• गौरी शंकर बिदुआ ने नरेंद्र मोदी सरकार को किसान विरोधी सरकार बताया

  • लोकसभा में पारित तीन विधेयकों पर कड़ी नाराजगी जतायी

  • गौरी शंकर बिदुआ बुंदेलखंड के किसान नेता और किसान रक्षा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष है

झांसी, 19 सितंबर (एजेंसी) उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के किसान नेता और किसान रक्षा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरी शंकर बिदुआ ने लोकसभा में तीन कृषि विधेयक पारित कराने वाले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे अब तक कि सबसे बड़ी किसान विरोधी सरकार बताया है। लोकसभा में पारित तीन विधेयकों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए किसान नेता ने यूनीवार्ता से खास बातचीत में  कहा कि यह सरकार एक तरफ तो किसान की आय दोगुनी करने का बात करती है लेकिन इन विधेयकों को लाकर कुछ ऐसा काम किया है कि किसान की आय ही नहीं रहेगी। जब आय ही नहीं होगी तो दोगुना क्या करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यूं तो अभी तक की कोई सरकार किसान हितैषी नहीं रही है और सभी ने किसानों का इस्तेमाल किया है लेकिन इस सरकार तो सभी को पीछे छोड़ते हुए किसान को मजदूर ही बना दिया है । सरकार जिन नीतियों को किसान हितैषी बता रही है उससे बुंदेलखंड का किसान तो पूरी तरह से ही बरबाद हो जायेगा । यहां 82 प्रतिशत लघु और सीमांत किसान हैं । ये ऐसे किसान हैं जो मात्र 50 किलोमीटर की दूरी तक तो अपनी फसल बेचने ले जा नहीं पाते, वह अब नई व्यवस्था में कितनी दूर तक ले जा पायेंगे और इनकी मोलभाव की कितनी क्षमता है। यह किसान जो अपने क्षेत्र में, अपने लोगों से, अपने उत्पादन का उचित मूल्य नहीं ले पाते वह क्या बड़े व्यवसायियों से अपने छोटे से उत्पादन का उचित मूल्य हासिल कर पायेंगे।

सरकार केवल बड़ी बड़ी बातें और वादें करती हैं लेकिन वास्तविकता में इनके आने के बाद कहीं कुछ बदलाव नहीं आया है, कम से कम किसानों और विशेषकर बुंदेलखंड के किसानों की स्थिति में तो बिल्कुल ही नहीं। अगर इस सरकार की नीतियों से यहां के किसानों को कोई राहत मिली होती तो आज भी किसानों की आत्महत्या की खबरें आम नहीं होती। इन विधेयकों के पारित होने के बाद तो अब किसान के पास कुछ करने और कहने को रह ही नहीं गया है ,अब किसान के पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद जारी रहने की बात को भी किसान नेता ने कोरी लफ्फाज़ी करार दिया है। प्रधानमंत्री ने ही कहा था कि कृषि फसल बीमा योजना में यह प्रावधान है कि जैसे ही फसल बरबादी की सूचना मिलेगी तो उसकी 50 प्रतिशत बीमा राशि 48 घंटे के भीतर किसान के खाते में पहुंच जाना चाहिए और बाकी राशि एक सप्ताह में पहुंच जाना चाहिए। हमारे यहां 2019 मे खरीफ की फसल को नुकसान हुआ था उसका मुआवजा आज तक नहीं मिला।

रबी की फसल का जो माल किसान ने न्यूनमत समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आधार पर सरकारी कांटों पर वर्ष 2018,19 और 20 में बेचा था उसका शत प्रतिशत भुगतान अभी तक नहीं मिला। ऐसे में किसान सरकार की इस बात पर कैसे विश्वास कर ले कि इन विधेयकों की वजह से किसान कहीं भी जाकर जब अपनी कीमत पर फसल बेचेगा तो तीन कार्यदिवस में उसकी पूरी कीमत व्यवसायी, उसे दे देगा। सरकार ने किसानों से किया कोई वादा तो पूरा किया हो तो किसान भी इनकी इस नई बात पर भरोसा कर पाता लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है इसलिए प्रधानमंत्री के इस आश्वासन पर भी हमें भरोसा नहीं है।

Read all Latest Post on खेल sports in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और ट्विटर पर ज्वॉइन करें