फूल तितली झील झरने चाँद तारे रख दिए

मेरी दो आँखों में उसने सब नज़ारे रख दिए।

मानता हूँ ज़िन्दगी की गोद तो मेरी ही थी

हाँ मगर इस गोद में सपने तुम्हारे रख दिए।

उसकी ख़ातिर उसके दरवाज़े पे अपना दिल रखाए

प्यार तो रक्खा ही रक्खाए सुख भी सारे रख दिए।

वो तवायफ है तो क्या उसमें भी माँ रहती तो हैए

मैंने उसके चरणों में गंगा के धारे रख दिए।

और फिर भी माँ ने मुझको खूब मीठापन दिया

मैंने उसके सामने आंसू जो खारे रख दिए।

 

 

 

 

 

 

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