुरक्षा नंबर के नाम पर लोगों से ठगी करते थे। टीम ने मौके से दोनों कॉल सेंटर के चार मालिकों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस मे मुताबिक इंडोंसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का मालक राहुल कुमार अमेरिका के लोगों को आईबीम और एक्सलाइट साफ्टवेयर से फोन करते। उनको कहते थे कि सोशल सिक्योरिटी नंबर (एसएसएन ) से गलत काम हुआ है। एसएसएन नंबर ब्लॉक होने वाले हैं। ऐसे में वह लोग डर जाते हैं और उनको इस दिक्कत से निकालने के एवज में सौ डॉलर से लेकर 500 डॉलर तक वसूलते करते थे। लोगों से गूगल प्ले और आईट्यून के गिफ्ट कोड से रुपये लेते थे। इस बिल्डिंग में कॉल सेंटर पिछले एक महीने से चल रहा था। कॉल सेंटर में 25 युवक ओर युवतियां काम कर रहे थे। रात में कॉल सेंटर आठ बजे शुरू होता था और सुबह सात बजे तक चलता था। सभी को 20 से 30 हजार रुपये सैलरी मिलती थी। पौने दो लाख रुपये का किराया है। लगभग सवा करोड़ रुपये की ठगी की। तीन पार्टनर मिलकर कॉल सेंटर को चला रहे थे।

इसके अलावा उसी मंजिल पर उनोलो टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक अन्य फर्जी कॉल सेंटर चल रहा था। माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के कर्मचारी बनकर अमेरिका के लोगों को पॉप भेजते थे और उनको मदद करने के नाम पर ठगी करते थे। डॉलर में लोगों से रुपये ठगते थे। एक करोड़ से ज्यादा की अब तक ठगी कर चुके हैं। यह कॉल सेंटर पिछले डेढ़ महीने से चल रहा था। यहां भी 25 युवक और युवतियां काम कर रहे थे। इस कॉल सेंटर को भी तीन पार्टनर मिलकर चला रहे थे। पुलिस ने मौके से दो पार्टनर को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मौके से दो लैपटॉप, 6 लाख 48 हजार नगद बरामद किए गए।

साइबर सिटी में फैलता जा रहा है फर्जी कॉल सेंटरों का जाल

साइबर सिटी में फर्जी कॉल सेंटरों पर लगाम नहीं लग पा रही है। इसका प्रमाण है शुक्रवार रात भी सीएम फ्लाइंग स्क्वायड की टीम द्वारा सेक्टर-35 इलाके में दो फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया जाना। इससे पहले 30 से अधिक फर्जी कॉल सेंटर पकड़े जा चुके हैं।

शुक्रवार शाम सीएम फ्लाइंग स्क्वायड की टीम के प्रभारी डीएसपी इंद्रजीत यादव को सूचना मिली थी कि सेक्टर-35 इलाके की जीएसएम टेक्नोलाजी बिल्डिंग में दो फर्जी कॉल सेंटर चल रहे हैं। सूचना के आधार पर टीम गठित कर मौके पर भेजा गया। टीम पहले बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल पर संचालित उनोलो टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कॉल सेंटर में पहुंची। वहां पर काफी संख्या में कर्मचारी काम कर रहे थे। पूछताछ करने पर पता चला कि सेंटर बिना अनुमति के चल रहा है।

सेंटर का संचालक दिल्ली निवासी रोशन थामस मौके पर नहीं मिला लेकिन उसके दो पार्टनर दिल्ली के ही रहने वाले मनीष एवं सुनील त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके कब्जे से दो लैपटाप एवं छह लाख 48 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। इसके बाद टीम इंडोसाफ्ट टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड नाम से चलाए रहे कॉल सेंटर में पहुंची। छानबीन में पता चला कि इस सेंटर के पास भी अनुमति नहीं। संचालक बिहार निवासी राहुल कुमार मौके पर नहीं मिला। पूछताछ के बाद मौके पर मौजूद राहुल के पार्टनर जिगर व हंसराज को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से चार सीपीयू एवं दो लैपटाप बरामद किए गए।

पूछताछ के मुताबिक कॉल सेंटरों के कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर सिस्टम में पहले वायरस भेजते थे। फिर फोन करके तकनीकी सहायता देने की बात करते थे। जिनसे बात हो जाती थी उनसे तकनीकी सहायता के नाम पर 100 से 500 डालर तक वसूलते थे। आरोपितों से पूछताछ में सामने आएगा कि कबसे कॉल सेंटर चलाए जा रहे थे। अब तक कितने लोगों के साथ ठगी की गई और कितनी राशि वसूली गई।

 

 

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