गजल

चेतन आनंद : आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ

चेतन आनंद : आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ Chetan anand Hindi Gazal: Aakhir mai baith hi gaya tanhaiyo ke saath
चेतन आनंद : आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ

आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ

चलता भी कैसे वो भला परछांइयों के साथ।

 

मायूसियां मिलेंगीं तुझे] चाह छोड़ दे]

सपना कभी रहा भी है सच्चाइयों के साथ।

 

मैने सुना था मंज़िलें मिलती ज़रूर हैं

मैं चल रहा हूं इसलिये कठिनाइयों के साथ।

 

मैं चलते-चलते धूप के साये में रुक गया

वो रुकते-रुकते चल दिया परछांइयों के साथ।

 

पछवा हवा चली तो बहुत हो गये जुदा

कम लोग रह गये हैं अब पुरवाइयों के साथ।

 

 

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चेतन आनंद : आंगन में तेरा अक्सर दीवार खड़ी करना

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चेतन आनंद : अजब अनहोनियां हैं फिर अंधेरों की अदालत में

चेतन आनंद : आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ

चेतन आनंद : मेरी परवाज़ जब-जब भी कभी अम्बर में होती है

चेतन आनंद : याद आते हैं हमें जब चंद चेहरे देरतक

चेतन आनंद : खमोशियां ही ख़मोशियां हैं हमारे दिल में तुम्हारे दिल में

चेतन आनंद: बनके आई जो दुल्हन उस खुशी के चर्चे हैं

 

 

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Title: chetan anand hindi gazal aakhir mai baith hi gaya tanhaiyo ke saath in Hindi  | In Category: गजल ghazal

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  67. जां निसार अख्तर की गजल: वो आँख अभी दिल की कहाँ बात करे है
  68. जां निसार अख्तर की गजल: फुर्सत-ए-कार फ़क़त चार घड़ी है यारो
  69. जां निसार अख्तर की गजल: उजड़ी-उजड़ी हुई हर आस लगे
  70.  ज़िन्दगी तनहा सफ़र की रात है: जां निसार अख्तर
  71. कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये : दुष्यंत कुमार
  72. अपाहिज व्यथा को सहन कर रहा हूं : दुष्यंत कुमार
  73. तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहीं : दुष्यंत कुमार
  74. नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं :  दुष्यंत कुमार
  75. मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ-निदा फ़ाज़ली
  76. बात कम कीजे ज़ेहानत को छुपाए रहिए - निदा फ़ाज़ली
  77. तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते- वसीम बरेलवी
  78. कैफी आज़मी की नज़्म "मकान"
  79. वो कमरा बात करता था जावेद अख्तर की नज्म
  80. कैफ़ी आज़मी की नज़्म फर्ज
  81. कैफ़ी आज़मी की गजल :  शोर परिंदों ने यु ही न मचाया होगा
  82. गुलजार की नज्म: अलाव
  83. अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ –राहत इंदौरी
  84. सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद है-अदम गोंडवी
  85. लोग हर मोड़ पर रुक – रुक के संभलते क्यों हैं: राहत इन्दौरी
  86. कैफी आज़मी की प्रसिद्ध नज़्म: दूसरा वनवास
  87. इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है: दुष्यंत कुमार की गजल
  88. आँख की ये एक हसरत थी कि बस पूरी हुई- शहरयार
चेतन आनंद

चेतन आनंद

लगभग 24 साल तक हिन्दुस्तान, नईदुनिया, आज समाज, दैनिक हिन्ट, दैनिक युग करवट, हमारा ग़ाज़ियाबाद पत्रिका में सलाहकार सम्पादक, समाचार सम्पादक, ब्यूरो चीफ, मुख्य संवाददाता, संवाददाता आदि सक्रिय पदों पर ज़िम्मेदारी निभाई। अपनी अभूतपूर्व कविताओं के लिए चेतन आनन्द जी को काव्य कुमार सम्मान ग़ाज़ियाबाद, काव्य-गौरव सम्मान ग़ाज़ियाबाद, प्रतिष्ठा पुरस्कार हैदराबाद, साहित्यश्री पुरस्कार बँगलुरु, हिन्दी साहित्य साधना सम्मान ग़ाज़ियाबाद, ओएनजीसी ग्रुप द्वारा हिन्दी साहित्य सेवा पुरस्कार लखनऊ, आगमन संस्था द्वारा दुष्यंत कुमार सम्मान 2017 सम्मान फरीदाबाद समेत दर्जनों पुरस्कार व सम्मान से नवाजा गया। वर्तमान में ‘काव्य-गंगा’ नाम से यूट्यूब चैनल का संचालन करते हैं। जिसके तहत वे नवोदित कवियों व शायरों को एक सार्थक मंच दिया जाता है।

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