चेतन आनंद : अजब अनहोनियां हैं फिर अंधेरों की अदालत में
Chetan anand Hindi Gazal: Ajab anhoniya hai fir andhero ki adalat mai

अजब अनहोनियां हैं फिर अंधेरों की अदालत में
उजाले धुन रहे हैं सिर अंधेरों की अदालत में।
पुजारी ने बदल डाले धरम के अर्थ जिस दिन से
सिसकता है कोई मंदिर अंधेरों की अदालत में।

सवेरा बांटने के जुर्म में पकड़ा गया जो कल
वो सूरज आज है हाज़िर अंधेरों की अदालत में।
जो डटकर सामना करता रहा दीपक, वो सुनते हैं
वक़ीलों से गया है घिर अंधेरों की अदालत में।

सुना है फिर कहीं पर रौशनी की द्रोपदी ‘चेतन’
घसीटी ही गयी आखि़र अंधेरों की अदालत में।

 

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