• विकास योजनाओं के लिए भविष्य में जो जमीनें ली जाएंगी, उसमें किसानों को लैंडपूल का विकल्प भी दिया जाएगा

  • प्राधिकरण से विकसित जमीन वापस मिलने तक किसानों को पांच हजार रुपये प्रति एकड़ धनराशि भी मिलेगी

  • दस्तावेज में जमीन जिन किसानों के नाम दर्ज होगी, उन्हें ही लैंडपूल प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा और विकसित भूखंड मिलेगा

ग्रेटर नोएडा। खेती करने वाले किसान आने वाले दिनों में मॉल के मालिक व उद्योगपति बनेंगे। प्रदेश सरकार ने लैंडपूल पॉलिसी को मंजूरी देकर किसानों को अपनी जमीन पर कारोबार करने का मौका दे दिया है। लैंडपूल पॉलिसी का शासनादेश यमुना प्राधिकरण को मिल चुका है। प्राधिकरण इसे आगामी बोर्ड बैठक में अनुमोदित कर लागू करेगा। विकास योजनाओं के लिए भविष्य में जो जमीनें ली जाएंगी, उसमें किसानों को लैंडपूल का विकल्प भी दिया जाएगा।

किसानों को विकास में सहभागी बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में लैंडपूल पॉलिसी लागू की है। इसके तहत किसानों की सहमति से प्राधिकरण जमीन लेंगे। विकसित करने के बाद ली गई जमीन का 25 फीसद किसानों को लौटा दी जाएगी। किसानों को इस जमीन पर उद्योग, व्यावसायिक, ग्रुप हाउसिग की योजनाएं बनाने या फिर किसी अन्य को विक्रय करने की अनुमति होगी। यानी किसान चाहेंगे तो प्राधिकरण के मानक के अनुसार जमीन पर मॉल का निर्माण, उद्योग लगा सकेंगे। विक्रय करते समय जमीन की कीमत भी किसान खुद तय करेंगे। प्राधिकरण से विकसित जमीन वापस मिलने तक किसानों को पांच हजार रुपये प्रति एकड़ धनराशि भी मिलेगी। अगर किसान जमीन को नहीं बेच पाते हैं तो पांच साल बाद प्राधिकरण उनसे अपनी प्रचलित दरों पर जमीन वापस खरीद लेगा।

न्यूनतम 25 एकड़ जमीन ली जाएगी

मास्टर प्लान या योजना के लिए प्राधिकरण किसानों से लैंडपूल पॉलिसी के तहत जमीन लेगा। न्यूनतम 25 एकड़ जमीन ली जाएगी। जमीन देने के लिए किसानों को आवेदन व संबंधित दस्तावेज देने होंगे। जांच के बाद प्राधिकरण की समिति लैंडपूल के लिए अनुमति देगी। इसके लिए अस्सी फीसद किसानों की सहमति जरूरी होगी। शेष भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ली जाएगी। जमीन के लिए किसानों के साथ पंजीकृत अनुबंध किया जाएगा। एक बार अनुबंध होने के बाद किसान इसे रद नहीं कर सकेंगे। जमीन विकसित करने का खर्च प्राधिकरण वहन करेंगे। किसानों को विकसित भूखंड की रजिस्ट्री कराने पर स्टांप ड्यूटी नहीं देनी होगी, लेकिन पंजीकरण शुल्क लगेगा, इसे प्राधिकरण वहन करेगा। बॉक्स

सस्ती दर पर जमीन कब्जाने की शिकायत होगी दूर

किसानों का सबसे बड़ा दर्द है कि प्राधिकरण उनकी जमीन को कौड़ियों में खरीदकर ऊंचे दाम में बेचता है और मोटा मुनाफा कमाता है। लैंडपूल पॉलिसी से किसानों की यह शिकायत दूर की गई है। किसानों को जमीन की कीमत के बजाय विकसित भूखंड मिलेगा। इसे बेचने और कीमत तय करने का अधिकार भी किसान को दे दिया गया है। खेती समाप्त होने के बाद बेरोजगार किसान को अपना कारोबार शुरू करने का अवसर भी मिल गया है। बॉक्स

रुकेगा जमीन का फर्जीवाड़ा, कानूनी विवाद

दस्तावेज में जमीन जिन किसानों के नाम दर्ज होगी, उन्हें ही लैंडपूल प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा और विकसित भूखंड मिलेगा। प्राधिकरण की समिति दस्तावेजों की जांच करेगी। इससे जमीन खरीद में होने वाले फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। वहीं जमीन अधिग्रहण को लेकर प्राधिकरण व किसानों के बीच होने वाले कानूनी विवाद भी समाप्त होंगे।

विकास में किसानों की भागीदारी हो गई है। परियोजनाओं में उनका हिस्सा होगा। लैंडपूल से किसानों को मौजूदा समय के सापेक्ष डेढ़ से दो गुना फायदा होगा।

-डा. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण

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