Adam Gondvi Gazal: Aap kahate hai sarapa gulmohar hai Jindagi

 

आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है ज़िंदगी

हम ग़रीबों की नज़र में इक क़हर है ज़िंदगी

भुखमरी की धूप में कुम्हला गई अस्मत की बेल

मौत के लमहात से भी तल्ख़तर है ज़िंदगी

डाल पर मज़हब की पैहम खिल रहे दंगों के फूल

ख़्वाब के साए में फिर भी बेख़बर है ज़िंदगी

रोशनी की लाश से अब तक जिना करते रहे

ये वहम पाले हुए शम्सो-क़मर है ज़िंदगी

दफ़्न होता है जहाँ आ कर नई पीढ़ी का प्यार

शहर की गलियों का वो गंदा असर है ज़िंदगी

 

अदम गोंडवी की अन्य गजल

 

 

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