• उबर और ओला चालकों ने दिल्ली-एनसीआर में हड़ताल पर जाने की घोषणा की

  • इस मामले में अभी तक दोनों कंपनियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी

  • ईएमआई पर छूट की अवधि 31 दिसम्बर तक बढ़ाने और प्रति किलोमीटर किराया में बढ़ोतरी की मांग

नई दिल्ली, 27 अगस्त (एजेंसी)। आगामी एक सितम्बर से उबर और ओला जैसी मोबाइल ऐप आधारित कैब सेवा प्रदाता कंपनियों के साथ कार्यरत चालकों ने दिल्ली-एनसीआर में हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। चालक अपनी गाड़ियों की ईएमआई पर छूट की अवधि 31 दिसम्बर तक बढ़ाने और प्रति किलोमीटर किराया में बढ़ोतरी की मांग को लेकर यह हड़ताल करने जा रहे हैं। हालाँकि इस मामले में अभी तक दोनों कंपनियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। दिल्ली सर्वोदय चालक संघ के अध्यक्ष कमलजीत सिंह गिल ने ने बताया कि हमने प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्तमंत्री और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री को मदद के लिए कई पत्र लिखे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने आगे कहा कि अगर सरकार हमारी समस्याओं का समाधान नहीं करती है तो इन कंपनियों के साथ काम कर रहे लगभग दो लाख कैब चालकों के सामने एक सितम्बर से हड़ताल पर जाने के सिवाय और कोई विकल्प नहीं बचा है। हमारी प्रमुख चिंता अधिकतर कैब चालकों के वाहन पर ऋण की है। केंद्र सरकार द्वारा ऋण के पुन: भुगतान के लिए दी जाने वाली किस्त पर 31 अगस्त तक छूट है और यह अवधि समाप्त होने के बाद बैंक किस्त देने से चूकने पर वाहनों को जब्त करना शुरू कर देंगी। जब तक सरकार मदद नहीं करती, वाहन के खोने के डर के साथ काम करने के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं है। ऋण की किस्त के अलावा चालकों के ऊपर निर्धारित से अधिक गति पर वाहन चलाने की वजह से जुर्माना की बड़ी राशि देने का भी बोझ है।

कमलजीत सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण चालकों की आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी ज्यादातर लोग अभी भी घर से काम कर रहे हैं। इसकी वजह से ग्राहकों की संख्या घटकर सिर्फ 10 फीसदी रह गई है। रोज का टारगेट पूरा करने के लिए चालकों को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। इन दिनों, कंपनी को रखरखाव और ईंधन शुल्क में 26 फीसदी कमीशन की कटौती के बाद, एक चालक प्रतिदिन लगभग 150-200 रुपये कमा रहा है।

कोरोना महामारी से पहले हम जो कमाते थे, उसकी तुलना में यह बहुत कम है। ऐसी स्थिति में चालकों के समक्ष हड़ताल के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं रह गया है। प्रमुख मांगें – ऋण के पुन: भुगतान में छूट की अवधि 31 दिसम्बर तक बढ़ायी जाए। किराए में बढ़ोतरी की जाए। कंपनी द्वारा कमीशन बढ़ाने, तेज गति से वाहन चलाने पर कटने वाले ई-चालान वापस लिए जाएं।

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