• सोशल मीडिया पर श्रेया की नियुक्ति से जुड़ा एक लेटर वायरल हुआ

  • मेयर की बेटी श्रेया उनियाल को भारतीय चिकित्सा परिषद में नौकरी दिए जाने की खबर

  • वायरल लेटर में 4 लोगों को नियुक्ति देने के लिए कहा गया है

देहरादून 30 अगस्त (एजेंसी) आये दिन बीजेपी के विधायको को लेकर कोई न कोई बड़ा खुलासा होता ही रहता है, जिसके चलते दिन-ब-दिन बीजेपी पार्टी की छवि धूमिल होती जा रही है। सूत्रों के अनुसार देहरादून नगर निगम के मेयर सुनील उनियाल गामा का बेटी मोह सामने आया है। सूत्रों की माने तो मेयर की बेटी को भारतीय चिकित्सा परिषद में नौकरी मिली है, जिस पर उत्तराखंड में जमकर बवाल मचा हुआ है। एक तरफ जहाँ कोरोना काल में लोगों की नौकरियां लगातार जा रही हैं। वहीँ सरकार ने भी नई नियुक्तियों पर रोक लगा रखी है, परन्तु ऐसी मुश्किल घड़ी में भी देहरादून के मेयर ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपनी बेटी को भारतीय चिकित्सा परिषद में लेखाकार के पद पर नियुक्ति दिलवा दी, इसका खुलासा होने के बाद से मेयर की बेटी श्रेया उनियाल को भारतीय चिकित्सा परिषद में नौकरी दिए जाने की खबर का विवाद गहराता जा रहा है।

बता दे कि सोशल मीडिया पर श्रेया की नियुक्ति से जुड़ा एक लेटर वायरल हुआ है, जिसने बेरोजगार युवाओं के दर्द को दुगना करने का काम किया है। इस लेटर के वायरल होते ही लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। बता दे कि वायरल लेटर पर जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल के अधिकारी के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। रजिस्ट्रार भारतीय चिकित्सा परिषद को भेजे गए इस पत्र में 4 लोगों को नियुक्ति देने के लिए कहा गया है, जिसमें दो पद सुरक्षाकर्मी के हैं, एक पद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का है, जबकि एक पद लेखाकार का है। लिस्ट में लेखाकार के पद पर श्रेया उनियाल को नियुक्ति देने की बात लिखी है, जो कि मेयर सुनील उनियाल गामा की बेटी है।

तैनाती का पत्र वायरल होने के बाद से उत्तराखंड की राजनीती में जमकर बवाल हो रहा है। सूत्रों के अनुसार लोगों ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारों की भीड़ में सिर्फ मेयर की बेटी को ही क्यों इस पद पर तैनाती दी जा रही है। बता दे कि नियुक्ति को लेकर विभाग ने विज्ञप्ति ही नहीं निकाली। जिला पीआरडी एवं युवा कल्याण अधिकारी प्रकाशचंद्र सती ने कहा कि उन्हें पत्र की जानकारी नहीं है, क्योंकि पत्र पर 17 जुलाई की तारीख अंकित होने की बात कही जा रही है। जबकि, उन्होंने 11 अगस्त को चार्ज लिया है। संबंधित मामले में जानकारी मांगी जाएगी।

विवाद बढ़ने के बाद युवा कल्याण के उपाध्यक्ष जितेंद्र रावत ने इसे लेकर सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि संबंधित पद अस्थायी होते हैं। विभाग अपनी जरूरत के हिसाब से कभी भी आवेदनकर्ता को नौकरी से हटा सकते हैं। लेखाकार पद के लिए जो योग्यता चाहिए थी, वो महज एक आवेदनकर्ता द्वारा पूरी हो रही थी। जिस वजह से लेखाकार के पद पर उसी नाम को भारतीय चिकित्सा परिषद के रजिस्ट्रार को भेजा गया है।

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