• आठवें दौर की वार्ता विफल, किसानों ने  आंदोलन को और तेज करने का लिया  निर्णय
  • सरकार से वार्ता पर अब कोई विश्वास नहीं रहा : योगेश प्रताप 
  •  शासन और प्रशासन की किसी भी कार्रवाई से किसान दबने और झुकने वाले नहीं

नोएडा, 09 जनवरी (एजेंसी)। केंद्र सरकार व किसान संगठनों के बीच आठवें दौर की वार्ता विफल होने के पश्चात धरनारत किसानों ने अपने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि यदि आगामी 20 जनवरी तक उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वह 26 जनवरी पर दिल्ली में होने वाली परेड में ट्रैक्टर सहित सम्मिलित होंगे। चिल्ला रेगुलेटर बॉर्डर पर धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन (भानु) के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप ने कहा कि सरकार से वार्ता पर अब कोई विश्वास नहीं रहा है। आठवें दौर की वार्ता के बाद भी सरकार किसानों की बात मानने मैं रुचि नहीं दिखा रही है। सरकार महज वार्ता के जरिए आंदोलन को लंबा खींचना चाह रही है जिससे किसानों का मनोबल टूट जाए। उन्होंने कहा कि अगर 20 जनवरी तक सरकार ने किसानों के हित में फैसला लेकर मांगे नहीं मानी तो 26 जनवरी को किसान ट्रैक्टरों के साथ गणतंत्र दिवस की परेड में सम्मिलित होंगे। इसके लिए धरना स्थल पर परेड की रिहर्सल चल रही है।

उन्होंने बताया कि आज भी धरना स्थल पर 11 किसान एक दिन की सांकेतिक भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।  वहीं दलित प्रेरणा स्थल पर धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि सरकार पूरी तरह से हठधर्मिता पर अड़ी हुई है। आठवें दौर की वार्ता के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकलना निराशाजनक है। उन्होंने बताया कि आगामी रणनीति बनाने के लिए रविवार को धरना स्थल पर एक महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन पंचायत को विफल करने की रणनीति में लगा हुआ है और उनके पदाधिकारियों को घरों में ही नजरबंद किया जा रहा है। मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि शासन और प्रशासन की किसी भी कार्रवाई से किसान दबने और झुकने वाले नहीं हैं और तीनों कृषि बिलों को निरस्त करा कर ही अपने आंदोलन को खत्म करेंगे।

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