चेतन आनंद : आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ

Chetan anand Hindi Gazal Aakhir mai baith hi gaya tanhaiyo ke saath

आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ

चलता भी कैसे वो भला परछांइयों के साथ।


 

मायूसियां मिलेंगीं तुझे] चाह छोड़ दे]

सपना कभी रहा भी है सच्चाइयों के साथ।

 

मैने सुना था मंज़िलें मिलती ज़रूर हैं

मैं चल रहा हूं इसलिये कठिनाइयों के साथ।

 

मैं चलते-चलते धूप के साये में रुक गया

वो रुकते-रुकते चल दिया परछांइयों के साथ।


 

पछवा हवा चली तो बहुत हो गये जुदा

कम लोग रह गये हैं अब पुरवाइयों के साथ।

 


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