New Delhi 04 नवम्बर (एजेंसी)  ज्योतिषाचार्य की माने तो आज यानी कि गुरुवार, 4 नवंबर को दीपावली पर ग्रहों के दुर्लभ योग बन रहे हैं, जिसके चलते इस साल शनि-गुरु मकर राशि में एक साथ हैं और दोनों ग्रह मार्गी हैं, वहीँ इस ग्रह योग के साथ ही सूर्य, बुध सहित चार ग्रह एक साथ तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 2021 से पहले 7 नवंबर 1961 को दीपावली मनाई गई थी, उस समय भी शनि-गुरु मकर राशि में स्थित थे और इस साल भी ये ग्रह स्थिति बन रही है। गुरुवार को सूर्य, बुध, मंगल और चंद्र, ये चारों ग्रह एक साथ तुला राशि में रहेंगे। 1961 में भी तुला राशि में चार ग्रहों का योग था। उस समय तुला राशि में शुक्र, बुध, सूर्य और चंद्र स्थित थे।

लक्ष्मी पूजा के लिए जरूरी सामग्री

ज्योतिषाचार्य की माने तो देवी लक्ष्मी की मूर्ति, प्रतिमा को स्नान कराने के लिए तांबे या चांदी का बर्तन, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित करने के लिए वस्त्र, आभूषण, चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, अष्टगंध, गुलाब, कमल के फूल, प्रसाद के लिए फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, अपनी इच्छा के अनुसार दक्षिणा। ये चीजें अनिवार्य रूप से लक्ष्मी पूजा में रखें।

पूजन विधि

पूजन शुरू करने से पहले श्री गणेश का पूजन करें। भगवान गणेश को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प, चावल चढ़ाएं। गणेश जी के बाद देवी लक्ष्मी की पूजा शुरू करें। माता लक्ष्मी की चांदी, पारद या स्फटिक की प्रतिमा का पूजन कर सकते हैं। माता लक्ष्मी की मूर्ति अपने पूजा घर में स्थापित करें। मूर्ति में माता लक्ष्मी आवाहन करें। आवाहन यानी माता लक्ष्मी को आमंत्रित करें। लक्ष्मी को अपने घर बुलाएं। माता लक्ष्मी को अपने घर में सम्मान सहित स्थान दें। यानी आसन दें। ये भावनात्मक रूप से करना चाहिए। माता लक्ष्मी को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और फिर जल से कराना चाहिए। माता लक्ष्मी को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। पुष्पमाला पहनाएं। सुगंधित इत्र अर्पित करें। प्रसाद चढ़ाएं। कुमकुम से तिलक करें।

अब धूप और दीप जलाएं। माता लक्ष्मी को गुलाब और कमल के फूल विशेष प्रिय है। ये फूल चढ़ाएं। बिल्वपत्र और बिल्व फल अर्पित करने से भी महालक्ष्मी की प्रसन्नता होती है। ये चीजें भी देवी को चढ़ा सकते हैं। 11 या 21 चावल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक जलाएं। आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें। अगर आप चाहें तो महालक्ष्मी पूजन में ऊँ महालक्ष्मयै नमः मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। पूजा के बाद जानी-अनजानी गलतियों के लिए भगवान से क्षमा याचना करें। इसके बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें और खुद भी लें।

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