चेतन आनंद : गुमनाम हर बशर की पहचान बनके जी

Chetan anand Hindi Gazal Gumnaam har bashar ki pahachaan banke ji

गुमनाम हर बशर की पहचान बनके जी

जो हैं उदास उनकी मुस्कान बनके जी।


 

गूंगी हुई है सरगम, घायल हैं साज़ सब,

हर हाल में तू इनका सम्मान बनके जी।

 

जो मन को मुग्ध कर दे, हलचल मचा दे जो,

ऐसी तू शंख-मुरली की तान बनके जी।

 

आलस तेरा किसी दिन अभिशाप क्यों बने,

अब जाग, उठ, धरा पर वरदान बनके जी।


 

आवाज़ दब न जाए घर में पड़े-पड़े,

लोगों से मिल, तू सबका सहगान बनके जी।

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