अदम गोंडवी हिंदी गजल : बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को

अदम गोंडवी हिंदी गजल : बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को Adam Gondvi Hindi Gazal: Bechta yun hi nahi hai aadmi Imaan ko

बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को,

भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को ।


सब्र की इक हद भी होती है तवज्जो दीजिए,

गर्म रक्खें कब तलक नारों से दस्तरख़्वान को ।

शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून,

पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को ।

पार कर पाएगी ये कहना मुकम्मल भूल है,

इस अहद की सभ्यता नफ़रत के रेगिस्तान को ।

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Title: adam gondvi hindi gazal bechta yun hi nahi hai aadmi imaan ko in Hindi  | In Category: गजल ghazal

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