Adam Gondvi Hindi Gazal: N Mahalo ki bulandi se N lafzo ke Nageene se

ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़ारों में

मुसल्सल फ़न का दम घुटता है इन अदबी इदारों में

न इन में वो कशिश होगी , न बू होगी , न रआनाई

खिलेंगे फूल बेशक लॉन की लम्बी कतारों में

अदीबो ! ठोस धरती की सतह पर लौट भी आओ

मुलम्मे के सिवा क्या है फ़लक़ के चाँद-तारों में

रहे मुफ़लिस गुज़रते बे-यक़ीनी के तजरबे से

बदल देंगे ये इन महलों की रंगीनी मज़ारों में

कहीं पर भुखमरी की धूप तीखी हो गई शायद

जो है संगीन के साये की चर्चा इश्तहारों में.

 

अदम गोंडवी की अन्य गजल (Adam Gondvi ghazal)

 

 

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