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अदम गोंडवी हिंदी गजल : मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको  

मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको / अदम गोंडवी Adam Gondvi Hindi Gazal| Mai chamaro ki gali taq le chalunga aapko
मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको / अदम गोंडवी Adam Gondvi Hindi Gazal| Mai chamaro ki gali taq le chalunga aapko

आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को

मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको

जिस गली में भुखमरी की यातना से ऊब कर

मर गई फुलिया बिचारी एक कुएँ में डूब कर

है सधी सिर पर बिनौली कंडियों की टोकरी

आ रही है सामने से हरखुआ की छोकरी

चल रही है छंद के आयाम को देती दिशा

मैं इसे कहता हूं सरजूपार की मोनालिसा

कैसी यह भयभीत है हिरनी-सी घबराई हुई

लग रही जैसे कली बेला की कुम्हलाई हुई

कल को यह वाचाल थी पर आज कैसी मौन है

जानते हो इसकी ख़ामोशी का कारण कौन है

थे यही सावन के दिन हरखू गया था हाट को

सो रही बूढ़ी ओसारे में बिछाए खाट को

डूबती सूरज की किरनें खेलती थीं रेत से

घास का गट्ठर लिए वह आ रही थी खेत से

आ रही थी वह चली खोई हुई जज्बात में

क्या पता उसको कि कोई भेड़िया है घात में

होनी से बेखबर कृष्णा बेख़बर राहों में थी

मोड़ पर घूमी तो देखा अजनबी बाहों में थी

चीख़ निकली भी तो होठों में ही घुट कर रह गई

छटपटाई पहले फिर ढीली पड़ी फिर ढह गई

दिन तो सरजू के कछारों में था कब का ढल गया

वासना की आग में कौमार्य उसका जल गया

और उस दिन ये हवेली हँस रही थी मौज में

होश में आई तो कृष्णा थी पिता की गोद में

जुड़ गई थी भीड़ जिसमें जोर था सैलाब था

जो भी था अपनी सुनाने के लिए बेताब था

बढ़ के मंगल ने कहा काका तू कैसे मौन है

पूछ तो बेटी से आख़िर वो दरिंदा कौन है

कोई हो संघर्ष से हम पाँव मोड़ेंगे नहीं

कच्चा खा जाएँगे ज़िन्दा उनको छोडेंगे नहीं

कैसे हो सकता है होनी कह के हम टाला करें

और ये दुश्मन बहू-बेटी से मुँह काला करें

बोला कृष्णा से बहन सो जा मेरे अनुरोध से

बच नहीं सकता है वो पापी मेरे प्रतिशोध से

पड़ गई इसकी भनक थी ठाकुरों के कान में

वे इकट्ठे हो गए थे सरचंप के दालान में

दृष्टि जिसकी है जमी भाले की लम्बी नोक पर

देखिए सुखराज सिंग बोले हैं खैनी ठोंक कर

क्या कहें सरपंच भाई क्या ज़माना आ गया

कल तलक जो पाँव के नीचे था रुतबा पा गया

कहती है सरकार कि आपस मिलजुल कर रहो

सुअर के बच्चों को अब कोरी नहीं हरिजन कहो

देखिए ना यह जो कृष्णा है चमारो के यहाँ

पड़ गया है सीप का मोती गँवारों के यहाँ

जैसे बरसाती नदी अल्हड़ नशे में चूर है

हाथ न पुट्ठे पे रखने देती है मगरूर है

भेजता भी है नहीं ससुराल इसको हरखुआ

फिर कोई बाँहों में इसको भींच ले तो क्या हुआ

आज सरजू पार अपने श्याम से टकरा गई

जाने-अनजाने वो लज्जत ज़िंदगी की पा गई

वो तो मंगल देखता था बात आगे बढ़ गई

वरना वह मरदूद इन बातों को कहने से रही

जानते हैं आप मंगल एक ही मक़्क़ार है

हरखू उसकी शह पे थाने जाने को तैयार है

कल सुबह गरदन अगर नपती है बेटे-बाप की

गाँव की गलियों में क्या इज़्ज़त रहे्गी आपकी

बात का लहजा था ऐसा ताव सबको आ गया

हाथ मूँछों पर गए माहौल भी सन्ना गया था

क्षणिक आवेश जिसमें हर युवा तैमूर था

हाँ, मगर होनी को तो कुछ और ही मंजूर था

रात जो आया न अब तूफ़ान वह पुर ज़ोर था

भोर होते ही वहाँ का दृश्य बिलकुल और था

सिर पे टोपी बेंत की लाठी संभाले हाथ में

एक दर्जन थे सिपाही ठाकुरों के साथ में

घेरकर बस्ती कहा हलके के थानेदार ने -

"जिसका मंगल नाम हो वह व्यक्ति आए सामने"

निकला मंगल झोपड़ी का पल्ला थोड़ा खोलकर

एक सिपाही ने तभी लाठी चलाई दौड़ कर

गिर पड़ा मंगल तो माथा बूट से टकरा गया

सुन पड़ा फिर "माल वो चोरी का तूने क्या किया"

"कैसी चोरी, माल कैसा" उसने जैसे ही कहा

एक लाठी फिर पड़ी बस होश फिर जाता रहा

होश खोकर वह पड़ा था झोपड़ी के द्वार पर

ठाकुरों से फिर दरोगा ने कहा ललकार कर -

"मेरा मुँह क्या देखते हो ! इसके मुँह में थूक दो

आग लाओ और इसकी झोपड़ी भी फूँक दो"

और फिर प्रतिशोध की आंधी वहाँ चलने लगी

बेसहारा निर्बलों की झोपड़ी जलने लगी

दुधमुँहा बच्चा व बुड्ढा जो वहाँ खेड़े में था

वह अभागा दीन हिंसक भीड़ के घेरे में था

घर को जलते देखकर वे होश को खोने लगे

कुछ तो मन ही मन मगर कुछ जोर से रोने लगे

"कह दो इन कुत्तों के पिल्लों से कि इतराएँ नहीं

हुक्म जब तक मैं न दूँ कोई कहीं जाए नहीं"

यह दरोगा जी थे मुँह से शब्द झरते फूल से

आ रहे थे ठेलते लोगों को अपने रूल से

फिर दहाड़े, "इनको डंडों से सुधारा जाएगा

ठाकुरों से जो भी टकराया वो मारा जाएगा

इक सिपाही ने कहा, "साइकिल किधर को मोड़ दें

होश में आया नहीं मंगल कहो तो छोड़ दें"

बोला थानेदार, "मुर्गे की तरह मत बांग दो

होश में आया नहीं तो लाठियों पर टांग लो

ये समझते हैं कि ठाकुर से उलझना खेल है

ऐसे पाजी का ठिकाना घर नहीं है, जेल है"

पूछते रहते हैं मुझसे लोग अकसर यह सवाल

"कैसा है कहिए न सरजू पार की कृष्णा का हाल"

उनकी उत्सुकता को शहरी नग्नता के ज्वार को

सड़ रहे जनतंत्र के मक्कार पैरोकार को

धर्म संस्कृति और नैतिकता के ठेकेदार को

प्रांत के मंत्रीगणों को केंद्र की सरकार को

मैं निमंत्रण दे रहा हूँ- आएँ मेरे गाँव में

तट पे नदियों के घनी अमराइयों की छाँव में

गाँव जिसमें आज पांचाली उघाड़ी जा रही

या अहिंसा की जहाँ पर नथ उतारी जा रही

हैं तरसते कितने ही मंगल लंगोटी के लिए

बेचती है जिस्म कितनी कृष्ना रोटी के लिए!

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Title: adam gondvi hindi gazal mai chamaro ki gali taq le chalunga aapko in Hindi  | In Category: गजल ghazal

मिली जुली गजल

  1. अदम गोंडवी हिंदी गजल : न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से  
  2. अदम गोंडवी हिंदी गजल : जो उलझ कर रह गई है फाइलों के जाल में  
  3. अदम गोंडवी हिंदी गजल : जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिए
  4. अदम गोंडवी हिंदी गजल : ज़ुल्फ़-अँगड़ाई-तबस्सुम-चाँद-आईना-गुलाब
  5. अदम गोंडवी हिंदी गजल : चाँद है ज़ेरे-क़दम, सूरज खिलौना हो गया  
  6. अदम गोंडवी हिंदी गजल : घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली है  
  7. अदम गोंडवी हिंदी गजल : काजू भुने पलेट में ह्विस्की गिलास में  
  8. अदम गोंडवी हिंदी गजल : आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है ज़िंदगी  
  9. अदम गोंडवी हिंदी गजल : हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है  
  10. अदम गोंडवी हिंदी गजल : बताओ कैसे लिख दूं धूप फागुन की नशीली है
  11. अदम गोंडवी हिंदी गजल : जो उलझ कर रह गयी है फाइलों के जाल में  
  12. अदम गोंडवी हिंदी गजल : बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को  
  13. अदम गोंडवी हिंदी गजल : जुल्फ अँगड़ाई तबस्सुम चाँद आइना गुलाब  
  14. अदम गोंडवी हिंदी गजल : जो उलझ कर रह गई है  फाइलों के जाल में
  15. अदम गोंडवी हिंदी गजल : विकट बाढ़ की करुण कहानी  
  16. अदम गोंडवी हिंदी गजल : घर में ठण्डे चूल्हे पर अगर खाली पतीली है  
  17. चेतन आनंद: फूल तितली झील झरने चाँद तारे रख दिए
  18. चेतन आनंद: झांके है कोई पलपल अहसास की नदी में
  19. चेतन आनंद: अहसास का फलक़ है, अल्फाज़ की ज़मीं है
  20. चेतन आनंद: हम तुम्हारे ग़ुलाम हो न सके,
  21. चेतन आनंद : प्यार कब आगे बढ़ा तक़रार से रहकर अलग
  22. चेतन आनंद : आ गये रिश्तों का हम रंगीं दुशाला छोड़कर
  23. चेतन आनंद : हम नहीं शाख, न पत्ते ही, न फल जैसे हैं
  24. चेतन आनंद : आंगन में तेरा अक्सर दीवार खड़ी करना
  25. चेतन आनंद : हमारे हौसले अहसास की हद से बड़े होते
  26. चेतन आनंद : उजाले की हुई पत्थर सरीखी पीर को तोड़ें
  27. अदम गोंडवी हिंदी गजल : भूख के एहसास को शेरो-सुख़न तक ले चलो
  28. चेतन आनंद : ऐसा भी कोई तौर तरीका निकालिये
  29. चेतन आनंद : वक्त की सियासत के क्या अजब झमेले हैं
  30. चेतन आनंद : गुमनाम हर बशर की पहचान बनके जी
  31. चेतन आनंद : मुश्क़िल है, मुश्क़िलात की तह तक नहीं जाती
  32. चेतन आनंद : कभी रहे हम भीड़ में भइया, कभी रहे तन्हाई में,
  33. चेतन आनंद : राहों से पूछ लेना, पत्थर से पूछ लेना 
  34. चेतन आनंद : इन सियासतदानों के घर में भी ठोकर मारकर
  35. चेतन आनंद : पहले तो होते थे केवल काले, नीले, पीले दिन
  36. चेतन आनंद : अब तो बदल पुराना सोच
  37. चेतन आनंद : अजब अनहोनियां हैं फिर अंधेरों की अदालत में
  38. चेतन आनंद : आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ
  39. चेतन आनंद : मेरी परवाज़ जब-जब भी कभी अम्बर में होती है
  40. चेतन आनंद : याद आते हैं हमें जब चंद चेहरे देरतक
  41. चेतन आनंद : खमोशियां ही ख़मोशियां हैं हमारे दिल में तुम्हारे दिल में।
  42. चेतन आनंद: बनके आई जो दुल्हन उस खुशी के चर्चे हैं
  43. अदम गोंडवी हिंदी गजल : जिसके सम्मोहन में पागल धरती है आकाश भी है  
  44. अदम गोंडवी हिंदी गजल : आप कहते हैं सरापा गुलमुहर है ज़िन्दगी  
  45. अदम गोंडवी हिंदी गजल : न महलों की बुलन्दी से , न लफ़्ज़ों के नगीने से  
  46. अदम गोंडवी हिंदी गजल : चाँद है ज़ेरे क़दम, सूरज खिलौना हो गया  
  47. अदम गोंडवी हिंदी गजल : ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़ारों में  
  48. अदम गोंडवी हिंदी गजल : वेद में जिनका हवाला हाशिये पर भी नहीं  
  49. अदम गोंडवी हिंदी गजल : काजू भुनी प्लेट में ह्विस्की गिलास में  
  50. अदम गोंडवी हिंदी गजल : वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है  
  51. अदम गोंडवी हिंदी गजल : तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है  
  52. अदम गोंडवी हिंदी गजल : हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये  
  53. अदम गोंडवी हिंदी गजल : ग़र चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे  
  54. अदम गोंडवी हिंदी गजल : जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिये  
  55. अदम गोंडवी हिंदी गजल :  मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की  
  56. अदम गोंडवी हिंदी गजल : बज़ाहिर प्यार की दुनिया में जो नाकाम होता है  
  57. अदम गोंडवी हिंदी गजल : भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है  
  58. अदम गोंडवी हिंदी गजल : आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे
  59. अदम गोंडवी हिंदी गजल :जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक़्क़ाम कर देंगे 
  60. अदम गोंडवी हिंदी गजल : मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको  
  61. जां निसार अख्तर की गजल:  हर लफ़्ज़ तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है
  62. जां निसार अख्तर की गजल: इसी सबब से हैं शायद, अज़ाब जितने हैं
  63. जां निसार अख्तर की गजल:  ज़रा-सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था
  64. जां निसार अख्तर की गजल: ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझसे मुकरने लगा हूँ मैं
  65. जां निसार अख्तर की गजल: लम्हा-लम्हा तिरी यादें जो चमक उठती हैं
  66. जां निसार अख्तर की गजल: ज़िन्दगी ये तो नहीं, तुझको सँवारा ही न हो
  67. जां निसार अख्तर की गजल: वो आँख अभी दिल की कहाँ बात करे है
  68. जां निसार अख्तर की गजल: फुर्सत-ए-कार फ़क़त चार घड़ी है यारो
  69. जां निसार अख्तर की गजल: उजड़ी-उजड़ी हुई हर आस लगे
  70.  ज़िन्दगी तनहा सफ़र की रात है: जां निसार अख्तर
  71. कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये : दुष्यंत कुमार
  72. अपाहिज व्यथा को सहन कर रहा हूं : दुष्यंत कुमार
  73. तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं : दुष्यंत कुमार
  74. नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं :  दुष्यंत कुमार
  75. मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ-निदा फ़ाज़ली
  76. बात कम कीजे ज़ेहानत को छुपाए रहिए - निदा फ़ाज़ली
  77. तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते- वसीम बरेलवी
  78. कैफी आज़मी की नज़्म "मकान"
  79. वो कमरा बात करता था जावेद अख्तर की नज्म
  80. कैफ़ी आज़मी की नज़्म फर्ज
  81. कैफ़ी आज़मी की गजल :  शोर परिंदों ने यु ही न मचाया होगा
  82. गुलजार की नज्म: अलाव
  83. अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ –राहत इंदौरी
  84. सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद है-अदम गोंडवी
  85. लोग हर मोड़ पर रुक – रुक के संभलते क्यों हैं: राहत इन्दौरी
  86. कैफी आज़मी की प्रसिद्ध नज़्म: दूसरा वनवास
  87. इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है: दुष्यंत कुमार की गजल
  88. आँख की ये एक हसरत थी कि बस पूरी हुई- शहरयार

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